नक्षत्र

अश्विनी

दवाइयो वाली खेती करना,वाहनो के सामने के भाग का निर्माण करना,दिमाग में सोच कर पता लगाना,दिमाग में सोचने के कारण पैदा करना,बाग बगीचे के काम करना और खेती वाले काम करना,अगर चौथे भाव में है तो माता को खेती करना पसंद होता है,केतु इसका संचालक होता है.

भरणी

किसी भी बात को रोकना,बांधने वाला,न्याय कर्ता और नयाधीश,जेल में जाना,सम्बन्धियो से परेशान रहने वाला,कानूनी बातो को सम्भाल कर रखने वाला,अपने को बंधा हुआ और किसी के द्वारा रोका हुआ समझने वाला,मौत वाले कारण,धर्मशाला में काम करने वाला.

कृतिका

काटने वाली तेज धार की वस्तुये,तकनीकी दिमाग,तेज दिमाग,और तेज दिमाग को बनाने वाले साधन,उत्तेजक,नेतागीरी बिखेरने वाला,शेर की तरह आदत रखने वाला,दबंग रखने वाला,बडे प्लान बनाने वाला,हमेशा गर्मी दिखाने वाला,भावुक रहने वाला,सम्मोहक दिखने वाला,दूसरों की पत्नियो पर सम्मोहित रहने वाला.अग्नि प्रधान आचरण.

रोहिणी

किसी भी चीज को बडा करके दिखाने वाला,उदय करने की कला,अगर धन का मालिक इस नक्षत्र में है,तो वह धन को बढायेगा,समृद्धि देगा,आशीर्वाद देगा,अधिकता देगा,चन्द्रमा की प्रिय पत्नी का नाम रोहिनी है,चन्द्रमा ने उससे इसी लिये प्रेम किया था कि वह सभी तरह के संगीत और कलाओ से निपुण थी,नाचने की कला में अधिक निपुण थी,और काम कला के लिये जानी जाती थी,जातक नाचना पसंद करता है,दूसरी औरतें अधिकतर जलन रखती है,तरह तरह के आक्षेप लगाती है,स्त्रियों को सम्मोहित रखने के उपाय करने वाले,जलन से चिकोटी काटने वाली बात भी मानी जा सकती है,रोहिनी से आच्छादित जातक दूसरों की प्रसंसा भी करता है,उनको विशेष तरह से महसूस करने की आदत होती है,जल्दबाज होते है,अगर चन्द्रमा ग्यारहवें भाव में है तो बदी बहिन नाचना पसंद करती होगी,ड्रामा करने में माहिर होते है,उनको सामान पहुंचाने वाले ट्रक और प्रयोग मे आने वाले वाहन रखने का शौक होता है.

मृगसिरा

ब्रहमाजी के ऊपर उनकी मानस पुत्री आकर्षित हो गयी,उसने ब्रहमाजी के साथ संगम करने के लिये हिरण का चेहरा लगा लिया,जैसे ही उसने ब्रह्माजी को संभोग के लिये तैयार किया,शिव और इन्द्र ने इस अन्होनी को रोकने के लिये उस मानस पुत्री का सिर काट डाला,और वह सिर ही तारों के समूह में आकाश में स्थापित हो गया,इस नक्षत्र का प्रभाव बहुत ही विचित्र पडता है,भावावेश से ग्रसित जातक पागलो जैसे व्यवहार करता है,और भावावेश में कुछ भी कर सकता है,किसी भी कार्य को तुरत होना मांगता है,जल्दी बाजी में हर वस्तु को खोजना चाहता है,उसे शिकार करने में बहुत आनन्द आता है,अपने दोस्तों की पत्नियो या पति पर आकर्षण करने की कोशिश की जाती है,उसे किसी बात का संयम नही होता है,व्यभिचार करने में आनन्द आता है,अपनी हवस को शांत करने के लिये वह कोई भी काम कर सकता है,संवेदना का प्रभाव बहुत अधिक होता है,बहुत अच्छा खोजी दिमाग होता है,हर बात का पता करने के लिये लालियत रहता है,किसी वस्तु को खोजने के लिये काफ़ी चतुर होता है,अगर चन्द्रमा मृगसिरा का होकर नवें भाव में विराजमान होता है,तो पिता जैसे व्यक्ति से भी और माता समान स्त्री से भी व्यभिचार करना उसे खराब नही लगता है.कुछ लोग अपने से बडे साधु स्वभाव व्यक्ति या अपने से बडी गुरु पत्नी के साथ समागम करने की इच्छा बाले और शराब आदि का सेवन करने वाले भी होते है.

आद्रा

हमेशा भावना में बहने वाला,आंसू बहाने वाला,चिल्लाकर बात करने वाला,किसी भी बात में जल्दी से आंसू निकालने वाला,मन के अनुसार चलने वाला,दिमाग का काम न लेकर ह्रदय से काम लेने वाला,जब भी कभी यात्रा आदि करे तो तूफ़ान या बारिस से मुसीबत उठाने वाला यह तब होता है जब जातक की कुन्डली में बारहवें भाव में उसका लगनेश आद्रा में होता है,जब खुद का सूर्य आद्रा में हो तो भावुक लोगो के साथ काम करना पडता है,जिनका सूर्य आद्रा में होता है,वे लोग ज्योतिषी भी होते है,और भावना प्रधान लोगो के बारे मे अधिक जूझते है.

पुनर्वसु

पुनर्वसु का मतलब तीर के कंपन से लिया जाता है,तीर को जब छोडा जाता है,तो उसके अन्दर कंपन होता है,इस नक्षत्र में जन्म लेने वाला जातक कभी तो घर में बैठता है,और कभी बाहर घूमता है,और कभी कभी जो भी काम करता है,तो उसे कर ही नही पाता है,और जब करने के लिये उतारू होता है,तो भूत की तरह से काम करना चालू कर देता है,दूसरे भाव में इस नक्षत्र के होने पर या तो जातक बचत की तरफ़ जाता है,और घटनावश खर्च भी करता है,धीरे धीरे जमा करता है,और काम पडने पर ही खर्च करता है,अदिति का मतलब प्रारम्भिक विस्तार की तरफ़ जाने का संकेत होता है,जब सूर्य उदय होता है,तो प्रारम्भिक अवस्था में संसार की स्वामिनी माता की गोद से बाहर निकलना माना जाता है,इसे स्वतन्त्र होने का प्रभाव भी माना जाता है,और इस नक्षत्र में जन्म लेने वाला जातक आसमान में चढने की आकांख्षा रखता है,और जहा पर वे है उसे दिखाना चाहते है,इसका मालिक गुरु होता है,जो ज्ञान का मालिक कहा जाता है,इन लोगो की रुचि ज्योतिष से और योग आदि से होती है,ध्यान समाधि की तरफ़ भी इनका झुकाव अधिक होता है.
आगे और लिख रहा हूँ………….देखते रहिये !

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