Lord Ganesha

कहा जाता है ’श्रीगणेश का नाम लिया तो बाधा फ़टक न पाती है देवो का वरदान बरसता बुद्धि विमल बन जाती है’,हर धर्म में चाहे वह हिन्दू के अन्दर ऊँ के रूप में मान्यता रखता हो,मुश्लिम धर्म मे वह चांद सितारे से मान्यता रखता हो क्रिश्चियन धर्म में वह क्रास से मान्यता रखता हो,या अपने अपने धर्म के अनुसार अपनी अपनी पहिचान के निशान से मान्यता रखता हो वह एक ही पताका के नीचे चलने वाले कारणों को अपने अन्दर समाहित करने की शक्ति रखने वाला केवल केतु ही माना जाता है। केतु की मान्यता को ज्योतिष में गणेश की उपाधि दी गयी है और जैसे भी कार्य की शुरुआत होती है एक अद्रश्य शक्ति के रूप में उसे प्रयोग में लाते है। कहा तो यहां तक जाता है कि बिना केतुके कोई भी स्थान व्यक्ति या नाम का प्रभाव समाज मान्यता कोई मान्यता नही रखती है।

गणेश जी

पुराणों में गाथा है कि गणेशजी पार्वती के मानस पुत्र है,वे पार्वती के एकान्त वास के समय के समय की उत्पत्ति है,पार्वती जी को जब एकान्त वास अखरने लगा तो उन्होने अपने शरीर से रगड कर छुटाये गये मैल से एक बालक की मूर्ति का निर्माण किया और उस मूर्ति को उन्होने अपने साथ केवल अपने एकान्त वास की स्तब्धता को दूर करने के लिये ही रखा। जैसे जैसे उनकी धारणा उस मूर्ति में बढती गयी उस मूर्ति के अन्दर शक्तियों का प्रवाह होता गया और एक दिन वह मूर्ति सजीव होकर गणेशजी का रूप धारण कर गयी,यहाँ तक कि खुद शिवजी भी उस गणेश से पराजित होने के डर से सिर को काटने से नही चूके और बाद में पार्वती के द्वारा अपने सजीव शक्ति को वापस जिन्दा करने के लिये तांत्रिक रूप से हाथी के सिर को उनके सिर के साथ उसी प्रकार से जोडा जैसे राजा दक्ष (शिवजी की पूर्व पत्नी सती के पिता) का सिर बकरे के सिर से शोभायमान किया। वही गणेश का रूप जो मानस रूप से केवल शरीर के मैल से बनाये गये थे,एकान्तवास की स्तब्धता को दूर करते करते एक दिन आस्था से सजीव होकर जन कल्याण के लिये अपने प्रभाव को देने लगे। आज भी किसी भी दरवाजे के बाहर वे विराजमान होते है,और किसी भी मन्दिर में अगर उनका प्रवेश में वास नही है तो वह मन्दिर पूरा नही माना जाता है,वह दरवाजे पर रहने के कारण दरवेश भी कहलाते है और घर के अन्दर रहने के कारण अद्रश्य शक्तियों को देने के कारण श्री यानी लक्ष्मी के गणों के ईश भी माने जाते है। जो साधन धन और धान्य के लिये प्रयोग में लाये जाते है वही गणों के नाम से जाने जाते है,जैसे किसी व्यवसाय स्थान में कार्य करने वाले लोग और उस स्थान में कार्य के दौरान प्रयोग की जाने वाली मशीने कमन्यूकेशन के साधन आदि सभी व्यवसाय स्थान के गणों के रूप में जाने जाते है वही एक व्यक्ति जो सम्पूर्ण कार्य को सम्भालता है मनुष्य के रूप में गण की उपस्थिति देता है और वही व्यवसाय स्थान का नाम और स्थान उस व्यवसाय स्थान के गणेश के रूप में जाना जाता है।

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