चौथा मंगल

चौथे मंगल को तलवार या ढाक का पेड कहा जाता है। इस भाव में मंगल होने से गर्दन तथा नाभि वाली बीमारियां भी होती है। यहां के मंगल के लिये उपाय के रूप में शहद ही काम आ सकता है। इस मंगल के प्रभाव को समझने के लिये उन घरों को देखना पडेगा जहां पर रोजाना की चिक चिक होती रहती है,और इस मंगल से प्रभाव वाला व्यक्ति चाहे तो परिवार को बरबाद करदे,और चाहे हो कितनी ही माया घर में हो उसे बरबाद कर दे। यदि चौथा मंगल अपने साथ बुध केतु तो यह मंगल अपनी गलत हरकत को नही कर सकता है। इस भाव का मंगल किसी प्रकार की शरारत को सहन नही कर सकता है,और जो भी इस भाव के मंगल वाले के साथ हरकत करता है उसका वह भरपूर जबाब देने की हिम्मत रखता है। इस भाव के मंगल वाला व्यक्ति अक्सर अपने परिवार की ही सहायता करता है अन्य से उससे सहायता की आशा नही करनी चाहिये। इस मंगल के साथ चन्द्रमा या शुक्र जिसमे चन्द्रमा या शुक्र अकेला ही मंगल के साथ हों तो चन्द्र यानी माता और शुक्र यानी पत्नी और चन्द्र तथा शुक्र से सम्बन्धित कारकों को शक की नजर से ही देखा जाता है। लेकिन इस मंगल वाले जातक पर चन्द्र और शुक्र का प्रभाव नही पडता है। इस प्रकार का मंगल उसी परिवार में जन्म लेता है जहां दो पुस्त पहले कोई पूर्वज राजशाही ठाठ बाट से रहा हो। इस भाव के मंगल वाला व्यक्ति भाग्यहीन होता है,और अगर उसका चेहरा सुबह सुबह देख लिया जाय तो खाना भी नसीब हो यह कोई गुंजायश नही होती है,किसी ना किसी प्रकार की खटपट भी होती है। इस प्रकार के मंगल वाले जातक के अन्दर दूसरों से बदला लेने की बहुत बुरी आदत होती है। और इस आदत के कारण वह व्यक्ति अक्सर हानि ही उठाता है। इस मंगल वाले की माता सास पत्नी या नानी की उम्र पर कोई ना कोई बुरा असर होता ही देखा गया है। इस भाव के मंगल वाले के बडे भाई की गृहस्थी और धन पर इस भाव के मंगल वाले की उम्र की अट्ठाइसवीं साल तक बुरा असर ही होता देखा गया है। घर के बगल मे बबूल या बेर का पेड होने से चौथा मंगल और भी खतरनाक हो जाता है,अगर चौथे मंगल वाले के घर के बगल में बबूल या बेरी का पेड है तो इस मंगल के कारण जातक को मर्डर केस या अन्य मामले तथा कसाई वाले काम अधिक करने का मन करता है। बबूल का पेड शनि का पेड है और और बेर का पेड भी बुध का पेड माना जाता है,घर के बगल में बेर का पेड होने से भी मंगल का फ़ल खराब हो जायेगा। इसके साथ ही घर के पास में हलवाई या अनाज भूनने वाली की भट्टी लगातार चलती रहती हो तो भी इस मंगल वाले का जीवन नरक जैसा हो जाता है। चौथे मंगल वाले जातक के घर का दरवाजा अगर दक्षिण की तरफ़ हो तो भी जातक का भाग्य पूरी तरह से बरबाद हो जाता है,कारण दक्षिण दिशा का कारक भी मंगल हो जाता है,और घर के अन्दर खून खराबा आदि होने की पूरी सम्भावना रहती है,अगर यही दरवाजा अस्पताल या होटल का है तो वह फ़लदायी तो होता है लेकिन जातक को ऐसे व्यापारिक स्थान पर निवास या रात को नही रहना चाहिये। राहु इस मंगल के साथ मिलने पर जातक के खून में प्रेसर बनता रहता है और अधिकतर मामलों मे जातक को ह्रदय सम्बन्धी बीमारियों दिल के आपरेशन मे खर्चा करना पडता है और जीवन कभी कभी दाव पर लग जाता है। दिमाग और मस्तिष्क सम्बन्धी बीमारिया तथा माता का अस्पताल मे रहना भी देखा जाता है,राहु का असर अगर किसी प्रकार से गलत हो रहा हो तो जातक की माता कोमा मे भी जा सकती है। इस मंगल का दोष तब और बढ जाता है जब घर का दरवाजा दक्षिण की तरफ़ हो और घर से बाहर निकलते वक्त दाहिनी तरफ़ रसोई हो और बायीं तरफ़ तरफ़ पानी का साधन हो या पानी निकालने के लिये स्थान बनाया गया हो तो घर के सदस्यों को बीमारियां और झूठे आरोपों से गुजरना पडता है घर के अन्दर जो भी खाना बनाया जाता है वह किसी ना किसी प्रकार रोगाणुओं से ग्रस्त हो जाता है,या खाने में किसी ना किसी प्रकार का दोष पैदा हो जाता है। बायीं तरफ़ पानी का साधन होने से घर की स्त्रियां परेशान रहती है और उनके अन्दर ठंडापन हो जाने से कोई ना कोई बीमारी उनको लगी रहती है। यह मंगल तब भी बहुत अशुभ हो जाता है जब घर से बाहर निकलते कोई पीपल का पेड हो और उसकी टहनियां काटी गयीं हो,इसके अलावा किसी भी पेड का साया घर के ऊपर पड रहा हो। अक्सर इस प्रकार के घरों मे या तो स्त्री शासन होकर वह घर स्त्री सम्पत्ति बनता है या फ़िर उस घर का मालिक अधेड उम्र मे जाकर अन्धेपन का शिकार होता है और बाकी की जिन्दगी भटकते हुये ही निकलती है। अक्सर चौथे मंगल वाले का अहित तब और अधिक होता जब किसी सन्तान हीन व्यक्ति से जगह लेकर मकान बनाया गया हो,ऐसा मकान भी सन्तानहीनता की तरफ़ ले जाता है,अक्सर इस प्रकार के मंगल वाले व्यक्ति की सोच होती है कि यह धरती एक सी है,लेकिन उसका सोचना तभी गलत माना जा सकता है कि जिस स्थान पर एक निसन्तान व्यक्ति रहा हो और उसके द्वारा जो भी नकारात्मकता को सोचा गया हो वह उसे भी जमीन के साथ या घर के साथ सौगात मे मिलता है। अक्सर इस प्रकार के घर के जातक की सन्तान घर से उत्तर दिशा मे जाकर खाने पीने और भट्टी सम्बन्धित काम जैसे लोहा गर्म करना और लोहे वाली वस्तुओं को ढालकर बनाना आदि के साथ अस्पताली काम करना आदि नुकसान देने वाले होते है। चौथे मंगल के बारे में यह भी एक बहुत बडी दोष पूर्ण बात है कि पानी वाली जगह पर पकी ईंटों से घर बनाना,कारण पकी हुयी ईंट घर वनाने के लिये अधिकतर प्रयोग में ली जाती है,और जली हुयी मिट्टी को पानी वाली जगह यानी चन्द्रमा की जगह में स्थापित किया जाये तो वहां भी अक्सर मानसिक बीमारियां अस्पताली कारण लडाई झगडे और पुलिस आदि की बातें सामने आती है,जातक को जिन्दगी भर परेशान रहना पडता है। इस मंगल के लिये एक और बात दोष पूर्ण बनाती है जब घर का रास्ता दक्षिण को और मकान के अन्दर सीधी हवा प्रवेश करती हो,यानी दरवाजे के सामने दरवाजा बनाया गया हो,या लगातार तीन दरवाजे एक सीध में बनाये गये हों। इसके अलावा गली और रास्तों के ऊपर भी बनाये गये मकान इस प्रकार के मंगल वाले जातको को परेशान करने वाले होते है। अक्सर मंगल के चौथे भाव मे होने से और केतु के तीसरे या आठवें भाव मे होने से अथवा बुध के तीसरे और आठवें भाव मे होने से अथवा दोनो ग्रहों के इन भावों में होने से मंगल बद हो जाता है,और जातक के अन्दर शराब कबाब या भूत के भोजन की अधिकता हो जाती है,और जातक का खून खराब हो जाता है अथवा घर के अन्दर खून वाली बीमारिया और घर के अन्दर दवाइयों का प्रयोग अधिक होने लगता है। और इस प्रकार के जातक को विधवा या चरित्र हीन औरतें और अपने ही परिवार के सदस्य उस जातक को बरबाद करने के लिये सबसे आगे होते है। इस प्रकार की ग्रह युति के कारण जातक की ताई चाची आदि घर के सदस्य उसके साथ घात करने के चक्कर मे रहते है और अधिकतर समय आने पर बरबाद करने मे सफ़ल हो जाते है। अगर इस मंगल के जातक के चौथे या आठवें भाव में शुक्र हो तो जातक के चाचा और ताऊ आदि जातक की बरबादी का कारण बनते है,इसके लिये जातक को सभी बुराइयों को भूल कर चाची ताई और घर की विधवा औरत के चरण छूकर आशीर्वाद लेते रहना चाहिये। इस मंगल के उपस्थित होने के समय में अगर बुध और चन्द्र जातक के छठे भाव मे होते है तो जातक की माता पर उसकी बचपन की जिन्दगी मे बहुत बुरा असर होता है,और इस बात की पहिचान जीभ मे थुथलाहट या हकलाने वाली बात भी मिलती है। चौथे मंगल के समय अगर राहु केतु या शनि जातक के नवें भाव में विराज रहे हों तो अपनी आठवीं द्रिष्टि से मंगल के असर को खत्म कर देते है,लेकिन मंगल अपने कामो और अन्य बातों के अन्दर इतना मशूगल हो जाता है कि उसे गलत हरकतें करने की फ़ुर्सत ही नही मिलती है,अथवा वह पुलिस या न्याय सेवा में काम करने लगता है,अथवा उसके घर में पूजा पाठ और धार्मिक अनुष्ठान होने से मंगल की आग हवन पूजा का रूप धारण कर लेती है,लाल रंग के परिधान और लाल रंग के टीका आदि लगाने से यह मंगल अपना दुष्प्रभाव नही दे पाता है। इस मंगल वाले जातक का बुध अगर बारहवें भाव में हो जातक दुखों से दर दर मारा मारा घूमने वाला होता है,और उसके अन्दर कम दिमाग होने से तथा बदजुबानी से हमेशा तकलीफ़ ही मिला करती होगी। चौथे मंगल के समय में शनि अगर लगन में है तो जातक चोर होता है,और उसकी निगाह अच्छे स्थान में भी जाकर चोरी और बदनीयती की तरफ़ चली जाती है।

चौथे मंगल से परेशानी में किये जाने वाले उपाय

इस मंगल वाले जातक को रोजाना सुबह को जागकर पहले अपने दांतों को पानी से साफ़ करना चाहिये बाद में पेस्ट और मंजन आदि करे। अगर घर में आग लगने और चोरी के माजरे अस्पताली कारण आदि सामने आते है तो घर की छत पर किसी खुले स्थान में चौकोर थैली के अन्दर शक्कर या बूरा भरकर रखना चाहिये,बरसात हो जाने या जीवों द्वारा खराब किये जाने से बचने के लिये लोहे की जाली के अन्दर स्थापित किया जा सकता है,या पोलीथिन के अन्दर रखा जा सकता है,लेकिन ध्यान रखना चाहिये कि थैली का रूप चौकोर ही होना चाहिये। अगर इस मंगल के कारण पेट की खराबियां हो रही है तो पास के किसी बरगद के पेड की जड में शक्कर मिला दूध एक कप चढाना चाहिये और उस दूध से भीगी मिट्टी को माथे पर रोजाना तेतालीस दिन तक लगाना चाहिये,दूध भी तेतालीस दिन तक ही लगातार चढाना चाहिये। मिट्टी के सकोरों में शहद भरकर शमशान या शमशानी जमीन जो किसी भी प्रकार की फ़सल को पैदा नही कर पाती हो में दबाना भी एक अच्छा उपाय है,यह काम मंगलवार की दोपहर को करना चाहिये। दक्षिण के दरवाजे वाले घरों में मुख्य दरवाजे के बीच में पाल शंख और चांदी को दबाने से भी इस प्रकार के मंगल का प्रभाव कुछ कम हो जाता है।तांबे के ताबीज में सोने और चांदी को मिलाकर बांधने से भी इस मंगल के प्रभाव को बचाया जा सकता है,सोना सूर्य होता है चांदी को चन्द्रमा के रूप में जानते है,अगर सोने चांदी को बांधने की ताकत नही हो तो गेंहूं से बने व्यंजन मीठे हलुआ के साथ साधुओं को खिलाना भी कामयाब करता है,इसके अलावा चिडियों को मीठा खिलाना (रोटी या खाने वाली चीज के अन्दर शक्कर मिलाकर) तो भी यह मंगल फ़ायदा देता है। इसके साथ ही मंगल के साथ बुध होने के समय जातक के लिये बहुत बुरा असर होता है,जातक किसी के लिये चाहे बुरा नही हो लेकिन वह दूसरों के लिये हमेशा बुरा असर देने वाला होता है। मंगल के साथ शनि अगर चौथे भाव मे होता है तो जमीन खरीदने के बाद बहुत बुरा असर होता है। मंगल के साथ केतु भी राजा और सिपाही की लडाई वाला असर देता है।

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