सिद्ध वस्तुयें

हनुमान जी की आंखें

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श्रीराम ने एक बार देवी का आहवाहन करने के लिये यज्ञ शुरु किया और यज्ञ में कमल के फ़ूल रखना भूल गये,देवी ने प्रकट होकर जब कमल के फ़ूल की याद दिलाई तो श्रीराम को अपनी भूल का अहसास हुआ,उन्होने तीर से अपनी आंखे कमल के फ़ूलों की जगह अर्पित करने के लिये जैसे ही तीर को आंख में निकालने के डालना चाहा,वैसे ही विभीषण ने उपाय सुझाया कि लंका में रावण सोने की आंखे चण्डी के यज्ञ में अर्पित करता है,उन्होने हनुमान जी को लंका के गढ से सोने की बनी आंखे लाने के लिये कहा,लेकिन रास्ते में हनुमानजी को माता अंजनी के द्वारा उनकी शक्ति को बढाने के लिये और भरपूर ताकत प्रदान करने के लिये सूर्य भगवान को अपने हाथ से बनायी आंखे समर्पित करते हुये देखा था,वह आंखे ऋष्यमूक पर्वत पर टाइगर नामक पत्थर से बनाया करती थी,कालान्तर में यह आंखे जब भी किसी बडी बाधा से निकलने के लिये उपाय किये जाते है,जैसे बडा कर्जा हो गया है और उससे निकला समझ्में नही आ रहा है तो मंगलवार के दिन इन आंखों को हनुमान के मन्दिर में लेजाकर उनके सामने रखकर प्रार्थना की जाती है कि जैसे ही वे सम्बन्धित बाधा से निकालेंगे उसी समय यह आंखे आकर हनुमानजी को अरपित कर देंगे,वापस उन आंखों को घर के मुख्य दरवाजे को देखता हुआ किसी एडहसिव से हनुमान जी की तस्वीर में आंखों की जगह पर लगा दिया जाता है,इन आंखों को लगाने का कोण इस प्रकार से होता है कि नाक के पास वाला हिस्सा थोडा झुकाकर रखा जाता है,यह आंखे घर में किसी भी बाधा या बुरी नीयत से प्रवेश करने वाली आत्मा को भयभीत करती है और जब मनोरथ में साधा हुआ कार्य पूर्ण हो जाता है तो वह आंखो वाली तस्वीर लेजाकर हनुमानजी के मंदिर में सवा पाव या सवा किलो सफ़ेद बर्फ़ी के साथ लेकर चढा देते है,इन आंखो को विशेष रूप से पंचधातु में बनवाय जाता है और टाइगर रत्न को शुद्ध तरीके से इन आंखों की जगह बैठाया जाता है,सभी खर्चों को मिलाकर इन आंखों की कीमत चार हजार रुपया होती है,भारत में कही भी कोरियर से भेजने का खर्चा मय पेकिंग व बीमा के चार सौ रुपया है.

काला सुलेमानी पत्थर

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पुराने जमाने में बच्चों को नजरबट्टू पहिनाया जाता था,लेकिन जब से भारत आजाद हुआ है यह नजरबट्टू केवल कांच का ही मिलने लगा है,कारण पाकिस्तान होते हुये सुलेमान से यह यह पत्थर लाया जाता था,इसे पहिनाने के बाद बच्चे पुराने जमाने में किसी भी स्थान पर आ जा सकते थे,किसी की भी बुरी नजर अला बला नही लगती थी,यह आजकल नकली मेला प्रदर्शनी आदि में लोग बेचते देखे जा सकते है,लेकिन यह पत्थर आज भी भारत में उपलब्ध है,जो व्यक्ति भूत प्रेत या छाया से ग्रसित होते है उनके लिये यह पत्थर गले में पहिन कर रखा जाता है इससे नजर दोष और किसी प्रकार के बाधा सम्बन्धी दोष नही लगते है,जब जातक की कुंडली में राहु की दशा चल रही हो,और राहु मे शनि का अन्तर चल रहा हो,अथवा राहु या अकेले शनि की दशा चल रही हो,जातक का दिमाग घर गृहस्थी और अपने काम से दूर हो रहा हो,पति का दिमाग पत्नी से दूर हो रहा हो,पत्नी पति से दूर जा रही हो,कई प्रकार की आशंकायें दिमाग में लगातार घर कर रही हो,घर परिवार या कार्य स्थान में लोग शक करने लगे हो,बुखार या इन्फ़ेक्सन वाली बीमारियां परेशान कर रही हो,किसी न किसी कारण से एलर्जी वाले रोग परेशान कर रहे हों,जल्दी से छींक आ रही हों,नाक बन्द रहती हो,किसी भी काम में मन नही लग रहा हो,दिमाग में किसी बात का डर बैठ गया हो,जल्दी से नजर लगती हो,विद्यार्थी शिक्षा से दूर जा रहा हो,पढाई करने के बाद भी मन नही लग रहा हो,खूब याद करने के बाद भी दिमाग में पढी हुयी वस्तु नही बैठती हो,बेकार का साहित्य पढने और बेकार के काम करने जुआ लाटरी नशे आदि की लत लगने पर यह अभिमन्त्रित पत्थर बहुत अच्छा फ़ायदा देता है,इसकी दक्षिणा Rs.3100/- है.

सुपारी गणेश

सुपारी का निर्माण प्रकृति ने बहुत ही सोच समझ कर किया है। मनुष्य इसे पहले पान तम्बाकू में प्रयोग में लाता था। लेकिन शोध के बाद पता लगा है कि सुपारी के अन्दर से जो विकरण निकलते है वे अनौखी शक्ति से पूरित होते है। सुपारी को अन्दर से काट कर देखा जाये तो उसके अन्दर लाल और सफ़ेद रंग की अनगिनत धारियां देखने को मिलती है। सुपारी के अन्दर बीज भी होता है लेकिन इतना महीन होता है कि कभी कभी दिखाई भी नही देता है और भूल से अगर पान या तम्बाकू के अन्दर चला जाता है तो प्रयोग करने वाले अचानक अचेत कर देता है। सुपारी को मांगलिक कार्यों के अन्दर प्रयोग में लाया जाता है,इसका भी कारण है जैसे गाय के गोबर के अन्दर ऊर्जा होती है लेकिन देखी नही जा सकती है उसी प्रकार से लाल या पीला सूत सुपारी के ऊपर बांधने के कारण जो शक्तियां होती है वह बंध जाती है और ऊर्जा को एकत्रित कर लिया जाता है। सुपारी स्वयं में एक यंत्र का कार्य करती है और अगर इसके ऊपर गणेशजी की प्रतिमा को उकेर दिया जाता है तो वह और अधिक द्रश्य हो जाती है। साधन के रूप में सुपारी को रखना और सुपारी के ऊपर गणेशजी की मूर्ति को देखना बहुत ही उत्तम माना जाता है। इसे बनाने में और मंत्रों से पूरित करने में समय लगता है उसी के एवज में इसकी कीमत मात्र पांच सौ एक रुपया रखी गयी है।

हरिद्रा गणेशजी

हल्दी गुरु की कारक होती है और बिना गुरु को साथ लिये कोई भी मांगलिक कार्य नही किया जाता है। विवाह में बाधा नही आये इसलिये कन्या को विवाह के पहले से ही हल्दी को चढाना शुरु कर दिया जाता है। हल्दी को कितना ही छीला जाये लेकिन उसके अन्दर से पीलापन ही सामने आयेगा,वह किसी भी तरह से कोई अपना दूसरा रूप नही बदलती है। हल्दी के ऊपर अगर गणेश जी को बना दिया जाये और उसे मन्त्रों से पूरित कर दिया जाये तो वह मांगलिक कार्यों के लिये अति उत्तम उपाय हो जाता है,अष्टधातु में इसके पेंडेन्ट को बनाकर गले मे पहिनने से पुत्र या पुत्री की शादी वाली बाधायें दूर हो जाती है ऐसा अनुभव किया गया है। हल्दी रोजाना के मशालों में भी प्रयोग में लायी जाती है और हल्दी के अन्दर चूना मिलाकर कुमकुम भी बनाया जाता है,हल्दी और चूना के मिश्रण से बना कुमकुम शुद्ध होता है,लेकिन शुद्ध चूना को मिलाकर बनाने से वह विशुद्धता की श्रेणी में आजाता है,बाजार में मिलने वाली रोली और मोली को हल्दी और चूना के मिश्रण से बनाया जाता है लेकिन आर्थिक हेराफ़ेरी के कारण मिट्टी को पीले रंग से रंगने के बाद उसमें चूना मिलादेने से भी वह कुमकुम का रूप धारण कर लेता है,इससे महिलाओं को एक तो सुहाग के सामान में मिलावटी कारण होने से दिक्कत आने लगती है और मिट्टी में किस तरह का पानी और मिट्टी का प्रयोग हुआ है उससे मिलने वाले इन्फ़ेक्सन से माथे पर जहां कुमकुम प्रयोग में लिया गया है इन्फ़ेक्सन होने और त्वचा का जलना आमवात मानी जाती है। हल्दी से अपने घर पर ही कुमकुम बना लेना समझदारी का काम है,इसी हल्दी के बने गणेशजी जो पंचधातु में बनाये जाते है और नवग्रह को शान्त करने में सक्षम होते है तथा इनकी प्रतिष्ठा उचित समय में उचित मंत्रों से करने पर शक्ति का आभास देने लगते है,इनकी बनाने और मन्त्रों से पूरित करने की दक्षिणा मात्र पचपन सौ रुपया है.

मोती गणेश

जिन बच्चों की कुंडली में राहु के कारण वे पढाई में अपना मन नही लगा पाते है और एक ही समय में कई विषयों में अपने दिमाग को लगाना शुरु कर देते है तो उनके सम्बन्धित विषय में कम नम्बर आने लगते है। देखने में तो बच्चा बहुत मेहनत कर रहा होता है लेकिन वह आंखे तो किताब पर लगाये होता है और उसका दिमाग कहीं और भटक रहा होता है। आज के जमाने में टीवी कम्पयूटर और कई तरह के गेम आदि आजाने से राहु का प्रभाव बच्चों के अन्दर एम्यूजमेंट की तरफ़ भागता हुआ और गाडी आदि चलाने के लिये देखा जा सकता है,गलत पिक्चर आदि देखने और फ़ोटोग्राफ़ी में मन लगाने के कारण वे अपने मित्रों से भी घिर जाते है और एक बचपन का दिमाग फ़ितरती कारणों में घिरने के कारण जो उसे शिक्षा लेनी है उसे नही ले पाता है माता पिता की कठिन कमाई और उनकी मेहनत पर पानी फ़ेरता है वह तो ठीक है लेकिन खुद के भविष्य को भी अन्धकार मय बना लेता है,समुद्र में मिलने वाले शुद्ध मोती को लेकर उस पर गणेशकी प्रतिमा बनायी जाती है,उसे सत्तावन सौ बार शुद्ध मुहूर्त में अभिमन्त्रित करना पडता है,फ़िर चांदी में पैक करना पडता है,इसे सोमवार के दिन पहिना जाता है,इसकी कीमत भी इकत्तीस सौ रुपया है.

सूर्य गणेश

इन्हे सूर्यकांति मणि भी कहा जाता है,पिता पुत्र के आपसी विचार नही मिलने पर इसे पुत्र और पिता दोनो को पहिनाया जाता है। माणिक से बने गणेशजी की प्रतिमा श्रीगणेश को केतु की प्रतिमा मानने पर अष्टधातु में बनाया जाता है,जिन लोगों के पास सुबह शाम के ही काम होते है,जिनका घरेलू रिस्तों में दिक्कत आती है उन्हे भी यह प्रतिमा फ़ायदा देने वाली होती है। जो लोग राजभय से ग्रस्त होते है,व्यवसाय में झूठे राजकीय आक्षेप लगाये जाते है,और बेकार के करों के चक्कर में फ़ंस जाते है,उनके लिये यह प्रतिमा लाभकारी होती है.इस प्रतिमा की कीमत मय अभिमन्त्रित करने के सात हजार पांच सौ रुपया होती है.

मूंगा गणेश

मूंगे पर गणेशजी की प्रतिमा बनाने के बाद उसे अष्टधातु में पैक कर दिया जाता है,पति पत्नी में आपसी विवाद के लिये इसे पहिना जाता है। मन्गल पराक्रम का कारक है और मन्गल के साथ राहु के आने से खून के अन्दर इन्फ़ेक्सन वाली बीमारियां पैदा हो जाती है। अक्सर नीच के मन्गल के साथ राहु के होने से लो ब्लड प्रेसर और उच्च के मंगल के साथ राहु के होने से हाई ब्लड प्रेसर की बीमारी मिलती है,मन्गल के साथ राहु अगर छठे आठवें या बारहवे भाव में होता है तो जातक का जीवन अक्सर बेकार सा हो जाता है। राहु मन्गल के प्रभाव से बचने के लिये जातक को केतु के रूप में गणेश की और मंगल के रूप में मूंगा की सहायता लेनी पडती है,राहु रूपी हाथी को मंगल रूपी अंकुश और केतु रूपी साधने की हिम्मत जातक के अन्दर पैदा हो जाती है। साफ़ शुद्ध मूंगा पर गणेशजी की प्रतिमा को बनाने और अष्टधातु में पैक करने का तथा मंगल केतु के मंत्रों से अभिमंत्रित करने का खर्चा पैंतालीस सौ रुपया होता है.

पन्ना गणेश

जातक को शिक्षा में बाधा आना और नौकरी आदि के लिये इन्टरव्यू आदि में दिक्कत आने के लिये पन्ना के गणेश को पहिना जाता है। पन्ना बुध का कारक है और बुध वाणी के साथ मनसा वाचा कर्मणा प्रसिद्धि देने वाला माना जाता है। कमन्यूकेशन की परेशानी होने पर भी पन्ना सहायता करता है,इसके साथ ही बेन्किग मामले धन को जमा नही करपाने के मामले में पन्ना ही लाभदायक माना जाता है। बुध की स्थिति अधिकतर जातकों की कुंडलियों में अस्त मिलती है या बक्री मिलती है,जिनकी कुंडली में बुध त्रिक भावों में होता है उनके लिये कमन्यूकेशन की परेशानी अधिक हो जाती है,और संसार में सबसे बडी बात कमन्यूकेशन की ही मानी जाती है,अधिकतर मामलों में लोग कमन्यूकेशन के मामले में ही फ़ेल हो जाते है और तरक्की नही कर पाते है,केतु रूप में गणेशजी साधन देने के लिये और बुध रूप में पन्ना अष्टधातु रूप में नवों ग्रहों का संयोग अपना अपना बल देना शुरु कर देते है। इसके बनाने और अभिमंत्रित करने की कीमत पिचहत्तर सौ रुपया है.

गोमेद गणेश

गोमेद राहु का रत्न है,राहु में ताकत होती है कि पलक झपकते ही क्या से क्या कर देता है। अगर देखा जाये तो शनि में कोई ताकत नही होती है,शनि एक सांप की तरह से होता है राहु उसका मुंह होता है और केतु उसकी पूंछ होती है। शनि के यह दोनो चेले शनि के अनुसार अपना कार्य करते रहते है,अगर राहु और केतु को अपने हित में कर लिया जाये और जो बुराई करने वाले ग्रह है उन्हे ही साथ ले लिया जाये तो वे बुराई न करके भलाई करने लग जायेंगे ऐसा विश्वास है। कहावत भी है कि बसे बुराई जासु तनु ताही को सम्मान,भलो भलो कहि छोडिये खोटिन को जप दान,यानी बुराई जिसके पास बसती है उसी का सम्मान किया जाता है,भला तो भला रहता ही है,केवल खोटे ग्रहों के लिये जी जाप दान आदि किये जाते है। राहु भ्रम देने वाला ग्रह है और केतु साधन देने वाला ग्रह है जब राहु भ्रम देता है तो केतु साधनों को देना बन्द कर देता है,शादी विवाह भी जीवन की गाडी को चलाने के लिये सहायक के रूप में माने जाते है,व्यक्ति धर्म अकेला कर सकता है,अर्थ अकेले कमा सकता है और मोक्ष भी अकेला प्राप्त कर सकता है लेकिन काम नाम का पुरुषार्थ वह अकेला नही कर सकता है उसके लिये एक जीवन साथी की जरूरत पडती है। जीवन साथी के आने से एक तो व्यक्ति के लिये संसार में नया निर्माण नई औकात और नया व्यक्तित्व बनाने की चाहत पैदा हो जाती है उसके बाद अपनी पीढी और अपने शरीर को नया जन्म देने के लिये बच्चे सामने आते है,इसके अलावा जो इतिहास शुरु से चला आया है उसके आगे के नाम का बनना भी शुरु हो जाता है। शादी विवाह के मामले में गुरु काम करता है लेकिन गुरु में जब राहु का योग शुरु होता है तो शादी विवाह के अन्दर या तो भ्रम बने रहते है,या फ़िर कोई शादी विवाह वाला सामने भी आता है तो जैसा जीवन साथी होना चाहिये उस प्रकार का जीवन साथी नही आ पाता है,बल्कि शादी के बाद और कई प्रकार की मुशीबतें भी पैदा हो जाती है जैसे अनबन रहना और आपसी प्रेम नही बन पाना,शुरु से ही लडाई झगडा और कोर्ट केश आदि होने लगना,एक पुरुष या एक स्त्री के होते हुये भी व्यक्ति का झुकाव कई स्त्री या पुरुषों की तरफ़ हो जाना आदि कारण बनने लगते है। इसके अलावा जब व्यक्ति के अन्दर राहु के भ्रम प्रवेश करते है तो व्यक्ति किसी भी कार्य को नही कर पाता है उसके अन्दर झूठे बहाने बनाने की आदत पड जाती है और जैसे ही किसी काम को करने का मौका आता है कोई न कोई कारण सामने आकर खडा हो जाता है और व्यक्ति अपने किये जाने वाले काम कोबीच में छोड कर दूसरा काम करने लगता है इस प्रकार से पहले वाला काम भी पूरा नही हो पाता है और दूसरे काम का भी पूरा होना नही हो पाता है परिणाम में केवल सामने घाटा ही मिलने लगता है,इस गति में कोई शिक्षा दिमाग और साथ वाले काम भी नही आते है और खुद को ही परेशान होना पडता है। पीले गोमेद पर गणेशजी को बनाने का अभिप्राय केवल इतना ही है कि राहु और केतु को एक साथ मिलाकर गुरु को भी साथ कर दिया जाये और अष्टधातु में बनाकर सभी ग्रहों की धातुओं को जोड दिया जाये तथा राहु के मन्त्रों से अभिमन्त्रित करने के बाद उसे प्रयोग में लाया जाये। इस प्रकार के गोमेद के बने गणेशजी की कीमत पचपन सौ रुपया है.

सफ़ेद मूंगा के गणेश

मूंगा मंगल का रत्न है और लाल रंग की इसकी पहिचान होती है लेकिन नीच के मंगल की गति सफ़ेद रंग की होती है,कर्क का मंगल नीच का माना जाता है इस प्रकार के मंगल के कारण जातक का रहने वाला स्थान माता मन और कितने ही आसपास और जानकारो से केवल क्लेश ही होता रहता है,जातक को ह्रदय सम्बन्धी बीमारिया पैदा हो जाती है जैसे ही जातक कोई वाहन वाला काम करता है वाहन भी परेशान करने लगते है और घर के क्लेश के कारण जो भी काम होना होता है वह भी नही हो पाता है। चन्द्रमा का नकारात्मक बिन्दु केतु को माना गया है और यह भी माना जाता है कि केतु का प्रभाव साधनों के रूप में माना जाता है,जैसे ही साधन मिलते है और उन साधनों को प्रयोग करने वाली विद्या का मिलना होता है साधन चलने लगते है लेकिन साधन और विद्या का कोई महत्व तब और नही रहता है जब लक्ष्मी दूर होती है,तीनो का एक साथ रहना जरूरी है,साधन है और विद्या नही है तो साधन बेकार है विद्या है और साधन भी है लेकिन लक्ष्मी नही है तो दोनो बेकार उसी प्रकार से हो जाते है जैसे गाडी है चलाना आता है लेकिन पेट्रोल के लिये पैसे नही है तो गाडी बेकार है,इन तीनो प्रकार के साधनो के प्रति भाग्य को जुटाने के लिये सफ़ेद मूंगे पर गणेशजी को बनाया जाता है,अष्टधातु में पैक किया जाता है,तथा केतु शुक्र मंगल और चन्द्र मंत्रो से अभिमन्त्रित किया जाता है,इस प्रकार से इस प्रकार के गणेशजी की कीमत पिचहत्तर सौ रुपया हो जाती है.

मूंगा के हनुमानजी

कहा गया है कि लाल देह लाली लसे और धरि लाल लंगूर,वज्र देह दानव दलन जय जय जय कपि शूर,यह दोहा हनुमान जी के लिये बताया गया है,कुंडली में मंगल दो प्रकार का होता है एक नेक मंगल और दूसरा बद मंगल। नेक मंगल के देवता हनुमान जी होते है और बद मंगल के देवता भूत प्रेत पिशाच होते है। नेक मंगल का रूप पीलापन लिये हुये लाल होता है और बद मंगल का रूप सुर्ख लाल होता है। हनुमान जी की आभा किसी भी तरह के पैशाचिक दोष को शान्त करने के लिये मुख्य होती है। मूंगा मंगल का रत्न होता है और मूंगे पर ही हनुमान जी की प्रतिमा को बनाकर उसमें हनुमान जी के मंत्रों से अभिमंत्रित कर दिया जाये तो शक्ति का मूल्य आपको अपने आप पता लगना शुरु हो जायेगा,मेहनत से और मूंगा जैसे रत्न पर हनुमान जी की प्रतिमा को बनाने तथा उसे अष्टधातु में पैक करने की कीमत पचपन सौ रुपया है.यह पेंडल मंगली दोष वाले पति पत्नियों के लिये भी लाभकारी है,बीमार रहने वाले लोगों के लिये लाभदायक है तथा जिन्हे खून की बीमारी है उनके लिये भी यह प्रतिमा लाभकारी है,तकनीकी काम करने वाले डाक्टर इन्जीनियर बिल्डर आदि के लिये यह प्रतिमा बहुत ही चमत्कारिक है.

पन्ना हनुमान जी

पन्ना को व्यापार के लिये मुख्य माना जाता है जो व्यापार करने वाले लोग है और जिन्हे व्यापार की तकनीक कम आती है उनके लिये बहुत अच्छा है इसके अलावा लोगों की नजर दोष से भी मुक्ति में सहायक होता है,कीमत अभिमंत्रित प्रतिमा की सात हजार पांच सौ रुपया है.

टाइगर में हनुमानजी की प्रतिमा

अक्सर लोगों के सामने एक तकलीफ़ पैदा होने लगती है कि वे जो भी वाहन को चलाते है उनके द्वारा एक्सीडेंट बहुत होते है धन की हानि के साथ शरीर की भी हानि होती है। मान लिया जाये कि धन की हानि तो बीमा कम्पनी दे देती है लेकिन शरीर की हानि को बीमा कम्पनी नही दे पाती है जो अंग खराब हो गया वह तो हो ही गया और जीवन के एक हिस्से से दूरियां भी बन जाती है। कभी कभी बडी भूल होने से शरीर की भी हानि हो जाती है,टाइगर रत्न दो रंगा होता है और पीली आभा के साथ काली या सुरमई या कत्थई धारियां इस पर होती है,बहुत मजबूत रत्न होता है और लकडी के रूप में दिखाई देता है,चीते जैसी चमक वाला होने के कारण इसे टाइगर का नाम दिया गया है। जब भी कोई दुर्घटना होती है उस समय कोई न कोई बाधा सामने होती है,जैसे चित्त का दूसरी जगह पर चले जाना,या दिमाग के अन्दर भ्रम पैदा हो जाना दुर्घटना के मुख्य कारण होते है,मशीनी भूल तभी होती है जब चित्त शांत नही होता है। इस रत्न पर हनुमान जी प्रतिमा को गढा जाता है और अष्टधातु में पैक करने के बाद अभिमंत्रित किया जाता है,इसकी कीमत पच्चिस सौ रुपया है.

फ़िरोजा में हनुमान जी

फ़िरोजा राहु और बुध की युति का रत्न है,यह युति उन लोगों के लिये बहुत लाभकारी होती है जो आई टी फ़ील्ड से जुडे होते है। जिन्हे कम्पयूटर या रोबोट जैसी तकनीक से काम करना होता है जो कमन्यूकेशन के काम में माहिर होना चाहते है जो काल सेंटर को चलाना या उसके अन्दर काम करना चाहते है उनके लिये तकनीकी दिमाग पैदा करने के लिये यह प्रतिमा लाभकारी होती है,कीमत अठारह सौ मात्र है.

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