प्लूटो के जीवन में प्रभाव

प्लूटो ज्योतिष में

प्लूटो ग्रह का प्रभाव संगठित करने,आपस में एकत्रित करने,सहकारी समिति बनाने,भलाई के काम करने,रेडियो,टेलीविजन,परमाणु शक्ति,रेडियो चलाने वाला काम करने,सामाजिक कार्य कर्ता,चिकित्सा क्षेत्र के अन्दर एक्सरे का काम करने,मशीनों द्वारा शरीर की जांच करने,परमाणु सुरक्षा विशेषज्ञ का काम करने,पाइप फ़िटिंग का काम करने,ग्रह उत्पत्ति का विश्लेषण करने,पुलिस के सिपाही के रूप में काम करने,सेहत सुधारक,टेलीविजन मैकेनिक,रडार मैकेनिक,मशीनो के प्रति खोज करने,जासूसी करने,एक साथ मिलकर काम करने वाला,बडे समूह को खाना खिलाने और संभालने का काम करने वाला,भ्रमित व्यक्तियों को सही रास्ता देने वाला,जो शक्ति काम करे पर दिखाई न दे,उन रहस्यों को जानने वाला,चुम्बकीय शक्ति को पहिचानने वाला,रेडियो फ़्रीक्वेंसी और कार्बनिक कोइलिंग के बारे में ज्ञान रखने वाला,रेडियो ट्यून करने वाला,बडी परियोजनाओं को सम्भालने का काम करने वाला,उपकरणों को वृहद रूप में तैयार करने और उनका रख रखाव करने वाला जातक प्लूटो के अधिकार क्षेत्र मे आता है.वर्तमान में मोबाइल कम्पनियां,सेटेलाइट कम्पनियां,और बडी कम्पनियों के रूप में भारत की ट्राई जैसी कम्पनियां प्लूटो के कारण ही फ़ल फ़ूल रही हैं.

प्लूटो का विभिन्न भावों में गोचर और उनके प्रभाव

प्लूटो का प्रभाव व्यक्तिगत रूप में मस्तिष्क में उन संवेदनाओं को एकत्रित करने और जरूरत पडने पर उनको प्रयोग करने के प्रति मिलता है,जिन्हे कभी भी देखा नही गया,लेकिन महसूस किया गया,जिस प्रकार से बिजली के तार में विद्युत ऊर्जा तो प्रवाहित होती है,लेकिन उसे प्रयोग तो किया जा सकता है,लेकिन देखा नही जा सकता है,रसायन में पानी को तो देखा जा सकता है,लेकिन पानी के अन्दर छिपी मीठी या नमकीन शक्ति को देखा नही जा सकता है,महसूस किया जा सकता है.प्लूटो से शक्तिवान व्यक्ति भौतिकता में उसी प्रकार से होता है,जैसे एक बिजली का ट्रांसफ़ारमर,बडी शक्ति के रूप में वह ग्यारह हजार वोल्ट की विद्युत शक्ति अपने अन्दर समाहित करता है,और जरूरत के मुताबिक आगे भी देता है लेकिन जमा करते वक्त और देते वक्त वह गर्म जरूर होता है,उसी प्रकार से प्लूटो से शक्तिवान व्यक्ति अपनी साधनाओं से अपनी शिक्षाओं से अपने मानसिक और शारीरिक प्रयोगों से अपने योगबल से अपने तपबल से शक्तियों को अपने में एकत्रित करता है और उनका प्रयोग जरूरत के वक्त करता है लेकिन इस जमा करने और देने के वक्त उसके अन्दर जो ताप उत्पन्न होता है,वही व्यक्ति का अहंकार या ईगो कहलाता है.इसी प्रकार से व्यक्ति जब अपने अन्दर उस शक्ति को जमा कर लेता है,जो एक बहुत बडे समूह को भी जरूरी होती है,जैसे एक अध्यापक का ज्ञान,वैज्ञानिक का शोध आदि.प्लूटो व्यक्ति के अन्दर उन शक्तियों को भी देता है जिनके द्वारा वह आगे की संतति को उत्पन्न करता है,प्लूटो की श्रेष्ठतम महत्ता आत्मीय शक्तियों को प्राप्त कर लेना,सबसे खराब महत्ता ऊंचे विचारों और शक्तियों को नीचे गिराना,जैसे एक साधक अपनी शक्तियों को पहले तो जमा कर लेता है,लेकिन मोह या लोभ के वशीभूत होकर लोगों को गलत राय देकर या पराशक्ति को धन के रूप में तौलने पर उस श्रेष्ठ शक्ति को गिराने की कोशिश करता है,और कुछ ही दिनों के अन्दर कानून या किसी सिरफ़िरे व्यक्ति के द्वारा बदनाम कर दिया जाता है,अर्थात ऊंची फ़्रीक्वेंसी को नीचे गिराने का काम करना,और प्लूटो की महान विचार श्रंखला वाला जातक अन्तराष्ट्रीय पालन पोषण की भावना रखता है.

पहले भाव में प्लूटो

पहले भाव का प्लूटो व्यक्ति के अन्दर महती इच्छाओं को देता है,बहादुरी देता है,अपने आस पास के वातावरण में अपने को वजनदार बना कर रखता है,और अपने को इच्छा शक्ति के द्वारा संभालकर रखता है,किसी भी गलत भावना का मन में प्रवेश करते ही बिजली के झटके की तरह से छिटक देता है,दूसरों को संभालने का कारण ही जीवन की एक इच्छाशक्ति बन जाती है,अपने द्वारा अनुभव करने के बाद ही दूसरों को अनुभव कराने की क्षमता होती है,विचार से विचार का बनाना और अन्य विचार का संपादन करना,अपने अन्दर एक चुम्बकीय शक्ति का महसूस करना जो अन्य लोगों को अपने आप ही अपने पास सम्मोहित करके बुला लेना,दूसरे लोगों के द्वारा समझने में कठिनाई होना कि आखिर यह बला क्या है,अपने को हर समय अकेला समझना,अपने अन्दर सज्जनता पाना,अपने अन्दर समझने की शक्ति रखना,साथ ही अपने ही अन्दर लगातार उस बात के लिये लडाई करते रहना कि जो है उस पर विश्वास किया जाय या नही,किसी भी स्थिति में जो किया उस काम से वापस नही आना,जैसे बिजली को तार से भेज कर वापस नही बुलाया जा सकता है.अपने अन्दर एक भयंकर क्रोध को पाना जब किसी अनुचित बात का अनुचित तरीके से प्रयोग किया जाय,जैसे बिजली के गलत प्रयोग के द्वारा या शार्ट सर्किट के द्वारा हाल होता है,या गलत तरीके से प्रयोग करने से सामने वाला कोई भी क्यों न हो या तो समाप्त कर देना या,खुद समाप्त हो जाना,अथवा कमजोर स्थिति की पोजीसन में उसी तरह से फ़्यूज हो जाना जिस प्रकार से एक बम्ब या बिजली का मैन स्विच,परा शक्तियों को परखने की शक्ति रखना,मानसिक रूप से दोनो आंखों के बीच में बिना कुछ सोचे ध्यान रखने पर अजीब से हाई स्पार्किंग जैसे प्रकाश को देखना,पराशक्तियों से सम्बन्ध स्थापित करना,और मन चाही जानकारी लेना,ध्यान समाधि के द्वारा रेडियो फ़्रीक्वेंसी की तरह् से दूर की चीजों का अनुभव करना,क्षमा कर देना और भूल जाना,अधिकता से कारण के ऊपर विचार नही करना,चाहे वह वास्विक कारण हो या चित्रित किया गया हो,हर वस्तु को शक्तिवान करने की कोशिश करना चाहे वह मिट्टी का ढेला ही क्यों न हो,समय आने पर जब खुद के द्वारा किसी का मन आहत होता हो तो अपने को हल्का सा लचीला बना लेना,आदि प्लूटो के पहले घर में होने पर प्रभाव देखे जाते है.

दूसरे भाव में प्लूटो

प्लूटो दूसरे भाव में होने पर व्यक्ति धन के मामले में कडुये अनुभव रखता है,वह जो भी मानसिक फ़ैसले करता है,वे पूरी तरह से जोखिम से भरे होते है.जिस प्रकार से एक बिजली का इंजीनियर धन कमाने के लिये बिजली में हाथ तो डालता है,लेकिन उसके पास दो ही मार्ग होते हैं,या तो बिजली के उपकरण या बिजली की लाइन को ठीक करने के बाद मोटी रकम प्राप्त कर लेना या फ़िर जोखिम उठाकर अपने शरीर की क्षति उठा लेना,इस भाव का प्लूटो धैर्य के साथ काम करने की सलाह देता है,अपने अन्दर शक्ति रखने की सलाह देता है,उन शक्तियों के अन्दर ज्ञान की शक्ति,जो पूर्ण शिक्षा की तरफ़ इशारा करती हैं,इस भाव का प्लूटो मानसिक,शारीरिक और भौतिकता में जो बेकार की शक्तियां पनप रही होती है,उनको समाप्त करने की हिम्मत देता है,साथ ही अत्याधिक धनी बनने,अपने को सभ्रांत तरीके से जीने,आधुनिकता की चाह रखने,का मानस भी दूसरे भाव का प्लूटो देता है.व्यक्ति धन के आने और जाने के बेभाव कारण को भी अपने जीवन में देखता है,कितना आया और कितना गया,इस बात की परवाह उसे कभी नही रहती,क्योंकि विचारों के उत्पादन में कोई कच्चा माल नही लगता है,एक रास्ते के बन्द होने के पहले ही दूसरा रास्ता व्यक्ति के मानस पटल पर तैयार हो जाता है,जिस प्रकार से पुराने जमाने के हरकारे का काम बन्द होने के पहले ही ग्राहम बेल के अन्दर टेलीफ़ोन निर्माण का मानस बन गया था,और तार बाले टेलीफ़ोन के जाने के पहले ही मोबाइल का रास्ता बन गया था,दूसरे भाव का प्लूटो जिसके साथ जुड गया है,सामने वाला ही छोड कर चला जाये लेकिन वह नही छोडता,जिस प्रकार से बिजली का साकिट मान लीजिये,प्लग भले ही हटा लिया जाये,लेकिन साकिट वहीं रहेगा,दूसरे भाव के प्लूटो वाले व्यक्ति को अपनी समृद्धि को दूसरों के साथ मिल कर प्रयोग करना चाहिये,वरना धीरे धीरे लोग उसे अकेला छोडते चले जाते है,यहां तक कि अपने ही रिस्तेदार उससे दूर होकर कितनी ही तरह की ना समझी जाने वाली बातों को करने लगते है.जिस तरीके से बिजली में अथाह शक्ति तो होती है,लेकिन वह अपने द्वारा अपने को सम्भाल नही सकती है,उसे संभालने के लिये दूसरों की ही जरूरत पडती है.

तीसरे भाव में प्लूटो

तीसरे प्लूटो वाले व्यक्ति का दिमाग अस्थिर,बात को दिल में डालने वाला,हर बात को स्थिर रूप को कहना,या हर बात का भौतिक कारण से सबूत पेश करने के बाद प्रस्तुत करने वाला खा जा सकता है.जो भी लोग और घटनायें व्यक्ति के जीवन में आती है,उनको सही रूप में बखान करना,जो भी कारण और सामने वाले की तस्वीर होती है,उसे गाइड की तरह से बखान करना भी मुख्य माना जा सकता है.व्यक्ति के अन्दर प्रस्तुतीकरण वाले प्रभाव के कारण वह हर आदमी की बात और काम को समझने वाला होता है,जिस प्रकार से एक इन्जीनियर मशीन के बारे मे जानने के बाद ही उसका विवेचन करता है,उसी प्रकार से तीसरे प्लूटो वाला जातक कारण को समझ कर ही उसका विवेचन करता है.व्यक्ति की इसी कारण से जिज्ञासा इतनी बढ जाती है कि वह हर क्षेत्र मे अपनी आदत के अनुसार जानकारी और विद्या को सीखना चाहता है,और जो भी देखता है या सीखता है,उसे ही हूबहू बखान करने के कोशिश करता है.किसी विषय पर शोध करना,शोध करने के बाद आंकडे बनाना,पहेलियों को सुलझाने के काम करना,दिमाग से जुडे खेलों की तरफ़ बहुत ही आकर्षित होना,व्यक्ति की आदत होती है.जिस काम में जासूसी जैसी बाते होतीं हैं उनको कहने और करने में अक्सर इस प्रकार के लोग अपने को माहिर बना लेते है,और खेल भी जासूसी के खेलते है.इस प्रकार का व्यक्ति कुछ न कुछ इसलिये खोजता रहता है,कि उसके जीवन के लिये कुछ मिले,खोजने से जीवन का मतलब मिल जाय,और उस क्षेत्र को खोजने का भी प्रयास करता है,जिस क्षेत्र में उसकी जिन्दगी दुबारा से शुरु हो सके,या जो सोचा है उसमें कोई नया तत्व शामिल हो सके.झल्लाहट और दिमागी रूप से भनभनाने की आदत तब और उस व्यक्ति के अन्दर पैदा हो जाती है जब जिस बात को खोजने के बाद या खोजते समय अथवा किसी काम को करते वक्त कोई रुकावत उसके सामने आ जाती है.उस व्यक्ति को उस समय यह सब भूल जाना चाहिये,उसे चाहिये कि वह अपने को कुच अच्छा लिखने के लिये प्रयोग करे,कुछ लिखे,जिससे लोग उसकी भाषा और काम को समझ सकें,इस काम को करते ही उसके दिमाग की टेन्सन या झल्लाहट कम हो जायेगी.और जो लिखा जायेगा,वह उस व्यक्ति के विचारों को गन्दगी से निकालकर साफ़ करने के काम आयेगा,और जब कोई कुछ लिखने की कोशिश करता है,तो उस लिखने में कुछ न कुछ नये विचार जरूर सामने आते है,और एक बार अगर पहले से चलने वाले विचार और नजरिया अगर किसी प्रकार से बदल गया,या किसी कारण से छुप गया तो आप उसको हमेशा के लिये खत्म कर देंगे,जैसे उस विचार और कारण को हमेशा के लिये दे दिया गया है,जैसे एक कम्प्यूटर में कोई फ़ाइल छुप जाती है,और खोजने के बाद नही मिलती है,तो झल्लाहट के कारण व्यक्ति उसे डिलेट करने के बाद दूसरा प्रोग्राम या फ़ाइल बनाने की बात करता है.

चौथे भाव का प्लूटो

इस भाव का प्लूटो अपने को सबके सामने दिखाने के अन्दर एक नम्बर का काम करता है,अपनी छवि को या तस्वीर को बहुत ही उम्दा तरीके से पेश करता है,व्यक्ति के अन्दर अन्तर ज्ञान की बहुत अधिक मात्रा होती है,और वह अपने अन्तर्ग्यान के द्वारा प्रत्येक वस्तु को जानने की हिम्मत रखता है,और इस प्रकार का व्यक्ति हमेशा घरेलू वातावर्ण में निवास करना पसंद करता है,उस व्यक्ति के पास जो शक्ति होती है,उस अन्तर्ग्यान वाली शक्ति के कारण उसे अपने आसपास वाले लोगों से काफ़ी लडाई करनी पडती है,जैसे उस व्यक्ति की इच्छा अपने घर में पतलून पहिनने की होती है,और उस घर में धोती पहिनी जाती है,तो उसकी वह इच्छा उसके लिये अपने ही घर में परेशानी का कारण बन जाती है.जैसे गांव के पुराने विचार के लोगों के घरों में जो पुत्रवधुयें आती है,और वे साडी या ग्रामीण परिवेश का पहिनावा छोडकर जीन्स और पेन्ट पहिनने लगती हैं,तो वह जीन्स और पेन्ट उनके लिये परेशानी का कारण बन कर अन्तर्ग्यान होते हुए भी समाज से दुत्कार की भावना उनके लिये प्रस्तुत कर देती है.व्यक्ति के माता पिता या उसके सास ससुर का दखल या तो उसके लिये बहुत बढिया रहता है,या फ़िर उसकी शारीरिक या मानसिक बीमारी का कारण बन जाता है.इस भाव के प्लूटो का मिलान बिजली के तेल भरे ट्रांसफ़ारमर से किया जा सकता है,अगर समय और मौसम के हिसाब से उसमे तेल भरा हुआ है और जितनी बिजली आ रही और उससे कम मात्रा में उसका प्रयोग किया गया है,तो वह तेल गर्म नही होगा,और अगर किसी प्रकार से उस तेल में कोई मिलावट कर दी गयी,या फ़िर जो सप्लाई है उसे कम करके प्रयोग को बढा दिया गया तो वह ट्रांसफ़ारमर गर्म होकर या तो तेल को उबाल कर बाहर कर देगा और गर्म होकर खत्म हो जायेगा,या फ़िर धीरे धीरे अपने को टीबी की बीमारी की तरह से खत्म कर लेगा.पैदा करने वाले माता पिता भी इस कारण को पैदा कर सकते है,और जीवन साथी के माता पिता भी इस प्रकार का व्यवहार कर सकते है,पैदा करने वाले माता पिता तो ट्रांसफ़ारमर में आने वाली बिजली की सप्लाई की तरह से होते है,और ससुराल वाले माता पिता ट्रांसफ़ारमर से ली जाने वाली सप्लाई की तरह से होते हैं.इस घर के प्लूटो वाले जातक हमेशा अपने जन्म स्थान पर लगातार काम करते है,चाहे वह पढाई के रूप में हो या फ़िर बचपन से ही जिम्मेदारियों के काम सिर पर डालदिये जावें.खुद का बनाया हुआ माहौल और अपनी प्रकार का क्षेत्र ही दुबारा से संभलने और पनपने का क्षेत्र हो सकता है.

पांचवें भाव में प्लूटो

पांचवें भाव के प्लूटो के द्वारा जातक के अन्दर बिना काम आने वाली आदतें और योग्यतायें होती है,महान कार्यक्षमता और अपने खुद के द्वारा बखानने की आदत अधिक तर इस प्रकार के जातकों मे पायी जाती है,बच्चे एक मशीन की भांति बन जाते है,जिस प्रकार से व्यक्ति अपने बच्चे को एक बटन की भांति बना लेता है,उसके कहते ही काम होना चाहिये,उसे बच्चे की मानसिकता से कोई लेना देना नही होता है,वह तो केवल उसे प्रयोग करना जानता है.मशीनी विचार रखने वाला जातक अपने बच्चों को नही समझ पाता है,और बच्चे जातक को नही समझ पाते हैं,उसकी नजर में वही पढाई काम की होती है,जो साक्षात रूप से अपना प्रभाव दिखा सके,लेकिन उसके लिये उन बातों का कोई महत्व नही होता है,जो कि खुद उन बातों से घिरा होता है,जो किसी ने उसके प्रति बनाई होती है,जैसे जातक की माता का विचार होता है,वह भी अपने परिवार को मशीन की भांति ही समझती है,और वह भी कीमत को अपने परिवार के प्यार के अलावा भौतिक धन के द्वारा नापने में अपनी होशियारी समझती है.इस भाव के प्लूटो वाले जातक संभोग को अधिक प्रयोग करने के चक्कर में कितने ही कृत्रिम उपायों का प्रयोग करते है,वे अपनी काम शक्ति को बढाने के लिये विभिन्न तरीकों का प्रयोग करते है,जिनके अन्दर कामोत्तेजक द्रश्य,कामोत्तेजक आवाजें,अश्लील फ़िल्में,अश्लील गाने,आधि मुख्य होते हैं,आगे चल कर यही आदतें उनके शरीर को रोगों से लडने में असमर्थ कर देती है,और जातक एक मशीन के अन्दर ही अपनी जीवन लीला को समाप्त कर लेता है.

छठे भाव में प्लूटो

इस भाव के प्लूटो वाला व्यक्ति कार्य करने के स्थान और कार्य के अन्दर प्रेषित करने की क्षमता रखता है,इस प्रकार के व्यक्ति के अन्दर एक भावना होती है,कि वह कार्य स्थान की प्रतिष्ठा में हमेशा शामिल रहे,वह जो भी करता है,वह हर किसी की नजर में आये,व्यक्ति के अन्दर एक भावना होती है कि जो भी उसके आधीन रहकर काम करे वह उसी के अनुसार जैसा वह चाहे कार्य करे,चाहे वह कार्य स्थान पर काम करने वालो का संगठन हो या फ़िर अपने ही परिवार का गठित समाज,साथ व्यक्ति के अन्दर भावना होती है,कि वह उनको किसी बात की परेशानी भी न होने दे और उनको अपने अनुसार कार्य भी करवाता रहे.व्यक्ति के अन्दर काफ़ी लम्बे समय तक कार्य करने की भावना होती है,वह बिना किसी रुकावट के साधारण आदमी से अधिक काम कर सकता है,व्यक्ति के अन्दर कठिनाइयों से लडने की प्रबल भावना होती है,और वह उन कामों को करना पसम्द करता है जो कि दूसरे नही कर पाते हैं,या फ़िर जो किये जाने वाले को करने में घबडाते है,जासूसी और खोजबीन करने में मजा आता है,साथ जो गहरी कठिनाई मे डूबे हुए लोग होते हैं,उनसे बात करने और उस गहरी कठिनाई को दूर करने के उपपय खोजने के लिये लम्बे समय तक काम करने की भावना होती है,उन कठिनाइयों को एक व्यौरा बना कर और तरीके से दूर करने में उनको बहुत आनन्द आता है,समाधि लगाना और मेडीटेसन के प्रति अच्छा लगाव होता है,आत्माओं से सम्पर्क का खुद साधन बन जाते हैं,और जो काम कठिन होते हैं उनको अपने साथ काम करने वालों के सानिध्य् मे भी चुप चाप काम करते रहते है,इन्फ़ेक्सन की बीमारियां जल्दी घेर लेती है,अधिक बैठक के कारण पेट के पाचन तंत्र पर बुरा असर पडता है.

सातवें भाव में प्लूटो

कंट्रोल करना और बल दिखाने के साथ महसूस करने का अधिकार प्राप्त करना,इन चीजों के प्रति अपनी बपौती समझना इस प्रकार के जातकों के अन्दर पायी जाती है,वे अपने जीवन साथी और साझे का काम करने वाले को पूरी तरह से अपने अनुसार काम करने और अपने द्वारा हां में हां मिलाने के लिये मजबूर कर देना चाहते हैं,इनको सहयोग से काम करने की कला का पूरी तरह से ज्ञान नही होता है,इनके द्वारा जो जीवन साथी और साझेदार चुना जाता है,वह इनकी राय के अनुसार ही चलना चाहिये,इस कारण से ही इनके जीवन साथी के प्रति कभी बराबर से चलने के प्रति कमी पायी जाती है,प्लूटो बिजली का ग्रह माना जाता है,बिजली को प्रयोग करने के लिये स्विच का प्रयोग किया जाता है,सातवें भाव के प्लूटो वाले जातक अपने जीवन साथी और साझे दार को बिजली का स्विच ही मान कर चलते है,वे जब चाहें उसे आफ़ कर दें और जब चाहे ओन कर दें,जीवन साथी भी अपनी शक्ति को उसी प्रकार से प्रयोग करता है,जिस प्रकार से तार में जब तक बिजली होती है काम लिया जा सकता है,और जैसे ही अलावा भार बिजली पर दिया जाता है,उसका मैन स्विच बन्द हो जाता है,या फ़्यूज उड जाता है.उसी प्रकार से जब सातवें भाव के प्लूटो वाला जातक जब लगातार अपनी ही चलाने के लिये सामने वाले को मजबूर कर देता है,तो जीवन साथी या साझेदार या तो कुछ समय के लिये चुप होकर अपना सब कुछ बन्द करके बैठ जाता है,या फ़िर इस प्रकार के व्यक्ति को अपनी कमजोरी और शक्ति के प्रदर्शन के कारण परेशान कर देता है.इस प्रकार के व्यक्ति के अन्दर दूसरों के अन्दर शक्ति पैदा करने की आदत होती है,वे अचानक दूसरों के अन्दर अच्छी या बुरी शक्ति को पैदा करने की कला को जानते है,इन शक्तियों के पैदा करने के लिये वे सामने वाले को शाबाशी भी दे सकते है और गाली देकर उसे इतनी बुरी तरह से उतसाहित भी कर सकते हैं कि वह मरने मारने के लिये उतारू हो जाये,इसी कारण से वे या तो समाज में काफ़ी मशहूर हो जाते है,या फ़िर बदनाम हो जाते है.

आठवें भाव में प्लूटो

इस भाव के प्लूटो वाला व्यक्ति एक बहुत ही व्यवसायिक सुलझा हुआ दिमाग रखता है.दिमाग में विश्लेषण करने की अदभुत ताकत होती है.पराशक्तियों के प्रभाव के कारण इस प्रकार का व्यक्ति राख से सोना निकालने की हिम्मत रखता है,जो भी इस प्रकार के व्यक्ति के सामने होता है,उसके प्रति जरा सी देर में इस तरह का व्यक्ति उसका भूतकाल वर्तमान काल और भविष्य के प्रति कथन करने की हिम्मत रखता है,ज्योतिष,हस्त रेखा,देव साधना,पूजा पाठ आदि के द्वारा लगातार शक्तियों को जागृत करने की अद्भुत क्षमता होती है,व्यक्ति के द्वारा भूत प्रेत और अद्र्शय शक्तियों के प्रति रुझान से आस पास के लोग उसे गलत नजर से देखने लगते है,और जिस प्रकार से बिजली के तार को छूने से लोग डरते है,उसी प्रकार से इस प्रकार के व्यक्ति से लोग डरने लगते है,जीवन साथी और साझेदार के द्वारा भौतिक पदार्थों और घर में या अपने कार्य स्थान में स्वचलित साधनों के प्रति अधिक खर्च करने से परेशानिया पैदा हो जाती है.जमा धनो की कमी और बैंक आदि के द्वारा बचत करने में परेशानी भी इस प्रकार के जातकों के अन्दर देखी जाती है,इस प्रकार के जातक जीवन का मतलब ढूंडते रहते है,और मौत के बाद क्या होता है,उनके कारण और निवारण की क्रिया को समझने में अपना बहुमूल्य समय अधिकतर गंवा ही देते है,जो उनको प्राप्त होता है,उसे वे किसी भी प्रकार से दूसरों को प्रत्यक्ष दिखा नही पाते और लोग उनको बेबकूफ़ ही समझते रहते है,उनकी जिज्ञासा होती है कि ब्रहमाण्ड किस प्रकार से व्यक्ति की जिन्दगी को प्रभावित करता है.इस प्रवृत्ति के कारण वे अपने अन्दर के बारे में अधिक जान जाते हैं,अपनी सुरक्षा के प्रै इस प्रकार का जातक काफ़ी संवेदनशील हो जाता है.लोगों को किस प्रकार से धनात्मक प्रभाव दिया जाता है,इस बारे में इस प्रकार के व्यक्ति को पता होता है,इस लिये जो इस प्रकार के व्यक्ति को जानते है,वे उससे फ़ायदा उठा सकते हैं.अधिकतर मामलों में इस प्रकार के जातक अपनी कामेक्षा की अधिकता के कारण कामोत्तेजना के समय कृत्रिम साधनो का प्रयोग करते है,और अपने अन्दर की ताकत को समाप्त कर लेते है,जिससे होने वाली संतान या तो कामयाब नही होती या फ़िर अपने लिये ताकत जुटाने और अपने को समाजिक तौर पर ऊंचा दिखाने के लिये गलत साधनों का प्रयोग करना शुरुकर देती है.

नवें भाव में प्लूटो

इस भाव के प्लूटो वाला जातक पराशक्तियों और तंत्र,मंत्र के प्रति अपनी जिज्ञासा को जागृत रखने की कला को जानता है,समाधि अवस्था में जाने और समाधि के अन्दर ब्रहमाण्ड अथवा इच्छित स्थानों की सैर करना भी इस प्रकार के जातक जानते है,सोने के बाद स्वप्न अवस्था में वे विभिन्न प्रकार स्वप्नों को देखते है,और वे स्वप्न अच्छी तरह से उनको याद भी रहते है,वे किसी भी देवता और शक्ति का प्रभाव तेज प्रकाश के रूप में देखते है,उनकी रुचि इसी कारण से धर्म और धार्मिक क्षेत्र में विशेष रूप से होती है,वे धर्म और धर्म वाले कारणो को संसार मे दिखाने के लिये वे वीडियो,आडियो,आदि साधनो का सहारा लेते है,व्यक्ति को हमेशा मानसिक इच्छा होती है कि जो हुआ वह क्यों और कैसे हुआ,हमेशा व्यक्ति के विचार सफ़ल ही हों यह बात कभी नही माननी चाहिये,इस प्रकार का व्यक्ति खुद अपने विचारों से भी कभी कभी खतरे में पड जाता है,उसका कारण मुख्य रूप से तब दिखाई देता है जब व्यक्ति अपने को ही भगवान मानना चालू कर देता है,और जो भी आसपास वाले बताते है या सलाह देते हैं तो उनको नकार देना भी एक मुख्य कारण माना जाता है,सत्य को इस प्रकार का व्यक्ति उसी प्रकार से ढूंडता है जिस प्रकार से एक भूखा व्यक्ति भोजन को ढूंडता फ़िरता है,हर बात को जानने की इच्छा के कारण इस प्रकार का व्यक्ति कभी कभी बहुत ही बडी टेंसन को पाल लेता है,परामनोवैज्ञानिक शक्तियों का सहारा लेकर और समाधि आदि के द्वारा अपने अन्दर के विचारों क जागृत रूप में देखने के कारण इस प्रकार का जातक मान लेता है,कि उसको भी भगवान के दर्शन हो गये है,वह परिचितों को बताता है कि फ़लां दिन उसने फ़लां भगवान के दर्शन स्वप्न में किये और वे जो कह गये है,वह पूरा होने जा रहा है,भौतिक रूप से भी इस प्रकार के लोग आसमानी यात्राओं के प्रति काफ़ी उत्सुक होते है,हवाई यात्राओं में नौकरी और पैरासूटिंग भी उनको बहुत अच्छी लगती है,ऊंचे स्थानों से भौतिक साधनो से कूदना,करतब दिखाना भी इनकी आदत हो जाती है,जब भी इस प्रकार के लोग गहन अध्ययन करते है,तो अक्सर उसमे इतने लीन हो जाते है कि कोई उस समय अगर कोई बात उनसे पूंछने या बात करने की कोशिश करे तो वे एक दम झंझला जाते हैं,इस प्रकार के व्यक्तियों को अपनी एक आदत को तो चोद ही देना चाहिये,कि वे चाहते है कि वो जो कह रहे है वह हमेशा सही है.

दसवें भाव में प्लूटो

इस भाव का प्लूटो जातक के केरियर को अन्देखी ताकतें प्रभावित करती है,आसामाजिक तत्व सीधे तरीके से काम और व्यक्तित्व को प्रभावित करते है,लोगो के द्वारा जो राजनीति खुद व्यक्ति के प्रति की जातीं हैं,उनसे उसे बचना चाहिये और खुद के विचार और कार्यों को महत्व दिया जाना चाहिये,जो भी खुद की औकात है उसी पर भरोशा नही करने से लोग उसे मनचाहे तरीके से प्रयोग करने की कोशिश करते है.जब भी इस प्रकार का व्यक्ति आगे भढने की कोसिश करता है,लोग बीच मे आकर अपनी राय देते हैं,और वह जो करना चाहता है या संसार में अपना नाम या व्यवसाय को आगे बढाने की कोशिश करता है,तो उसे किसी न किसी प्रकार से रोक दिया जाता है.इस प्रकार की घटनाये जब व्यक्ति के जीवन में आती है तो उसे ताकत की जरूरत पडती है यह ताकत उसी प्रकार से उसे चाहिये होती है,जिस प्रकार एक बैटरी को प्रयोग करने के बाद उसे रीचार्ज करने की पडती है,इस ताकत को वह समाज के प्रति ही खर्च करना चाहता है,उसे अपने लिये कुछ भी प्रयोग करने की आवश्यकता नही पडता है,और जब भी वह अपनी ताकतों को समाज के लिये खर्च करता है तो समाज केवल उसे बुराई ही देता है,और जिस रास्ते से वह अपने को बहुत आगे बढाने की कोशिश करता है वही रास्ता उसे नीचा दिखा देता है,इस प्रकार के व्यक्ति की आदत कुछ करने और कुछ दिखाने की होती है,अक्सर उन्ही कामों के अन्दर उसका मन लगता है,जिसे शुरु से अन्त तक कोई समझ नही पाता है,वह जो कर रहा होता है वह सामने नही होता है,जो और जो हो रहा होता है वह वास्तव में नही होता.जो भी कार्य लोगों के द्वारा किये जाते हैं,उनके प्रति इस प्रकार के व्यक्ति के अन्दर भावना होती है कि वे उस कार्य को क्यों और किस लिये कर रहे है,और कर रहे हैं तो वे केवल निजी फ़ायदा के लिये क्यों कर रहे है.

ग्यारहवें भाव में प्लूटो

इस भाव के प्लूटो वाले व्यक्ति को अपने दोस्तों के भरोसे की बहुत ही आवश्यक्ता होती है,कुछ दोस्त इस भाव के प्लूटो वाले व्यक्ति को अपने आदेश से चलाने की कोशिश करते है,या व्यक्ति अपने आप ही दोस्तों के इशारे पर चलने की कोशिश करता है,वह अपने माता पिता और परिवार को भूल जाता है,और जो भे दोस्त कहते हैं उन्ही पर विश्वास करने के कारण अपने खुद के लोगों से अपना विश्वास हटा लेता है,दोस्ती की भावना इस प्रकार के व्यक्ति के अन्दर काफ़ी सीमा तक भरी होती है.भौतिक पदार्थों के द्वारा भरे पूरे होने से दोस्त व्यक्ति को करिश्माई समझते है,और जम कर भौतिक पदार्थों का प्रयोग करते है,साथ किसी प्रकार के भौतिक पदार्थ का विनाश होने या बिगड जाने पर इसी प्रकार के व्यक्ति का सहारा लेते है,जिस प्रकार से जीवन में बढावा होता जाता है उसी तरह से कितने ही दोस्त आते है और जीवन से चले जाते है,कोई स्थिर दोस्त नही होता है,यह सब इसी भाव के प्लूटो का प्रभाव माना जा सकता है.कौन किस प्रकार से आगे आने पर रुकता है,या लगातार साथ चलने से मना कर देता है,यह सब तभी होता है,जब व्यक्ति की प्रोग्रेस रुकती है या बढती है,विभिन्न प्रकार के लोगो से दोस्ती विभिन्न प्रकार के उद्देश्यों की पूर्ति के लिये होती है,विभिन्न प्रकार के रिस्ते विभिन्न प्रकार के कार्य करने के लिये होते हैं,जो भी सामाजिक या पारिवारिक लोग होते हैं,वे आगे होने वाली उन्नति और अवनति के लिये जिम्मेदार माने जाते है,व्यक्तिगत रूप से किये जाने वाले प्रयासों में जन समुदाय को बहुत ऊंची सीढी पर पहुंचाने का काम भी इस प्रकार का व्यक्ति करता है,व्यक्ति के अन्दर एक सर्वोच्च व्यक्ति बनने की योग्यता होती है,वह समाज या समुदाय का मुखिया भी अपने कार्यों से बन कर अपने जीवन में जरूर सामने आता है.जीवन में लगातार लोगों पर होने वाले अन्याय के प्रति लडाइयां भी मुख्य कामों की गिनती में माना जाता है.

बारहवें भाव में प्लूटो

इस भाव में प्लूटो वाले व्यक्ति के अन्दर सत्य और सर्वोच्च ताकत को खोजने की प्रवृत्ति होती है,इसका कारण केवल जीवन को समझना होता है वह ईश्वर को प्रकट रूप में देखने की आशा रखता है,और जो भी लोग अपनी आदतों या सामाजिक नियमों के द्वारा करते हैं या करवाते हैं,उनको वह प्रकट रूप में देखना चाहता है,किसी तान्त्रिक के द्वारा किसी की मानसिक बीमारी को ठीक करने के प्रति की जाने वाली क्रियाओं को वह देखना चाहता है,कि वह तान्त्रिक वास्तव में कोई शक्ति प्रत्यक्ष दिखा पाता है,या वह कल्पना के द्वारा लोगों पर सम्मोहन ही करता है,जिस प्रकार से एक टीवी चैनल वाला किसी साधू की सत्यता को परखे बिना अपनी राय देने के लिये केवल तभी सामने आता है जब तक उसे लालसा रहती है कि वह अपना नाम लोगो के सामने दिखा सकता है,लेकिन जब उसी साधू के आत्मीय श्राप के कारण उसे अचानक शारीरिक या मानसिक कष्ट का अनुभव होता है,तो वह केवल मन में ही फ़ील करता है,कि उसने वह काम किया था उसी का परिणाम उसके सामने है,और उस बात को वह किसी के सामने कह भी नही सकता,कारण अगर कहता है तो खुद उसी की जग हंसाई होती है,एक अहम भरने के कारण वह यह भूल जाता है कि जिस कर्म काण्ड या रीति के अनुसार उसके माता पिता ने बन्ध कर उसे जन्म दिया है,और उसका जो नाम या कार्य करने के लिये जन्म दिया है वह अपने को सुपीरियर मानने के चक्कर में जो कार्य संसार के शुरु होने के समय से चले आये हैं,और उसके जन्म लेने से पहले कितने बुद्धिजीवी इस संसार में आये होंगे,उन सबको झुठलाकर सरे आम द्रश्य या श्रव्य साधनो से उत्पीडन करने वाली बातों को करता है,तो वह समझता है,कि वह जो कर रहा है वह सही है मगर क्षणिक समय के लिये तो ठीक माना जा सकता है,भविष्य के गहरे जाल में जब वे ही आक्षेप उसे प्रताडित करते हैं,तो वह अपने को फ़िर कहीं का नही पाता है.

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