केतु का फ़ल तीसरा भाग

RAHU

Rahu is personified as a diplomat and a shadowy planet and a legendary deceptor when disposed beneficially. Indicates diplomatic jobs, jobs requiring manipulations with facts, deals in poisons and drugs. It signifies cheats, pleasure seekers, insincere and immoral acts, etc.

It is phlegmatic in nature and gives malignant growth. When afflicting, causes malignant growth, disease of phlegm, intestines, boils, skin, ulcers, spleen, worms, high blood pressure, etc. It gives smoky and unpleasant appearance due to habits of overeating, resulting in foul smells and unclean body and nails.

KETU

It is dry and fiery in nature. Its affliction causes wounds, inflammations, fevers, intestinal disorders, aberrations, low blood pressure, deafness, defective speech and gives emaciated body with prominent veins. It is personified as a saint and inclines a person more towards mystic science and spiritual pursuits

केतु दूसरे भाव में अपने फ़लों को धन और भौतिक साधनों के रूप में अभाव देने का काम करता है,और इस अभाव को पूरा करने के लिये राहु अष्टम स्थान जो मौत का स्थान बोला जाता है से पूरा करता है। इस भाव का केतु कुटुम्ब के नाम से भी जाना जाता है और परिवार को आगे चलाने के लिये मामा भान्जा या साले के रूप में आकर परिवार की पूर्ति को देने वाला होता है,गोचर से यह परिवारी जनों को बाहर रखने वाला और जन्म कुंडली से परिवारी जनों को समाप्त करने या दूरस्थ भेजने वाला माना जाता है। इस भाव के केतु वाले जातक के अक्सर एक भाई और होता है और वह वृश्चिक राशि का या वृश्चिक लगन में पैदा होता है,घर के लिये वह अपने द्वारा अपनी क्रियाओं से एक तरह से बरबाद करने वाला ही माना जाता है,घर के अन्दर स्त्री जातकों का अभाव हो जाता है,माता को भी बडी बीमारी होती है। अक्सर माता के प्रति यह केतु मंगल वाला असर पैदा करता है,नाभि से नीचे की बीमारियां आदि होती है,अक्सर माता के लिये सर्जन की छुरी हमेश इन्तजार ही किया करती है।

केतु का स्वभाव बहुत ही हठीला होता है दूसरे भाव में

दूसरे भाव का केतु अपनी आदतों को कुछ इस प्रकार का बना लेता है कि उसे हर काम को करने की हठ पैदा हो जाती है,किसी भी वस्तु को लेना है तो वह उस वस्तु को लेने के लिये अपने सभी प्रयासों को करने से नही चूकता है,और उस वस्तु को जब तक प्राप्त नही कर लेता है तब तक उसे चैन ही नही आता है। यही हाल भोजन के मामले में भी देखा जाता है,उसे खाने से अधिक चखने की आदत होती है,अक्सर इस भाव के जातक की जीभ अपने होंठो को चाटा करती है। उसके सामने के चार दांत नुकीले होते है और दांतों की बनावट एक जैसी नही होती है। कोई भी काम करते वक्त जातक को आलस जरूर आता है।

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