वैश्रणवी नाडी
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इस नाडी में लगन का भाव सूर्य शुक्र का होता है,ग्यारहवें भाव में राहु का आधिपत्य होता है,पंचम में केतु का अधिकार होता है,मंगल का प्रभाव भी पंचम में विद्यमान होता है,शनि बुध चन्द्र मा प्रभाव धर्म भाव के अन्दर अपनी मान्यता रखता है,शुक्र के साथ सूर्य के अधिकारी होने के कारण नाम का प्रभाव भी शाकाहारी देवी के लिये जाना जाता है,सूर्य से भगवान विष्णु और शुक्र से लक्षमी का साथ माना जाता है,राधेश्याम,सीताराम,मायाराम,राधेकृष्ण आदि नाम के लिये जातक का प्रभाव मिलता है,इस प्रकार के जातक के नाम के अन्दर विष्णु और लक्षमी का नाम सम्मिलित होता है,राहु के ग्यारहवें भाव में असर कारक होने के कारण इस नाडी के जातक के बडे भाई की औकात नही मिलती है,जातक खुद ही बडे भाई के रूप में होता है,उसके बायें कन्धे की तरफ़ राहु का असर होता है,और शादी या सम्बन्ध के लिये पति या पत्नी के समान विचार मिलने पर ही जीवन चल पाता है,किसी प्रकार से सात्विक और तामसिक का साथ नही निभ पाता है,जातक या जातिका का स्वभाव वैश्य वृत्ति का होता है,व्यक्ति अगर पुरुष है तो स्त्री के आदेशानुसार चलता है,और महिला है तो पति के अधिकार के द्वारा चलती है,अपनी चलाने की हिम्मत उसके अन्दर नही होती है,एक संतान खुद की पालनी पडती है दूसरी धर्म संतान के रूप में भतीजा या भानजा को पालना पडता है,जातिका या जातक के परिवार में किसी अयोग्य स्त्री के द्वारा परिवार का तोडा जाना मिलता है,और वह जायदाद चाहे कितनी ही बडी हो,एक स्त्री के कारण से वह छिन्न भिन्न होने लगती है,परिवार के दुश्मन हावी होते है,और समय आने पर जातक या जातिका अपने अथक प्रयत्न और प्रयास के द्वारा जायदाद को दुबारा से हासिल करते है,जातक या जातिका के पास माया या धन की चाहत नही होती है,उसके पास आशीर्वाद ही सबसे बढ कर होता है,और अधिक विद्या के प्राप्त करने के उपरान्त जातक या जातिका किसी भी प्रकार के धन को आसानी से कमा सकता है,या कमा सकती है,जातक या जातिका का ध्यान किसी भी प्रकार बुरे काम के अन्दर नही जाता है,वह आसानी से ईमानदारी के कामों के द्वारा काफ़ी धन कमाने की हिम्मत रखते है,किसी भी प्रकार की भौतिक सम्पत्ति का प्रयोग केवल औकात या नाम कमाने के लिये खर्च की जाती है,पैदाइसी रईस होने के कारण जातक या जातिका को अपने लिये जायदाद खरीदने की कोई आवश्यकता नही पडती है,एक भाई और एक बहिन का आस्तित्व आसानी से मिलता है,बहिन के नाम के अन्दर किसी प्रकार की सुन्दरता का कारण या जुडा होता है,जैसे फूलकंवर,कलावती आदि.शनि का प्रभाव धर्म के द्वारा जुडा होने पर केवल कार्य धर्म और भाग्य से जुडे किये जाते है,और जो भी कार्य किये जाते है वे सभी किसी न किसी प्रकार से राज्य के द्वारा सम्मानित किये जाते है,या समाज के द्वारा सराहा जाता है.
पिता की स्थिति के लिये इस प्रकार के जातक या जातिका के लिये भविष्य वाणी की जाती है कि वह अपने जन्म स्थान से दूर आकर बसा है,और अपने प्रयासों के साथ अपनी किसी बहिन बुआ के द्वारा सहयोग लिया गया है,साथ किसी प्रकार से धन या अस्पताल अथवा किसी प्रकार की समाज की सेवा के लिये काम किया है,जातक या जातिका के जीवन साथी के लिये जीवन के शुरुआती दौर में परेशानी का समय आता है,और उस परेशानी का अन्त करने के लिये जातक को कितने ही बलशाली लोगों का साथ मिल जाता है,उन्ही साथियों के अन्दर एक बहुत ही अनुभवी और बलशाली कार्यकर्ता की प्राप्ति होती है,जो जीवन भर एक सेवक की तरह कार्य करता रहता है.


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