वसुधा

नाडी के नाम का अर्थ जानने के लिये वसुधा का सन्धि विच्छेद करना जरूरी है,वसु का अर्थ नाग से है,और धा का अर्थ धारण करने से माना जाता है,पौराणिक कथाओं के अनुसार पृथ्वी को नाग के फ़न के ऊपर धारण किया हुआ माना जाता है,राहु और केतु दोनो ग्रह पृथ्वी के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों के रूप में जाने जाते है,राहु को फ़न और केतु को पूंछ माना जाता है,पाश्चात्य ज्योतिषियों के अनुसार राहु केतु दोनो चन्द्रमा के उत्तरी और दक्षिणी वृत माने जाते है,लेकिन प्रत्येक ग्रह के संचालक राहु केतु है,जहां प्रकाश है,वहां छाया है,प्रकाश को अपने अन्दर सोखने की क्रिया राहु के द्वारा होती है,और छाया के रूप में प्रदर्शित होना केतु का काम है,यह एक वैज्ञानिक विवेचन है,हमे केवल वसुधा नाडी के बारे में जानना है,इस नाडी का आस्तित्व मेष राशि के ००-००-१२ अंश तक ही सीमित है,सम्पूर्ण खगोलीय कांति का वृत बनाने पर ३६० अंश का वृत मिलता है,और इस वृत का १८०० वां हिस्सा एक नाडी के रूप में माना जाता है,वसुधा का अन्तर भी पूरे वृत का १८०० वां हिस्सा है.इस भाग का भौगोलिक प्रभाव पृथ्वी के सबसे नीचे के भाग पर जमीन के अन्दर वाली शक्तियों के अन्दर जाना जाता है,शरीर सृप वाले नाम और गुणो से पूर्ण इस नाडी का प्रभाव साक्षात रूप से द्रिष्टिगोचर होता है.तीन अक्षर और दो मात्रा के अन्दर जितने भी नाम आते है इसी नाडी के अन्तर्गत माने जाते है,पुरुष जातक के दाहिने हाथ के अंगूठे और स्त्री जातक के बायें हाथ के अंगूठे की छाप के अन्दर सांप का फ़न और और उस फ़न के ऊपर गोल परिधि के अन्दर बिन्दु साक्षात रूप से दिखाई देता है.

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वसुधा नाडी का जातक अच्छी तरह से सुनता है,और उसे कानों की तकलीफ़ नही होती है,अंगूठे के बीच में चित्रानुसार निशान मिलता है,और इसी निशान के चलते नाडी रीडर अपनी कला का परिचय देते है,अक्सर इस नाडी के नामों के आगे "कुमार" या कुमारी जरूर मिलता है,और प्रत्येक नाम किसी न किसी प्रकार से भेषज शास्त्र से जुडा होता है,अश्विनी कुमार,दो घोडो पर विराजमान दो पुरुषों के द्योतक है,तो अन्जू कुमारी आंखों मे लगाने वाले सुरमा या अंजन नामक भेषज से जुडे होते है,अक्सर इस प्रकार के जातक अपने पिता के दो भाई या दो बहिने होते है,और इनका जीवन बचपन से लेकर मृत्यु पर्यन्त दूसरों की सेवा में ही बीतता है,राज सभा या समाज में इनके द्वारा अच्छा काम करने के बाद भी कुत्सित द्रिष्टि से देखा जाता है,किसी के सामने जब इस प्रकार के जातक खडे हो जाते है,तो सामने वाला किसी बात को कहना चाहता है,और कुछ दूसरी बात कहने लगता है,इनकी इच्छायें अनन्त होती है,साथ ही किसी भी काम के अन्दर यह हाथ लगा देते है,तो वह बिना किसी बाधा के पूरा हो जाता है,इस प्रकार के जातकों के अन्दर एक अद्र्श्य शक्ति काम करती है.

वसुधा नाडी वाली महिलायें

वसुधा नाडी के अन्तर्गत जन्म लेने वाली महिलायें,अक्सर आधुनिकता की तरफ़ अग्रसर होती है,अपने को हर समय तन और मन से साफ़ रखना चाहती है,इनका स्वभाव धार्मिक होता है,और दो बहिने या तो एक ही घर में विवाही जाती है,या फ़िर दो बहिनो का आपसी सम्पर्क बहुत अच्छा रहता है,इनके जिन्दा रहने तक शादी किये जाने वाले घरों में भाईचारा बना रहता है,इनका स्वभाव अपनी उम्र से बडे लोगों की इज्जत करना मुख्य काम होता है,अपने को अपने जीवन को गुजारने के लिये काम धन्धे वाले व्यवसायों को अपने आप ही बनाती बिगाडती है,किसी की आधीनता इनको पसन्द नही होती है,इनका शारीरिक ढांचा बहुत ही सुन्दर होता है,और अधिक उम्र में भी यह यौवनायुत दिखाई देती है,लाल कपडा इनको पसंद होता है,इनको मिलने वाले जीवन साथी के अलावा इनका शारीरिक या मनसिक सम्बन्ध किसी अन्य पुरुष से जरूर होता है,और रसिया स्वभाव के कारण इनको पुरुष वर्ग केवल देखने लिये भी तरसता है,अक्सर इस प्रकार की महिलायें अपना काम निकालने के लिये अपने शरीर को प्रयोग तो करती है लेकिन जरूरी नही है कि वे किसी प्रकार से अपने को वैश्यावृत्ति की तरफ़ ले जावें.इनकी मुश्कान बहुत मधुर होती है,और दांतों के अधिक सफ़ेद होने के कारण इनकी हंसी चित्ताकर्षक होती है.

वसुधा नाडी वाले पुरुष

इस नाडी में पैदा होने वाले पुरुष जातक स्वतंत्र प्रकृति के होते है,वे किसी का बन्धन स्वीकार नही करते,उनको जो भी अच्छा लगता है उसी तरफ़ चल देते है,जन्म के बाद से इनका जीवन दूसरों के लिये ही चालू हो जाता है,और दूसरों की मदद करते करते इनका जीवन पार हो जाता है,इस प्रकार के जातक अपने को अन्तर्ज्ञान की वजह से लोक में प्रसिद्धि पा लेते है,इनके लिये धन वाले एतकलीफ़े कम ही मिलती है,और अपने शरीर का प्रयोग करने के बाद यह लोग काफ़ी धन कमा लेते है,दो शब्द का नाम और पिता के परिवार से कम ही लगाव इनकी सिफ़्त में होता है,पत्नी बनिया तबियत की होती है,और अपने काम को करवाने के लिये अपने पति का नाम और व्यवसाय प्रयोग करती है.वाहन पर चलना और वाहन वाले करतब दिखाना इनकी सिफ़्त होती है,अपनी दवा खुद ही करना जानते है,अपने देश और
अपने समाज को बचाने के लिये यह अपनी जीवन लीला को भी दांव पर लगा देते है.

व्यवसाय और सफ़लता

वाहनो की अच्छी जानकारी होने के कारण इनका काम वाहनो को दौडाने में और वाहन की कलाकारी की तरफ़ अधिक जाता है,जो लोग वाहनो को प्राप्त नही कर पाते है उनका कार्य महिलाओं को अपने कार्य क्षेत्र में प्रवेश करवाने के बाद उनसे काम लेते है,गरीबी में यह अधिक कामुक हो जाते है,और अमीरी में इनकी काम वासना का पता नही लगता है,इनके साथ कही भी आने जाने में एक साथी जरूर होता है,दवाइयों का व्यापार,डाक्टरी,इन्जीनियरिन्ग,मारकाट वाले क्षेत्र और रक्षा वाले कामो की तरफ़ इनका मन अधिक लगता है,अगर पुरुष जातकों को महिला या महिला जातक को पुरुष अपनी रिमोट शैली को अपना कर काम करवाना चाहे तो यह लगातार बिना रुके काम कर सकते है.

बीमारिया

इस नाडी के जातकों की उम्र ८३ साल के आसपास होती है,और अपनी पराशक्ति की सहायता से इनको कोई बीमारी नही लग पाती है,खान पान की त्रुटि से अगर कोई सामयिक बीमारी होती भी है,तो यह जल्दी ही अपनी योग्यता से उसे दूर कर लेते है,वसुधा नाडी वाले जातकों में पुरुष वर्ग में स्त्री वर्ग को कामवासना से संतुष्ट करने की पूरी योग्यता होती है,इनका जननांग घोडे की तरह का होता है,और अधिक समय तक मानसिक रूप से अपने को संभालने के कारण इस प्रकार के जातक महिलाओं को उनकी यौन संतुष्टि देने में माहिर होते है,इनको महिलाओं के अन्दर प्रसिद्ध होने के कारण जननांगों वाली बीमारियां अधिक लगती है,और अक्सर राहु का प्रभाव होने या किसी प्रकार जन्म के समय के ग्रहों का उपचार नही होने पर यह भयंकर बीमारियों से ग्रसित हो जाते है,महिला वर्ग में इस नाडी के प्रभाव के कारण वसुधा नाडी का जातक ही संतुष्ट कर पाता है,अन्य नाडी वाले जातकों से शादी होने पर इस प्रकार की महिलायें चिढचिढी हो जाती है,और अपनी काम वासना की शांति के लिये कृत्रिम साधनो को काम में लेती है.इन साधनो को प्रयोग मे लेने से उनको दिमागी रूप से विक्षिप्त होना भी मिलता है.

उपचार

वसुधा नाडी वाले जातक अपने लिये अश्विनी कुमार की पूजा पाठ के द्वारा अपने को ठीक कर सकते है,उनकी पूजा के लिये जो शास्त्रीय उपाय दिये गये है,वे इस प्रकार से है

अश्विनी कुमार का मंत्र

अश्विनी कुमार के लिये "ऊँ अश्विनी तेजसा चक्षु: प्राणेन सरस्वती वीर्यम वाचेन्द्रो बलेन्द्राय दधुरिन्द्रियम,ऊँ अश्विनी कुमाराभ्याम नम:(५०००) जाप ४३ दिन तक लगातार.

दान देने वाली वस्तुयें

घी से भरा घडा, और स्वर्ण,चन्दन,कमल,गुग्गुल,खीर लड्डू गुड का प्रसाद.

हवन में काम ली जाने वाली समिधा

खांड जौ और घी.

भुजा में धारण करने वाले पदार्थ

पुठकन्डा की जड,या अपामार्गा (चिडचिडा) की जड.

द्रश्य कष्ट

वात ज्वर नींद नही आना शरीर में पीडा बुद्धि भ्रम.


अपनी नाडी जानने के लिये लिखे:-
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