शनि की साढेशाती का प्रभाव (2)

दूसरे भाव में शनि की साढेशाती का प्रभाव

कालचक्र के अनुसार दूसरा भाव धन और भौतिक वस्तुओं के लिये जाना जाता है। इस भाव से हम अपने खास कुटुम्ब के बारे मे जानते है। इस भाव से पत्नी या पति का आठवां भाव भी माना जाता है,माता से इस भाव को ग्यारहवां और पिता से यह भाव छठा माना जाता है। वैसे तो पिता के लिये दसवां भाव ज्योतिष से मान्य है लेकिन धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष के भावों से इस भाव को धर्म का भाव और खूनी रिस्ते के कारण जातक के लिये नवां भाव ही पिता के लिये माना जाता है। इस भाव से सम्बन्धित वस्तुओं में सामान में व्यक्तियों में सम्बन्धों में सभी स्थानों में शनि का प्रभाव शामिल हो जाता है। शनि की सिफ़्त ठंडी और अन्धेरी है,पानी वाली चीजों और बहने वाली चीजो पर यह अपना असर देता है,सरसों के तेल को देर में जमा पाता है,सबसे अधिक असर पानी वाली चीजों पर देता है। मन का रूप पानी की तरह से है,मन का कारक चन्द्रमा है,चन्द्रमा के आगे और चन्द्रमा के साथ तथा चन्द्रमा के पीछे अगर शनि है तो जातक की मानसिक दशा का फ़्रीज होना जरूरी है। शनि का प्रभाव अगर धन पर है तो वह चल पूंजी को फ़्रीज कर देता है,जैसे ही शनि का प्रभाव लगन मे होता है जातक अपने निवास के लिये अपने कामो के लिये धन को खर्च कर देता है,अधिकतर मामलों में जातक अपने हमेशा के कमाने के साधनों के लिये भी मशीनी उपकरण और अन्य कामों के प्रति धन को खर्च देता है,इस प्रकार से धन तो होता है लेकिन अचल सम्पत्ति के कारकों के रूप में होता है,जातक को अक्समात पहले किये गये खर्चे के कारण हाथ खुला होता है तो वह जो भी पास में होता है उसे खर्च कर लेता है,उसका ध्यान अधिकतर मामलों में घर की तरफ़ जनता की तरफ़ वाहनो की तरफ़ किसी नई तकनीकी या कार्य वाली विद्या की तरफ़ होती है,इसके अलावा वह अपने ठंडे स्वभाव और धन की तंगी के समय अपने अपनी माता को और अपने जान पहिचान के लोगों को देखता है,इस प्रकार से देखने से वे लोग काम नही आते है,और आते भी है तो उनका भी धन जातक के द्वारा बरबाद हो जाता है,इस तरह से आगे की सहायता भी मिलनी बन्द हो जाती है,माता और मकान तथा जानकार लोगों के बाद शनि की निगाह कर्जा दुश्मनी बीमारी वाले भाव में जिसे छठा भाव कहते है में जाती है,वह कर्जा लेता है कर्जे को लेने के समय वह जो वायदा करता है वह वायदा पूरा नही हो पाता है परिणाम में लोगों से दुश्मनी हो जाती है। अधिकतर काम नही करने या अधिक काम करने के बाद कर्जा आदि चुकाने की आफ़त में जातक पर शरीर का श्रम अधिक पडता है,वह भोजन को सही तरीके से कर नही पाता है अथवा भोजन के अन्दर तामसी चीजें जो भूख को मारने वाली होती है अथवा अधिक काम को जल्दी करने के चक्कर में जातक उन वस्तुओं का सेवन करने लगता है जो कभी भी सेहत के लिये अच्छी नही होती है,जैसे पान तम्बाकू गुटका बीडी सिगरेट गांजा अफ़ीम और शराब जैसी लत लगा बैठता है,वह इन वस्तुओं को सेवन करने के बाद समझता है कि वह काम को अधिक कर रहा है लेकिन इन वस्तुओं के सेवन शरीर के किसी न किसी भाग में कोई खराबी आजाती है,जातक को धन देने की चिन्ता होती है इधर शरीर में बीमारियां लग जाने से अस्पताल आदि भी जाना पडता है,इस प्रकार से जातक को और अधिक परेशानी होती है। इसके अलावा जातक के दूसरे भाव का शनि जब अष्टम भाव को अपनी सप्तम पूर्ण द्रिष्टि से देखता है तो जातक को धन और खाने पीने के मामले में कोई भी अपमान सुनने में हिचकिचाहट नही होती है,कोई जातक का अपमान करता जाये और जातक को धन देता जाये तो उसे अपमान करने वाले से कोई गिला शिकवा नही होती है। इसी के साथ जातक को धन की आवश्यकता के समय किसी भी किसी भी रिस्क को लेने में भी हिचक नही होती है,वह किसी भी प्रकार की रिस्क धन के लिये ले सकता है। चोरी सेन्धमारी छल कपट और बेईमानी जालसाजी आदि काम करने में जातक अपने को माहिर समझने लगता है,इन कामों में उसे यह लगता है कि वह जल्दी से धन को कमा रहा है और अपने धन से दूसरे के धन को भी दे रहा है,साथ हे उसे खाने पीने को और जल्दी से धन कमाने के चक्कर में नीति अनीति कानून कायदा कोई भी पता नही होता है,लेकिन शनि जैसे ही वक्री होता है उसी समय उसके सभी राज जो उसने छल से कपट से किये होते है वे सभी सामने आने लगते है,इस प्रकार से जातक को बन्धन की सजा भी भुगतनी पडती है,अथवा पीछे के किये गये अपराधों के कारण या पीछे की गयी गल्तियों के कारण इस शनि के कारण जातक को कारावास जैसे कष्ट उठाने पडते है। इस स्थान की द्रिष्टि के बाद शनि की द्रिष्टि लाभ देने वाले साधनों पर पडती है,मित्रो दोस्तों बडे भाइयों बहिनो पुत्र वधू आदि पर पडती है,अधिकतर लाभ देने के मामले में और जातक के द्वारा स्वार्थी भावना को प्रकट करने या उपरोक्त लोगों से कोई छल कपट करने के बाद वह अपना विश्वास खो देता है,और जो लाभ काम करने के बदले में मिलना था वह बन्द हो जाता है और जो काम किया जाता है वह भी बन्द हो जाता है। इस मामले में अधिकतर देखा गया है कि जातक अगर संयम से काम ले तो ही बच पाता है वरना चन्द्र शनि की युति से तो जातक बच सकता है लेकिन चन्द्रमा से दूसरे भाव के शनि से जातक को बचना बहुत भारी पडता है।

शनि किस राशि में क्या क्या फ़्रीज करता है ?

शनि बारह राशियों में अपनी तरह से अलग अलग प्रभाव देता है। शनि जो भी प्रभाव देता है वह पहले गुरु और फ़िर मंगल तब जाकर चन्द्रमा और फ़िर शरीर पर अपना प्रभाव देता है। जैसे किसी जातक की मीन लगन या राशि है,तो जातक की साढेशाती शुरु होने पर शनि सबसे पहले मेष राशि में प्रवेश करेगा,और जातक की शान्ति को भंग करेगा,उस शान्ति को भन्ग करने का असर मालुम इस प्रकार से होगा जैसे जातक को अपने बाल काले करने का शौक बनेगा,जातक अपने सिर के ऊपर काले रंग की टोपी पहिनना शुरु कर देगा,उसे अपने बाल बढाने का शौक पैदा होगा,जातक का दिमाग अपने घर में नही लगेगा वह अपने को बाहर रखने पर बहुत सुखी अनुभव करेगा और जैसे ही घर के अन्दर प्रवेश करेगा उसकी बुद्धि बन्द सी हो जायेगी। उसके शांति वाले जितने भी काम है वे सब के सब रुकने चालू हो जायेंगे,जातक की यात्रायें चालू हो जायेंगी,वह यात्राओं में अपने शरीर को कष्ट देना शुरु कर देगा,जैसे उसके पास खर्चा करने के सीमित साधन होंगे आदि बाते मानी जायेंगे,इसके अलावा उसके लिये शांति देने वाले लोग स्वयं जीवित लोग होंगे,उसे किसी पूजा पाठ की जरूरत पडेगी तो वह किसी ऐसे व्यक्ति की राय को मानेगा जो तंत्र मंत्र और औघड शक्तियों से पूर्ण होगा,वह उस व्यक्ति के प्रति खर्चा भी करेगा और उसकी राय को भी मानेगा,वह औघड व्यक्ति जातक को तरह तरह के व्यवसायिक कारणों को कर्जा दुश्मनी और बीमारी के कारकों से जोड कर उसके मन को शांति देने के लिये बतायेगा। इसी प्रकार से जब शनि उसकी लगन में या राशि में प्रवेश करेगा तो जो भी लोग उसे सहायता देने वाले होंगे वे दूर होते चले जायेंगे,वह अपने कारणों से लोगों से दुश्मनी बनाता चला जायेगा,उसे कोई राय भी देगा तो उसे वह राय बेकार की लगने लगेगी। उसके जितने भी मित्र वर्ग के लोग होंगे वे उसके खिलाफ़ होते जायेंगे,वह जब अपने मित्र वर्ग की सहायता एक लिये जायेगा तो वे उसे स्वार्थी की उपाधि देंगे और अपने को दिक्कतों के समय में उससे बचने की कोशिश करेंगे। इस तरह से जो अच्छे साथ चलने वाले लोग भी होंगे वे उससे दूर होते जायेंगे। उसका खर्चा कमन्यूकेशन के साधनों पर कम होता चला जायेगा,कारण वह अपने सभी कमन्यूकेशन के साधनों को सीमित मात्रा में प्रयोग करना शुरु कर देगा आदि बातें देखी जा सकती हैं।

पारिवारिक लोग जातक को अपने लिये कैसा सोचेंगे ?

हरीराम को साढेशाती लगी है,और उसके सिर पर शनि का प्रभाव है,तो उसके परिवार वाले उसके लिये क्या सोचना चालू करेंगे इसका विश्लेषण बहुत ही समझने के लायक है। हरीराम की पत्नी जानकी देवी का शनि हरीराम की लगन से सातवां हो जायेगा उसकी जुबान तेज चलने लगेगी,वह कोई भी बात को चिल्ला कर करेगी,झल्लाहट उसकी आदत में आजायेगी,वह अपने परिवार वालों से भी बुराई मान लेगी उसके जितने भी पडौसी होंगे वह उनसे कटना शुरु हो जायेगी। इसी तरह से हरीराम का बडा भाई आलसी हो जायेगा,उसके लिये हरीराम के लिये काम करना एक तरह से आफ़त के रूप में दिखाई देगा,वह हरीराम के बारे में कोई भी बात पूंछने पर नकारात्मक ही जबाब देगा जैसे वह उसे जानता ही नही है वह कहाँ रह रहा है आदि इसी प्रकार की आदत हरीराम के दोस्तों की हो जायेगी वे भी हरीराम को याद करने में कतरायेंगे,वे केवल हरीराम को मेहनत के कामों में याद करेंगे और दोस्ती का फ़र्ज नही निभाकर उसके द्वारा किये जाने वाले काम के बदले उसके लिये खाने पीने का बन्दोबस्त करेंगे,उसके लिये दोस्त भी किसी मालिक की तरह से व्यवहार करेंगे। हरीराम का छोटा भाई भी हरीराम को निठल्ला समझना चालू कर देगा,वह उसके लिये किसी भी काम के बदले में अपने दोस्तों से अपने मिलने वालों से अपनी गाथा सुनायेगा कि वह अपने बडे भाई के लिये अमुक काम में सहायक बना है अमुक सहायता की है तब जाकर उसके बडे भाई हरीराम की औकात बची है। हरीराम की इस औकात को देखकर हरीराम की माता को मेहनत वाले काम करने का अन्दाज हरीराम का शनि देगा,वह अपने पुत्र के लिये मेहनत से उसे पालने पोषने की कोशिश करेगी,वह हरीराम की पत्नी से किसी न किसी बात से लडने की कोशिश करेगी,हरीराम का शनि अपने कंट्रोल में अपनी माता को रखना चाहेगा,जिससे जो लोग उसकी माता से उसके बारे में पूंछेगे तो वह उन्हे मना कर देगी कारण उसे समझ में आयेगा कि जो लोग भी हरीराम को पूंछने के लिये आते है वे सभी उससे कुछ मांगने या तकादा करने के लिये आ सकते है,हरीराम का जो भी निवास का घर है वह पहले जैसा नही मिलेगा,उसके अन्दर कचरे और आलसीपन के कारण साफ़ सफ़ाई का बन्दोबस्त फ़ेल हो जायेगा,हरीराम की पत्नी का मानसिक हाल अन्धेरे में जाने के कारण और घर के अन्दर कोई भी सामान नही बचने से तथा भोजन दवाइयों के अन्दर खर्चा होने से वह मानसिक रूप से ठंडी हो जायेगी। यही हाल हरीराम के बडे बेटे का होगा,वह अपने पिता के परिवार और परिवार की मर्यादा को छोड कर बिना धर्म और मर्यादा के काम करेगा,उसे केवल धन कमाने और लोगों से सम्बन्ध तभी तक अच्छे लगेंगे जब तक वह अपना स्वार्थ पूरा नही कर लेता है,जोर से चिल्लाने और अपने पिता से कोई भी काम करने पर कई तरह के दोष निकालने का काम उसके छोटे बेटे का होजायेगा,हरीराम के साथ ही उसकी पत्नी का हाल भी हरीराम जैसा हो जायेगा,हरीराम के मामा को हरीराम की साढेशाती के समय कई तरह की मौत वाले कारणों से जूझना पडेगा,उनके लिये कोई भी जायदाद वाले काम फ़ायदा नही करेंगे वह जो भी काम करेंगे सभी बट्टेखाते में चलते जायेंगे। हरीराम के ताऊ को भी कोई न कोई बीमारी लगी रहेगी,वह कर्जा दुश्मनी बीमारी में फ़ंसते चले जायेंगे,वह भी अपने लिये कोई लोन या कोई नौकरी करने के लिये लालियत रहेंगे। हरीराम की मामी अपने ही घर वालों से लडना शुरु कर देगी,इस प्रकार से जो भी रिस्तेदार हरीराम से सम्बन्ध रखते होंगे सभी अपनी अपनी तरह के कष्ट भोगते हुये नजर आयेंगे।

कैसे लिया जा सकता है शनि की साढेशाती का फ़ायदा?

शनि कर्म का ग्रह है और कर्म करने पर यह अपनी चाल को धीमा रखता है तथा जातक के जीवन में कभी अन्धेरा नही आने देता है। शनि की सिफ़्त अंधेरी है वह अपने को अंधेरे में रखकर ही काम करता है,जैसे सूर्य दिन का राजा है तो शनि रात का राजा है,शनि के अन्धेरे मे ही चांद और सितारों को देखा जा सकता है सूर्य के उजाले में चन्द्रमा और तारों की कोई बिसात नही है। घनी आबादी वाले शहर में तारों को खुले रूप में नही देखा जा सकता है,उसका भी कारण एक माना जाता है कि जहां आबादी अधिक होती है,वहां वातावरण धुंधला हो जाता है,हवा के अन्दर अधिक धुंआ और धूल फ़ैल जाती है। शनि का निवास घनी आबादी वाले क्षेत्र में होता है,वह जहां भी कच्ची बस्तियां होती है वही शनि का आधिपत्य माना जाता है,शनि की दशा अगर किसी शहर के ऊपर लगती है तो शनि अपना पूरा जोर उस शहर के ऊपर अपने प्रकार से लगा देता है जैसे सर्दी में अधिक सर्दी पैदा करना और बादलों आदि की उपस्थिति से सूर्य की रोशनी को कम करके रखना आदि बातें मानी जाती है। शनि जब बारहवें भाव में आता है तो सम्पत्ति पर जो पहले खर्च किया होता है उसकी वसूली लेने के लिये अपना प्रभाव देता है,और जो लोग वसूली देने से डरते है या कोई लिये गये कर्जे को चुकाने में बदसलूकी करते है शनि उनके लिये कई तरह के उपाय और सामने कर देता है जैसे कि जिन्होसे कर्जा लिया था उनसे दुश्मनी बना देना और तरह तरह के आक्षेप विक्षेप लोगों से लगवाकर जेल तक की हवा खिलवा देना आदि बातें मानी जाती है,इसलिये जब जातक कोई लिया गया धन चाहे वह किसी से भी लिया गया हो उसे चुकाने के लिये मेहनत करता है तो धन के बदले में शनि अपनी आदत के अनुसार व्यक्ति के अन्दर काम करने की विद्या का पूरा असर देता है,व्यक्ति अपने काम के दौरान पूरी तरह से होशियार होता जाता है और जो मेहनत वह करता है वह आगे जाकर जातक के लिये एक शिक्षा का रूप बनालेती है वह अपने द्वारा अगर उसी कार्य को करने के लिये सोचता है तो उसे अपने कार्य में सफ़लता मिलती है और वह अधिक से अधिक धन अपनी ईमादारी के कारण पैदा करने लगता है,अगर किसी प्रकार की बेईमानी से धन को बचा लिया होता है तो शनि अपने समय में उस धन को चोरों के द्वारा हरण करवा लेता है,जेल में डालकर धन को वकीलो और पुलिस के लिये खर्च करवाता है,इसके अलावा अगर उसे फ़िर भी धन को बचाने की और धन के लिये बेईमानी करने की आदत रहती है तो जातक को अस्पताल में लेजाकर शनि वाली बीमारियां देता है जैसे खाज खुजली पेट के रोग सिर के रोग और शरीर की रक्षात्मक प्रणाली को खत्म करने के बाद तरह तरह के रोगों को देने वाली बातें देखी जा सकती है।

शनि की साढेशाती के उपाय

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