जीवन मे क्यों आता है चिढचिढापन?

शरीर भी एक मशीन की भांति है,जिस प्रकार से मशीन में अधिक भार देने के बाद उसकी गति मंद हो जाती है,उसी प्रकार से किसी प्रकार की चिन्तायें मन के अन्दर लगने के बाद शरीर में कमजोरी आने लगती है,और कमजोरी के कारण शरीर की गति जो मष्तिस्क के लिये काम करती है,उसके अन्दर किसी न किसी प्रकार का अवरोध पैदा हो जाता है,काम का बोझ अधिक हो जाता है,और शरीर में बल उतने काम को करने का नही होता है तो शरीर के अन्दर एक दिमागी उत्तेजना पैदा होने लगती है,इसी उत्तेजना के कारण शरीर में गर्मी की मात्रा बढ जाती है,और शरीर की ग्राह्य इन्द्रियां बेकाबू हो जाती है,जब कोई बस नही चलता है,तो व्यक्ति के अन्दर एक ही शक्ति काम करती है,वह है चिढचिढाहट,अक्सर किसी को काम करते वक्त अगर वह एक ही काम के अन्दर मन लगाकर काम कर रहा है,और उसके दिमाग में तादात से अधिक जोर पड रहा है,और उस दिमाग को किसी विभिन्न दिशा की तरफ़ अक्समात मोडा जाये तो दिमाग के अन्दर चूंकि ग्राह्य शक्ति की कमी थी,उधर दिमाग के अन्दर अलावा कहने या समझने के लिये ताकत पडी तो दिमाग ने अपना किया जाने वाला भी काम भी बन्द कर दिया,और जो नया काम सामने आया,उस काम के प्रति दिमाग में झल्लाहट पैदा हो गयी,इसी झल्लाहट का नाम भी चिढचिढापन है.

अक्सर जब कभी मौसम के बदलाव के कारण शरीर में बुखार आता है,या किसी प्रकार से मच्छर आदि के काटने के बाद शरीर में मलेरिया के कीटाणु प्रवेश कर जाते है,तो भी शरीर के स्वेत रुधिर कण अपने द्वारा शरीर की नष्ट ताकत को जमा करने में लगे होते है,और अलावा किसी बात को करने के लिये या समझने के लिये शरीर में अलावा शक्ति के नही होने से भी झल्लाहट आजाती है,सामने वाला अगर किसी काम को कर रहा है,और उसे कई बार किसी काम को करने का उपाय बतला दिया गया है,फ़िर भी उसे समझ में नही आ रहा है,तो शरीर की मानसिक खोज समझती है,कि सामने वाला जानबूझ कर गल्ती कर रहा है,जबकि सामने वाले के अन्दर भी किसी बीमारी के कारण दिमागी ग्राह्य शक्ति की कमी है,और जब कोई काम बिगड जाता है,तो एक दम झल्लाहट आ जाती है,कि कितनी बार काम को करने का तरीका बता दिया है,और फ़िर भी सामने वाला उस काम को नही कर पा रहा है,और यही झल्लाहट एक दम शरीर में गर्मी बढा देती है,इसी गर्मी के कारण दिमाग फ़िर जबान या हाथ पैरों का काम लेना चालू कर देता है,सामने वाला अगर किसी कारण से अपने को कमजोर समझता है,तो वह अपने को बेबस मान कर सामने वाले की गर्मी को सहन करता है,और किसी प्रकार से और कोई रास्ता नही दिखाई देता है,तो इसके लिये वह यही समझता है कि उसे शारीरिक रूप से प्रताडित किया जा रहा है.
बच्चों के अन्दर झल्लाहट होती है,तभी वे बात बात पर रोना चालू कर देते है,झल्लाहट के भी उनके लिये या तो बीमारी वाले कारण होते है,या फ़िर कोई अक्समात शारीरिक कष्ट,बच्चे कह नही पाते है,उन्हें रोने के समय केवल दूध या उनका जो भी दिया जाने वाला भोजन है,उसकी कमी को समझ कर या भूखा समझ कर या तो दूध पिलाना शुरु कर दिया जाता है,या फ़िर हिला डुलाकर चुप करने का तरीका अपना लिया जाता है,बच्चे को ह्रदय के अन्दर ताकत नही होने के कारण वह हिलाने से केवल डर कर ही चुप हो जाता है,अक्सर की गयी खोजों के अनुसार बच्चा जब भी रोना चालू करता है,जब उसके अन्दर ग्राह्य क्षमता का विकास नही होता है,और वह किये जाने वाले व्यवहार को समझ नही पाता है,या फ़िर वह भी बात करने की कोशिश करता है,लेकिन कर नही पाता है,एक बात और बच्चे के रोने के लिये खोजी गयी है,कि वह जब पोटी या सूसू करने की कोशिश में होता है तो भी शरीर में अचानक हुई हलचल से उसे अजीब लगता है,और वह रोना चालू कर देता है.सर्दी गर्मी का असर भी बच्चे के लिये नया होता है,और उसे किसी भी परिवर्तन का भान नही होने से भी वह रोता है.

आजकल जो दहेज के मामले पुलिस थानो में बढने लगे है,और कुछ दिन बाद ही तलाक के मामले सामने आते है,उसका भी कारण झल्लाहट ही माना जाता है,यह झल्लाहट शादी या सम्बन्ध के समय में नही हुई इसका भी कारण है,कि शरीर के अन्दर ताकत थी और मानसिक गति का विकास सम्पूर्ण रूप से था,लेकिन शादी के कुछ दिन बाद हनीमून मनाने के बाद पति और पत्नी के दिमागों में झल्लाहट आने लगती है,आज के जमाने में रिस्ते टिक नही पाते,लोग कितने ही कारण गिनाते है,अच्छी लडकी या लडका देखा था,लेकिन कुछ समय बाद ही घर में तनाव पैदा हो गया,और सभी चाहने लगे कि यह सम्बन्ध जितनी जल्दी समाप्त हो जाये उतना ही घर का वातावरण सही हो जायेगा,लेकिन किसी ने दोनो की मुख्य बात को नही समझा,पति और पत्नी ने शादी के बाद जो हनीमून मनाया था,उसके बाद उनको पौष्टिक भोजन नही मिल पाया,या उन्होने हनीमून को रोजाना का नियम बना लिया,और सेक्स के प्रति उनकी चाहत लगातार तब तक बढी जब तक कि शरीर में तान रही,धीरे धीरे वीर्य रूपी शरीर का बल समाप्त होने लगा,और दोनो के अन्दर कमजोरी के कारण सुनने और समझने की ताकत का खात्मा होने लगा,जब ताकत नही रही तो पति को पत्नी के पास जाने में डर लगने लगा,और पत्नी को पति से डर लगने लगा,इसी बात को लेकर दोनो में तकरार होने लगी,अगर पति का शरीर बलबान हुआ और पत्नी का शरीर कमजोर हुआ तो दोनो की नही बन पायेगी,कारण पत्नी को पूरे दिन पति के द्वारा जबरदस्ती सेक्स को रोकने के उपाय और बचने के कारण खोजने पडेंगे,और उन कारणो को खोजने के लिये जैसे ही किसी घरेलू काम को करने का वास्ता पडा तो मन तो वही लगा था,और जो किया जा रहा था,वह जानते हुये भी सही नही हो पाया,परिणाम घर के अन्दर तकराहट चालू हो गयी,

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