चौथा भाव

चौथे भाव का मालिक चन्द्रमा है,जो इस घर में उच्च फ़ल का भी है,यानी चन्द्रमा या गुरु किसी का भी चौथे भाव में होना शुभ फ़ल ही देता है,चौथे घर में हम अपने पिता की ओर से क्या प्राप्त करेंगे,या पिता की स्थिति कैसी होगी हमे इस बात का संकेत मिलता है। इसके अलावा पिता के साथ हमारा संबन्ध कैसा होगा यह भी चौथे भाव से देखा जाता है। कुन्डली का चौथा भाव घर में पानी रखने का स्थान है,यह नल कुंआ आदि का भी कारक है,शारीरिक तौर पर हमारे शरीर में आयुर्वेदिक सिद्धान्तों के अनुसार सर्दी गर्मी या हमारे मन की शांति का चौथे घर से विशेष सम्बन्ध है,यहां पर अशुभ ग्रह होने से मन की शांति पर बुरा असर पडता है,कई बार सब कुछ होते हुये भी व्यक्ति के मन की खुशी में विघ्न ही रहते हैं,यानी वह समस्या न होते हुये भी मुरझाये फ़ूल की तरह रहता है,तथा उसके जीवन में जद्दोजहद के हौसले में भी काफ़ी कमी आ जाती है।

चौथे घर का सम्बन्ध हमारी उम्र के दूसरे हिस्से से यानी पच्चीस साल की आयु से लेकर पचास साल की आयु तक,इसी हिस्से में हमारे गृहस्थ जीवन और जवानी के समय में हम कहां तक लाभ प्राप्त कर सकते है उसके बारे में भी इस घर से पूरी तरह जाना जा सकता है,यह घर हमारी किस्मत भाग्य से भी संबन्ध रखता है,लेकिन किस्मत के उस हिस्से से जो पूर्वजन्म से हम अपने साथ लाये हैं,यानी किस्मत किस हद तक हमारा साथ देगी इसक संबन्ध भी चौथे घर से है।

दिशा की द्रिष्टि से चौथा भाव पूर्व और उत्तर दिशा का कारक है,इस तरह से हमारे कामों के सम्बन्ध में चौथा घर कपडे के काम से विशेष सम्बन्ध रखता है,इसके अलावा पानी और दूध भी इसके अन्तर्गत आते है,शायद इसीलिये यदि चौथे भाव में चन्द्रमा हो तो इसे खर्च करने पर बढने वाला आमदन का दरिया कहा जाता है,यदि चौथे घर मे शुभ ग्रह अथवा चन्द्रमा या गुरु या दोनों हो तो तब व्यक्ति को कपडे से सम्बन्धित काम करने से भी लाभ होता है,शर्त यह है कि दसवें घर में कोई अशुभ ग्रह न हो,क्योंकि चौथे घर की सातवीं द्रिष्टि दसवें घर अर्थात हमारे कर्म स्थान पर पडती है।

चौथा घर हमारे आमदन के साधनों से भी सम्बन्ध रखता है,यानी जीवन में जो हम कमायेंगे उस कमाई का चश्मा किस ओर से और किस तरह से हमें प्राप्त होगा। यह घर गर्भ अवस्था अथवा माता के पेट से भी सम्बन्ध रखता है,वास्तव में माता के पेट मे होने से नही बल्कि जन्म के बाद का जो जो पहला हिस्सा है,यानी शैशव काल है,उसका भी इस घर से सम्बन्ध है,शायद कई बार चन्द्रमा कमजोर होने की स्थिति में बच्चे का शैशव काल का जमाना स्वास्थ्य के सम्बन्ध में इतना अच्छा नहीं रह जाता है।

चौथा घर हमारी माता से विशेष संबन्ध रखता है,यदि यहां पर खराब ग्रह हों तो माता के लिये खराब असर होता है,यानी माता के मन की शांति व स्वास्थ्य ठीक नही रह पाता है,यदि यहां पर शुक्र राहु जैसे ग्रह हों तो माता की सेहत के लिये इसका असर अच्छा नहीं रह पाता। मंगल और केतु का भी असर होना माता के स्वास्थ्य को खराब करता है,माता के अलावा इसका सम्बन्ध हमारे नाना के घर से भी है,यानी माता के बहन भाइयों तथा माता के माता-पिता से यानी नाना नानी से। यहां पर बहुत अशुभ ग्रह होने से मामा पर बुरा असर पडता है,कई हालातों में यहां पर बैठा हुआ नीच मंगल व्यक्ति के मामा की मृत्यु तक करवा देता है,या उसके जीवन में कई प्रकार के विघ्नों का कारक बन जाता है।

इस घर का पानी में रहने वाले जीव जन्तुओं से भी सम्बन्ध है,और इसके अलावा दूध देने वाले जानवर गाय भैंस आदि से भी इसका संबन्ध है,सवारी के संबन्ध में यह घर चार पहिया के वाहन का कारक है,क्योंकि पिछले जमाने में इस घर को घोडे का घर कहा जाता था,और दरियायी घोडा भी इसी घर से सम्बन्ध रखता है,चौथे घर को लक्ष्मी स्थान भी माना जाता है,इसका अर्थ है कि उस व्यक्ति के धन रखने का स्थान,यदि यहां पर शुभ ग्रह हों तो मकान के उसी भाग में यदि वह व्यक्ति अपने धन को रखे तो उसका फ़ल काफ़ी मात्रा में शुभ हो जाता है,इस घर को चश्मारिजक भी कहा जाता है,यानी हमारे जीवन में उन्नति के लिये हमारी किस्मत का चश्मा फ़ूटेगा,या नहीं अथवा किस प्रकार या किस साधन से हम अपना धन कमायेंगे,और किस मात्रा में कमा सकते हैं।

पौधों दरख्तों में रसभरे फ़लों के वृक्षों का कारक चौथा घर है,ऐसे वृक्ष जिनके फ़ल रस से भरे हों,फ़ल तो खजूर भी कहा जाता है,लेकिन खजूर कोई रसभरा फ़ल नहीं है,उदाहरण के लिये तरबूज आम अंगूर अनानास आदि फ़ल चौथे भाव के फ़ल से सम्बन्धित होते हैं।

हमारे शरीर के अंगों में चौथे घर का संबन्ध हमारी छाती या हमारे दिल से है,इसी तरह से कई बार चौथे घर में अशुभ ग्रह होने से दिल की बीमारी होने का अंदेशा रहता है,औरत के टेवे में चौथा घर नाभि या पेट के अंदरूनी भाग से भी सम्बन्ध रखता है,यानी स्त्री की कुंडली में यदि चौथे भाव में अशुभ ग्रह हों तो वह बच्चा होने के समय या गर्भावस्था में स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है।

धन के मामले में चौथे घर का सम्बन्ध हमारे पिछले जन्म से लाये हुये बंद मुट्ठी का कारक है,यानी पिछले जन्मों के अनुसार जो हमारा भाग्य है,उसके फ़ल की प्राप्ति की मात्रा का संबन्ध भी इसी घर से है,इसीलिये इसे साथ लाया माल या बन्द मुट्ठी के अन्दर का हिस्सा कहा जाता है।

चौथा घर चन्द्रमा का घर है,इसलिये इस घर का रात्रि के समय में बहुत सम्बन्ध है,यदि यहां पर शुभ ग्रह हों तो रात को किये हुये काम अच्छा फ़ल देंगे,यानी वह ग्रह रात के समय ज्यादा शक्तिशाली होंगे,यदि यहां अशुभ ग्रह हों तो हम पर विपदा भी रात के समय ही आयेगी,यदि यहां शुभ ग्रह हों तो वह रात्रि के समय पूरी अवस्था में जाग पडते हैं,यहां पर यह बात भी ध्यान रखने योग्य है,कि चौथे घर में यानी चन्द्रमा के घर में माता के घर में बैठा हुया कोई भी ग्रह अशुभ फ़ल नहीं देता है,यदि चन्द्रमा केंद्रीय घरों अर्थात एक चार सात दस से बाहर बैठा हो। इस घर में चन्द्रमा ग्रहफ़ल का और मंगल शुक्र केतु राशिफ़ल के होते हैं।

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