Yuti

शनि चन्द्र मंगल

शनि कर्म का दाता है,कर्म जो शरीर के अंगों को प्रयोग करने के बाद किया जाय,चाहे वह हाथ से किया जाय,चाहे वह पैर से किया जाय,चाहे वह दिमाग से किया जाय.जिस प्रकार से दीपक को जलाकर अन्धेरे का विनाश किया जाता है,उसी प्रकार से कर्म को करने के बाद सफ़लता और असफ़लता का भान करना पडता है,कर्म को करने के लिये सोचने की जरूरत पडती है,और सोचने का कारक चन्द्रमा को माना जाता है,जब किसी बात को सोचा जायेगा,तो वह क्रिया करने का रास्ता देगा,क्रिया करने के रास्ते को साधारण रूप से भी खोजा जाता है,और तकनीकी रूप से भी सोचा जाता है,जिस प्रकार से लिखने के लिये साधारण रूप से शारीरिक हाव भाव प्रकट करने का रूप भी माना जाता है,और उसे तकनीकी रूप से प्रदर्शित करने के लिये कलम से कागज पर भी लिखा जाता है,की बोर्ड की सहायता से कम्पयूटर भी लिखा जाता है,जितनी तकनीक विकसित होती जाती है,उतनी ही गति शीलता कार्य में आती चली जाती है,कर्म का क्षेत्र शनि जरूर निर्धारित करता है,लेकिन कर्म के लिये अन्य कारक भी जरूरी है,कर्म करने के लिये सोचना जरूरी है,अगर सोचा नही जायेगा तो कर्म किसी प्रकार से सफ़ल नही हो सकता है,शनि के साथ चन्द्रमा का प्रभाव हर तीसरे दिन चालू हो जाता है,वह किसी भी प्रकार की युति के अनुसार हो सकता है.तो यह तो मानना ही पडॆगा,कि चन्द्रमा के बिना कर्म का कोई महत्व नही रह जाता है.
कर्म को करने के लिये देखना भी जरूरी होता है,कर्म बिना देखे नही किया जा सकता है,और देखने के लिये तेज की जरूरत पडती है,तेज सूर्य से प्राप्त होता है,यह तेज कर्म के लिये जरूरी होता है,सूर्य देखता है,चन्द्र सोचता है,जब देखा जायेगा तो उस पर सोचा भी जायेगा,और जब सोचा जायेगा तो करने के लिये दिमाग भी काम करना चालू कर देगा,शनि से सूर्य की युति हर तीसरे महिने होती है,और जो भी कर्म किया जाता वह सूर्य के द्वारा देखा जाता है,सूर्य के आते ही शनि का तेज समाप्त हो जाता है,कहा यह भी जाता है,कि जहां से शनि की सीमा समाप्त होती है,वहीं से सूर्य की सीमा चालू हो जाती है.सूर्य नाम उजाला और शनि नाम अन्धेरा,कर्म अन्धेरे का ही नाम है.इसे मेहनत और ज्ञान रूपी उजाले से रोशनी में बदला जाता है.खाली शनि चन्द्र के चलते कर्म दूसरों से पूंछ कर करना पडता है,लेकिन मंगल के आते ही दिमाग में तकनीक आजाती है,उस तकनीक के द्वारा अपने ही दिमाग का प्रयोग करना आजाता है.

शनि चन्द्र बुध

इस युति को समझने के लिये आपको गांव या देहात क्षेत्र का दौरा करना पडेगा,और उस स्थान पर आपको जो देखना है,वह केवल एक किसान जो खेती का काम करता है,शनि कर्म है और बुध जमीन का रूप है,जो भी वस्तुयें जमीन के द्वारा पैदा होती है,वे सभी चन्द्रमा से जुडी होती है,चन्द्रमा पानी का रूप है,पानी से ही खेती किसानी के काम संभव है,इसे अन्य रूपों भी बदल सकते है,सीधे रूप से समझने के लिये शनि कर्म चन्द्र पानी और बुध व्यापार भी होता है,यानी पानी का व्यापार,शनि कर्म चन्द्र जनता और बुध व्यवसाय,जो लोग घूम घूम कर सामान बेचने का काम करते है,वे भी इसी श्रेणी मे आते है.आजकल एमबीए का प्रचलन काफ़ी बढ गया है,इस युति में अगर गुरु सहायक हो रहा है,तो जातक अवश्य एमबीए में सफ़लता प्राप्त कर लेता है.

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