जातकों के उत्तर

आयुष्मान कुलदीप शर्मा शास्त्री नगर जयपुर राजस्थान भारत

मकर लगन की कुन्डली है,और लगनेश शनि है,शनि वक्री होकर प्लूटो के साथ नवें भाव मि विराजमान है,इस शनि के बक्री होने का प्रभाव
प्लूटो] की युति लेकर नवें से तीसरे यानी ग्यारहवें भाव,नवे से पंचम लगन,और नवे से सप्तम तीसरे भाव,नवें से नवम पंचम और नवम से शनि की द्रिष्टि दसवें भाव छठे भाव में अपना प्रभाव दर्शित कर रही है,शनि और लगन पर अपना प्रभाव देने वाले ग्रहों में तीसरे भाव से शुक्र,मीन राशि और मिथुन राशि का प्रभाव लेकर जीवन पर प्रभाव दे रहा है,आठवें भाव का राहु बक्री गुरु का प्रभाव लेकर और बक्री मंगल का साथ लेकर लगन पर और कुटुम्ब भाव के साथ धन भाव में स्थापित ग्रह सूर्य,केतु बुध पर अपना पूरा असर डाल रहा है,छठे भाव का चन्द्रमा नवम में विराजमान बक्री शनि और प्लूटो का प्रभाव झेल रहा है,धन भाव में विराजमान सूर्य,बुध और केतु का भी प्रभाव सहन कर रहा है.तीसरे भाव में विराजमान शुक्र अपनी अहमियत लेकर मीन और मिथुन का प्रभाव लेकर सीधी तिरछी नजर से चन्द्र को देख रहा है.चन्द्र छठे भाव से और मंगल और गुरु वक्री होकर आठवें भाव से अपना गुपचुप प्रभाव जातक के जीवन पर दे रहे है,जातक का चतुर्थेश और सुखेश मंगल बक्री होकर मृत्यु के भाव में विराजमान है,पराक्रम का और हाव भाव को प्रकट करने वाला तथा बारहवें भाव का स्वामी गुरु भी बक्री होकर मृत्यु भाव में विराजमान है.सप्तमेश चन्द्र मिथुन और कन्या का प्रभाव लेकर शत्रु ग्रही तथा त्रिक भवन में अपने को सूर्य,बुध केतु और शनि (बक्री) की मार को सहन कर रहा है.लगन से कुन्डली का प्रभाव इस प्रकार से है.

चन्द्र लगन मिथुन राशि की है,और राशि के स्वामी बुध सूर्य के साथ में नवें भाव में केतु के द्वारा ग्रहण लेकर विद्यमान है,और राशि के अनुसार शनि बक्री होकर प्लूटो को साथ लेकर चन्द्र से चौथे भाव में विराजमान है,राशि से गुरु और मंगल बक्री होकर तीसरे भाव में राहु से प्रताणित है,राशि से भाग्य भाव मे कुम्भ राशि का प्रभाव लेकर सूर्य बुध और केतु विराजमान है,और चन्द्र को सहारा दे रहे है.राशि से त्रिकोण का बल लेकर सूर्य जो कि तीसरे भाव का मालिक है,साथ है,बुध चन्द्र राशि का लगनेश और चौथे भाव का मालिक है,सूर्य के साथ है,नकारात्मक प्रभाव देने वाला ग्रह जो कि सूर्य को अपनी आभा में प्रकट नही होने दे रहा है,वह केतु भी साथ है.चन्द्र राशि के विरोध में मंगल और गुरु बक्री होकर राहु का बल लेकर अपना प्रभाव दे रहे है.

सूर्य राशि कुम्भ है,और साथ में सूर्य राशि के स्वामी शनि बक्री होकर पंचम भाव में स्थापित चन्द्रमा की तिरछी द्रिष्टि से बाधित हो रहे है,सूर्य के विरोध में बक्री होकर मंगल,गुरु राहु का बल लेकर आमने सामने है.और सूर्य राशि से धन भाव में मीन और वृष का प्रभाव लेकर शुक्र स्थापित है.धनेश और जायदाद के स्वामी गुरु,तृतीयेश और कार्येश मंगल बक्री होकर राहु का साथ लेकर सप्तम में विराजमान है.

जातक के जन्म के अनुसार नवांश कुम्भ राशि का मिलता है,और कुम्भ के स्वामी शनि बक्री होकर बारहवें भाव में सूर्य के साथ विराजमान है,नवांश में शुक्र कुम्भ राशि में विराजमान है,धनेश और जायदाद के स्वामी गुरु तथा तीसरे और दसम भाव के स्वामी मंगल बक्री होकर छठे भाव में विराजमान है,पंचम में विराजमान बुध शुक्र का साथ दे रहा है,जबकि सप्तमेश सूर्य लगनेश शनि के साथ बारहवें भाव में विराजमान है.

जातक की कुन्डली में गुरु जातक का,चन्द्र माता का,सूर्य पिता का,शुक्र पत्नी का,बुध पुत्री का,शनि कार्य और मकान का,मंगल पराक्रम का और खून का,प्लूटो मत्यु स्थान का,केतु पुत्र और साले तथा मामा और नाना का,राहु स्वसुर और ससुराल का,प्रभाव जीवन में देता है.यह ग्रह सामाजिक रिस्तों के अनुसार माने जाते है.

जातक के जीवन में राशियां मकर शरीर से,कुम्भ धन से,मीन संचार से,मेष माता से,वृष संतान से,मिथुन कार्य से,कर्क जीवन साथी से,सिंह मृत्यु स्थान से और मृत्यु वाले कारणों से,कन्या धर्म और भाग्य से,तुला पिता और कार्य से तथा पत्नी की माता से,पत्नी के घर से,वृश्चिक जायदाद और कमाई से,मित्रो से,और पत्नी के परिवार से संतान से,शिक्षा से,और धनु खर्च तथा यात्रा से मानी जायेगी.

कालचक्र की कुन्डली के अनुसार जातक की लगन खाली है,शरीर दूसरों पर निर्भर है,खुद के द्वारा सार संभाल नही है,धन के भाव में सूर्य पिता और बुध गणना करने वाले व्यक्ति के रूप में तथा केतु सूर्य सरकारी सहायक के रूप में अपना बखान करता है,तीसरे भाव में शुक्र पत्नी बन कर कमन्यूकेशन के क्षेत्र में मीन राशि और मिथुन का प्रभाव लेकर दोहरा स्वभाव गर्म के सामने ठंडा और ठंडे के सामने गर्म,की आदत से,बाहरी लोगों से कमन्यूकेशन के काम में रुचि,वह कमन्यूकेशन चाहे,टेलीफ़ोन से हो या इन्टरनेट से किया जाये,माता और मकान का भाव खाली है,संतान का भाव भी खाली है,छठा भाव जो कि कर्जा दुश्मनी और बीमारी का कारक है,तथा चन्द्रमा के आजाने से सोचे और प्लान बनाकर किये जाने वाले कामों को रोकने में सहायक है,सप्तम भाव भी खाली है,मृत्यु अपमान और जान जोखिम के भाव में गुरु बक्री जातक के जीव की उपाधि लेकर विराजमान है,बक्री होने के कारण जातक का जीवन सुरक्षित है,लेकिन राहु के असर के कारण आजीवन ध्यान पत्नी,नौकरी और मन्त्रणा की चाहत लेकर सप्तम को ही उल्टा होकर देखता है,मंगल जो कि कालचक्र की कुन्डली के अनुसार आठवें भाव का ही मालिक है,और माता तथा जायदाद का मालिक है,को मृत्यु अपमान और जानजोखिम के साथ राहु असर झेलना पड रहा है,राहु जो कि कभी भी दवाइयों या वाहन या फ़िर किसी प्रकार के बिजली पेट्रोल और बारूद से जीवन को आघात कर सकता था,आसमानी बिजली से शरीर को खत्म कर सकता था,मंगल के रूप में माता के रहते,अंकुश का काम किया जा रहा है,अगर मंगल अंकुश का काम नही करता तो यह राहु रूपी हाथी कभी भी जीवन पर हावी हो सकता था.धर्म और नवें भाव में शनि के बक्री होकर विराजमान होने के कारण धर्म और भाग्य में अन्धेरा छा रहा है,कभी कभी विचारों में प्लूटो के रूप में कौंधने के कारण जीवन को जीने की इच्छा बनी रहती है.दसवां भाव खाली है,ग्यारहवां खाली है,और बारहवां भाव भी खाली है.

शनि के स्थान से चार भावों के खाली होने के कारण जातक को लगातार अपनी शादी के बाद स्थाई काम के लिये लगभग दस साल तक प्रयास करना पडेगा,और उसके बाद बृहद रूप में किसी बहुत बडे बैंकिन्ग या व्यापारिक संस्थान में कार्य मिलेगा.

अभी वर्तमान में २८ अप्रैल २००८ से पत्नी के साथ चला आ रहा मतभेद एक दम शान्त होने के प्रति बात बनेगी,और एक मई दो हजार आठ से परिवार में उलझने,शरीर के अन्दर सामजस्य बिठाने की परेशानी दिखाई देती है,साथ ही बेकार की बातों में दिमाग के जाने से और किसी प्रकार की शंका करने से घर में ही विरोध सहन करना पड सकता है,किसी प्रकार चोरी या धन की हानि मिलती है,आग या पित्त जनित रोग परेशान कर सकते है,नौ मई दो हजार आठ से पत्नी द्वारा परेशानियों के अन्दर सहायता मिलती है,और पत्नी के द्वारा किसे बडे प्रोजेक्ट के लिये सीमा निर्धारण के प्रति घर में माता को या पिता को पैसे के प्रति तनाव मिलता है,२१ मई २००८ से फ़िर घर में तनाव और किसी प्रकार की डाक्टरी सहायताओं की जरूरत पडती है,शक के चलते दिमाग के अन्दर बेकार की उलझन रह सकती है,पेट में गैस वाली बीमारी की परेशानी हो सकती है,माता को ब्लड प्रेशर की बीमारी हो सकती है,सास या स्वसुर को कोई शारीरिक कष्ट हो सकता है,साले के द्वारा किसी नये आर्गनाइजेसन की नींव डाली जा सकती है,पिता का परिवार के प्रति सामजस्य एक सहायक जैसा ही मिलता है,पुत्र के लिये समय का प्रभाव चालू हो चुका है,मामा या नाना के घर से कोई अशुभ समाचार मिलने के समाचार मिलते है,और इन कारणो से कोई धन की सहायता या भौतिक सहायता का काम उनके प्रति करना पड सकता है.३० मई २००८ से स्वसुर की परेशानी मिलती है,और इन परेशानियों के चलते,घर के अन्दर तनाव का माहौल बन सकता है,पत्नी के द्वारा किसी बात को लेकर माता पर ब्लैम लगाया जा सकता है,सास का व्यवहार परिवार के प्रति रूखा हो सकता है,लेकिन २३ जून २००८ से ससुराल वाले लोग ही किसी बात पर सहायता के लिये आगे आ सकते है,अथवा उनके द्वारा किसी प्रकार की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सहायता दी जा सकती है.

२४ जनवरी २००९ से किसी प्रकार से सरकार से जुडी किसी कम्पनी या स्कूल या टेनिन्ग संस्थान में कार्य के मिलने का अवसर आ रहा है,जो कि आगे नबम्वर २००९ तक चलने की आशा है,उसके बाद फ़िर से कोई जनता से जुडी कम्पनी जो कि टेलीकम्न्यूकेशन से जुडाव रखती है,के प्रति दिमाग चलेगा,पत्नी को अस्पताल सम्बन्धी कोई सहायता लेने की जरूरत पड सकती है.यह सब दशा और अन्तरदशा के अनुसार लिखा गया है.

गुरु में शुक्र की दशा का प्रभाव वर्तमान में चल रहा है,गुरु अष्टम का और शुक्र तीसरे भाव का अपना अपना प्रभाव साक्षात रूप से प्रदान कर रहे है,वर्तमान में गुरु बारहवें भाव में और शुक्र अपने तीसरे स्थान का पूरा प्रभाव दे रहा है,इस गोचर के प्रभाव के कारण माता को वायु वाली बीमारियां,माता के स्थान से शनि के छठे भाव में बैठने के कारण घरेलू और रोजाना के काम माता के प्रति ही दिखाई दे रहे है,लेकिन शनि के बक्री होने पर अधिक काम तथा शनि के मार्गी होने पर कम काम मिलते है.माता की एक बहिन और भाई का साथ तथा सहयोग हमेशा के लिये मिलेगा,तथा किसी प्रकार के भी पारिवारिक या दुश्मनी ,बीमारी ,कर्जा को चुकाने का मानस उनका हमेशा बना रहेगा.माता के स्थान से तथा स्वसुर के स्थान से गुरु और मंगल का एक साथ राहु के साथ बैठना,और गुरु मंगल मिलकर हवा से सम्बन्ध रखने वाली चीजे तथा मंगल से बिजली वाली चीजों के साथ राहु पेट्रोल और बिजली की बिजनिस मे फ़ायदा देने के लिये उत्तम योग मिलता है,साथ ही माता और स्वसुर के साथ कोई दुश्मनी या अन्य भाव रखता है,तो ईश्वर उनको अक्समात सहायता भी भेजता है,माता को वायु वाली बीमारियां और स्वसुर को भी वायु वाली बीमारियों का प्रभाव मिलने से माता को मोटापन और स्वसुर को हाथ पैर की परेशानिया मिलती है,पिता और सास एक स्वभाव के मिलते है,अगर पिता को हाथ पैर की परेशानी मिलती है,तो सास को जवाई और पुत्रों के साथ उनके मामा खानदान तथा खुद के मानसिक प्रभाव को भी देखना होता है.

रामेन्द्र सिंह भदौरिया (आस्ट्रोभदौरिया)

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