केतु का भावानुसार फ़ल
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तंत्र में केतु को हत्था जोडी से जोडकर बताया गया है,केतु के लिये इस तांत्रिक वस्तु के बारे में कहा जाता है कि शादी नही हो रही हो तो केतु की इस हत्थाजोडी में सिन्दूर लगाकर और गुलाब के इत्र से भिगोकर हमेशा पास में रखा जाये तो जैसे ही गोचर से शुक्र का प्रभाव शरीर पर आयेगा,यह हत्थाजोडी शादी करवाने और मन भावन जीवन साथी को प्राप्त करवाने के लिये उत्तम व्यवस्था मानी जाती है। लेकिन बिना किसी मंत्र और सिन्दूर या खुशबू के यह बिलकुल ही बेकार मानी जाती है,खाली रखने या बिना किसी प्रयोजन के घर में रखने से यह घर की अन्य कारक वस्तुओं आदि को समाप्त करने के बाद खुद को समाप्त कर लेती है,इसे घर में सिन्दूर से पूरित करने के बाद किसी धातु की बन्द डिब्बी में रखना चाहिये,तथा ग्रहण और होली दीपावली को इसे जगाने के लिये धूप अगरबत्ती और दीपक के साथ इसके लिये सम्बन्धित मंत्रों का जाप करना चाहिये।

चौथे भाव का केतु

चौथे भाव से केतु का विस्तार से वर्णन करने के लिये भावना यही है कि व्यक्ति का जन्म चौथे भाव से ही शुरु होता है,माता का गर्भ और माता की गोद चौथे भाव से ही जानी जाती है। चौथे भाव के केतु के लिये सबसे पहले कालपुरुष की कुंडली के अनुसार चन्द्रमा का असर माना जाता है,दूसरे यह जिस राशि में होता है उस राशि के प्रभाव को उसी प्रकार से ग्रहण कर लेता है जैसे मन्दिर में लगातार जलती अगरबत्तियों की खुशबू को मन्दिर की दीवाले और अन्य वस्तुयें जो मन्दिर में रखी होती है वे ग्रहण कर लेती है। राशि के असर के बाद केतु की द्रिष्टि जिन भावों पर होती है उन भावों पर वह कर्क राशि के प्रभाव के साथ उपस्थिति राशि का प्रभाव भी देता है,और जो ग्रह अपना प्रभाव विभिन्न भावों से इस पर दे रहे होते है उन प्रभावों को भी द्रिष्टि देने वाले स्थानों पर प्रेषित करता है। जैसे के व्यक्ति की कुंडली में चौथे भाव में मकर राशि है और मकर राशि के केतु पर कर्क राशि के राहु का असर तो जरूरी ही होगा,जो कि केतु से सप्तम में विराजमान होगा,इसके साथ ही जो ग्रह राहु के साथ होंगे जैसे मानलो राहु के साथ चन्द्रमा और शुक्र है तो केतु को बल देने वाले ग्रह शुक्र और चन्द्रमा के साथ राहु भी बल देगा,चौथे भाव के त्रिकोण यानी बारहवे भाव मे और अष्टम भाव में जो ग्रह होंगे उन भावों के ग्रह और राशियां भी इस भाव के केतु को देंगे,साथ ही द्रिष्टि देने वाले ग्रह जैसे लगन में मंगल होगा तो वह भी मकर राशि के केतु पर तुला राशि के मंगल का प्रभाव देगा। इस प्रकार से मकर राशि के केतु पर सर्व प्रथम कर्क राशि,फ़िर मकर राशि,उसके बाद केतु से त्रिकोण में वृष राशि,जो वृश्चिक राशि के प्रभाव से पूर्ण होगी,उसके बारहवे भाव में स्थिति कन्या राशि जो मीन राशि से मिक्स होगी सप्तम की राशि जैसे कर्क और कर्क राशि के अन्दर मकर का भी प्रभाव मिक्स होगा देने के लिये अपना असर देगी। चौथे भाव का केतु क्या क्या फ़ल देता है आइये आपको आगे बताते हैं.

चौथे भाव के केतु के फ़ल

चौथा भाव कालपुरुष की कुंडली के अनुसार कर्क राशि का प्रभाव देने वाला होता है,इस भाव में प्रभाव देने वाली राशियां मकर राशि दसवें भाव से वृश्चिक राशि अष्टम भाव से,मीन राशि बारहवें भाव से अपना राशि वाला प्रभाव देती है,केतु नकारात्मक होता और हमेशा राहु की शक्ति पर निर्भर होता है,चौथे भाव के केतु पर दसवें भाव के राहु का असर जरूर होता है,दसवें भाव का राहु कार्य भाव में होता है,और कार्य को देने के लिये वह केतु का सहारा लेता है,चौथे केतु को वह अपने कार्य के लिये साधनों के रूप में प्रस्तुत करता है। लालकिताब के अनुसार केतु को कुत्ता भी कहा जाता है और पूंछ वाले जानवरों के लिये भी माना जाता है,चौथे भाव का केतु उस कुत्ते के लिये माना जाता है जो घर में सहायता देने के लिये हमेशा तैयार हो,उसे कार्य भाव का बल आदेश से देना पडता है और कार्य को देने के बाद केतु उतना ही कार्य करता है जितना कि उसे आदेश दे दिया जाता है,अगर केतु को गुरु का सहारा किसी तरह से मिल गया होता है तो वह ज्ञानी कुत्ते के रूप में जाना जाता है,बुध का सहारा मिल गया होता है तो वह बातूनी कुत्ता और कमन्यूकेशन से साथ देने वाला कुत्ता बन जाता है और आवाज के साथ चलने के लिये हमेशा तैयार होना पडता है,रिस्तों में इस केतु को ससुराल में जंवाई कुत्ता,बहिन के घर भाई कुत्ता,और मामा के घर भानजा कुत्ता के रूप में भी माना जाता है,लेकिन साली के लिये जीजा कुत्ता भी बन जाता है,भाभी के लिये देवर भी कुत्ता बन जाता अगर अलग अलग ग्रहों से इस केतु का बखान किया जाये,कार्यों के अन्दर अगर राहु सूर्य से शक्तिमान है तो यह एक सरकारी कुत्ता भी बन जाता है राहु पर अगर आगे या पीछे से बुध का असर है तो यह डाक बांटने वाला डाकघर का पोस्तमेन रूपी कुत्ता बन जाता है,जो दरवाजे पर जाकर चिट्ठिया बांटा करता है,इसके अलावा अगर शनि ने इसका साथ ले लिया है तो यह मकान को बनाने वाला और ईंटों को चिनने वाला मिस्त्री नामका कुत्ता भी बन जाता है। आफ़िस में चपरासी या केयरटेकर की नौकरी करने वाला कुत्ता भी चौथे भाव के कुत्ते के रूप में माना जाता है,पानी का नल भी केतु के रूप में है ह्र्दय की बीमारियों में सहायक डाक्टर भी केतु के रूप में है। घर के अन्दर बिछा शानदार पलंग भी केतु के रूप में अपना प्रभाव सामने होकर देता है,मंगल से कंट्रोल होने पर यह हवा देने वाला पंखा भी बन जाता है,घर में देखा जाने वाला टीवी भी बन जाता है और कम्पयूटर बनकर घर बाहर की जनता से मिलने और समाचारों को आदान प्रदान करने वाला भी बन जाता है। घर के ऊपर में दिखने वाली ऊंचाई भी केतु की करामात होती है,उत्तर दिशा में लगा कोई खम्भा या मोबाइल का टावर भी केतु का भान करवाता है,उत्तर दिशा में बने मंदिर या गिरजाघर की चोटी को भी केतु के रूप में माना जाता है,किसी बिना पत्ते के पेड को भी इसी केतु की श्रेणी में मान लिया जाता है केतु का रूप पानी की राशि में होने के कारण इस केतु को पानी में खडा हुआ खम्भा भी मान लिया जाता है,और पानी के किनारे बना एक घर जो कहीं भी लेजाकर सिफ़्ट कर दिया जाये वह भी केतु की श्रेणी में आजाता है। चौथे भाव के केतु वाले जातक के मन में हमेशा दुर्गा की भक्ति विराजमान रहती है,कारण केतु चौथे भाव में रहकर ममत्व का रूप ग्रहण कर लेता है,और जो भी भावनायें धर्म और विश्वास के प्रति बनती है वे सभी माँ दुर्गा के प्रति मानी जाती है। जातक को दुर्गा के भजन गाने और सुनने के लिये भी माना जाता है। अक्सर चौथे भाव के केतु वाले व्यक्ति के पास अगर वह शनि या चन्द्र शुक्र और बुध की राशियों में नही है तो बहू का सुख और अगर वह सूर्य मंगल गुरु की राशियों में है तो दामाद का सुख अच्छा मिलता है। केतु अपनी शक्ति को बडी ही ईमानदारी से राहु और उसके तीसरे भाव पंचम भाव और नवम भाव के ग्रहों से ग्रहण करता है और उसके प्रभाव से वह जीवन में तरक्की के रास्तों पर चलता चला जाता है। अगर केतु के लिये यह आवश्यक है कि किसी प्रकार से गलत राशि या गलत ग्रह का असर न मिले,कभी कभी गोचर का ग्रह केतु को अपने बस में कर लेता है और केतु खुद को काटने के लिये अपना प्रभाव देने लगता है,कमजोर राशि का शनि अगर कमजोर होकर जातक के केतु पर असर देता है तो जातक केवल अर्दली के रूप में काम करता है लेकिन शनि अगर ऊंची राशि में और किसी ज्ञान वर्धक ग्रह के साथ मिलकर अपना असर देता है तो जातक के अन्दर कानूनी बातों को समझने और मर्यादा में रह कर चलने की औकात को दे देता है।

केतु की युति अन्य ग्रहों से होने पर मिलने वाले फ़ल

चौथा केतु कर्क राशि में होता है और प्रभाव भी मानसिक देता है,अगर चौथे भाव में कोई अन्य राशि है तो मिलने वाले फ़लों में उस राशि का प्रभाव भी शामिल हो जायेगा,जैसे कर्क राशि में होने से घर माता पानी पानी वाले साधन जानकार लोग वाहन और आना जाना गीत लिखना भावनाये प्रदर्शित करना आदि होता है,लेकिन अगर कोई अन्य राशि जैसे कि मकर राशि चौथे भाव में हो तो केतु का फ़ल मकर राशि से सम्बन्धित हो जायेगा,घर में भी रहना है और काम पर भी जाना है,यानी घर के कामों के साथ साथ आफ़िस या कार्य स्थान के भी काम करने है,घर की गाडी में भी घूमना है और आफ़िस की गाडी को भी यूज करना है,अथवा गाडी में केवल घर आने और आफ़िस जाने के लिये प्रयोग करना है,घर में माता की तीमारदारी भी करनी है और कार्य करने के स्थान में माता जैसी स्त्री की भी आज्ञा का पालन करना है,घर के अन्दर की बातें आफ़िस में ले जानी है और आफ़िस की बातें घर के अन्दर भी लानी है,घर में रहकर भावनात्मक गीत लिखने है तो आफ़िस में जाकर कार्य वाले रूप लिखने है,घर के पलंग पर सोते समय ख्यालों में जाना है तो आफ़िस में कार्य करते समय बिलकुल ही सजग रहना है,घर के अन्दर पानी वाले साधनों का बन्दोबस्त करना है तो आफ़िस के अन्दर जाकर जनरल पब्लिक को संभालने के काम करने है,घर के अन्दर नौकर या किसी रिस्तेदार से काम करवाना है,या रिस्तेदार के यहाँ उसकी हुकुम उदूली करनी है तो आफ़िस में जाकर मुख्य कार्याधिकारी की हुकुम उदूली करनी है,इसी प्रकार के अन्य कार्यों को करना है। इसके साथ ही जब चौथे भाव की राशि का योगात्मक रूप इस राशि के त्रिकोण की राशियों से जैसे चौथे भाव की पंचम की राशि वृश्चिक राशि होती है,इस राशि का स्वभाव जोखिम लेना होता है,इस राशि के सामने अच्छे अच्छे की बोलती बंद हो जाती है,इस राशि वालों को डर नही लगता है,वे एक बार काल से भी कुश्ती लड सकते है,इस राशि का स्वभाव खुद को सम्भालने का भी होता है,यह अपने को तैयार करके रखने वाली राशि होती है,यह अपने लोगों के लिये अपने शरीर का त्याग भी कर देती है,इस राशि का उद्देश्य लडाई करने का होता है,जब इस राशि की हार होनी होती है तो यह हार नाम के बोझ को लेकर नही रहती है,खुद को अपने ही प्रयास से समाप्त कर लेती है,यह राशि गूढ होती है,यह उन कारणों पर विश्वास करती है जो साधारण आदमी की पहुंच से बहुत दूर होते है,आदि कारण इस राशि के माने जाते है,इस राशि में जैसे कि मैने पहले केतु के मकर राशि में होने का वर्णन किया है के अनुसार शुक्र की वृष राशि स्थापित होती है,दोनो राशियों के प्रभावों को मिलाने से जैसे वृष राशि का सम्बन्ध धन से होता है,तो धन को खर्च करने में व्यक्ति के अन्दर डर नही होगा,व्यक्ति को साहसिक कामों के लिये धन खर्च करने से कोई हिचक नही होगी,धन को वह गूढ कार्यों के लिये आराम से खर्च करेगा,इसके बाद जो भी काम जोखिम के होते है उनसे वह धन को कमाने की हिम्मत रखेगा,पराशक्तियों के द्वारा या अपने प्रयास से पराशक्तियों की साधना से वह अपने धन को बढाने के काम करेगा,यह राशि खाने पीने के साधनो की तरफ़ भी अपना इशारा करती है,जातक के अन्दर आमिष खाने के लिये या शमशानी भोजन के लिये भी कोई हिचक नही होगी,लेकिन मंगल अगर कहीं भी ऊंचे स्थान में अपना स्थान बनाकर विराजमान है तो वह इन खानों से दूर रखने में मदद करेगा,आदि बाते जानी जाती है,इसके साथ चौथे भाव से नवें भाव में मीन राशि का होना पाया जाता है,इस मीन राशि में जो भी राशि होती है वह अपना प्रभाव भी मीन राशि के अन्दर सम्मिलित कर लेती है,मीन राशि मोक्ष की राशि है और कन्या राशि सेवा की राशि है,मीन राशि जातक के विदेश में निवास की राशि है तो कन्या राशि विदेश में सेवा करने के लिये अपना बल देगी,मीन राशि शांति प्रदान करने की राशि है तो कन्या राशि कर्जा दुश्मनी बीमारी देकर अशान्ति देने वाली राशि है इस राशि के स्वभाव से बैंक बीमा और धन वाले साधनों का विदेश से सम्बन्ध भी बन जाता है। राशियों के अलावा केतु का सम्बन्ध ग्रहों से होने पर भी अपना अपना फ़ल मिलता है,जैसे सूर्य से सम्बन्ध होने पर यह शेर कुत्ते की लडाई को मान्यता देता है,जीवन इस प्रकार के व्यक्ति से सम्बन्ध बन जाता है जो इस केतु के ऊपर हमेशा गुर्राने का ही कार्य करता है और जातक को भीगी बिल्ली बनकर रहना पडता है,अगर बुध अपना प्रभाव देता है तो केतु के साथ बुध होने से यह अंग्रेजी का अच्छा जानकार होता है और बोलने में अन्य भाषाओं का भी प्रयोग करने लगता है,केतु से पंचम में बुध होने से वह अपनी जुबान को खरी रखने वाला होता है और उसी तरह से बात करता है जैसे कि बिच्छू अपना डंक मार रहा हो,बुध अगर केतु से नवां होता है तो बहिन बुआ या बेटी का पति सहायक बन जाता है,मुशीबत के वक्त सहायता करने वाला और जीवन तथा धन का रक्षक बनकर सहायता करने वाला होता है। यह केतु दुभाषिया का काम भी करता है,जीवन में आने वाली मुशीबतों के वक्त अपनी जुबान से किये जाने वाले कार्यों का यह भुगतान प्राप्त करता है,ज्योतिष या गूढ विषयों में यह अपनी जानकारी अच्छी रखता है,नेटवर्किंग और कम्पयूटर का अच्छा ज्ञान होता है,शनि के होने से घर में वकालत का कार्य करता है या कमजोर होने पर दर्जी का कार्य करता है,कम्पनियों को जोडने का नये ग्राहक बनाने का और मकान के निर्माण करने का सहायक बन जाता है,शनि का अष्टम में होने से कार्य करने वाले आदमियों को विदेश भेजने के लिये दलाली करने वाला जमीन जायदाद या शनि वाले कारकों को खरीदने बेचने का कार्य करने वाला माना जाता है,दवाई की कम्पनियों में कार्य करने वाला और अस्पताल के अन्दर कम्पाउंडरी का कार्य करने वाला बन जाता है,शमशान में कब्र खोदने वाला बन जाता है,अथवा गंदी बस्ती में पडा रहने वाला व्यक्ति बन जाता है। इस प्रकार से अन्य ग्रहों के साथ इस केतु का अपना अपना सामजस्य बनता है.

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इस चित्र मे देखो इस लडकी की लगन का केतु छठे भाव के मंगल बद से पीडित कर रहा है। मिथुन लगन की यह लडकी बहुत बातूनी है,कालपुरुष से मेष राशि लगन की मान्यता को देती है,शरीर के अंगों में यह सिर की कारक होती है,केतु के मिथुन राशि में आते ही नीच के केतु की मान्यता हो जाती है,और राहु अपने धनु राशि का सप्तम में चला जाता है,राहु भी नीच का प्रभाव देता है,इसी के साथ मंगल की वृश्चिक राशि कुंडली के छठे भाव में विराजमान हो जाती है। और जब इस राशि में मंगल भी अपना प्रभुत्व जमा लेता है तो यह राशि पूरी तरह से खतरनाक हो जाती है,मंगल से अगली राशि में राहु विराजमान होता है और वह नीच का होने के कारण अपनी नीचता से बाज नही आता है,मंगल के दो रूप एक नेक और एक बद यह परिभाषा लालकिताब के अनुसार बताई जाती है,बद मंगल के देवता भूत प्रेत पिशाच आदि बताये गये है,और नेक मंगल के देवता हनुमान जी और उत्तम देव बताये जाते है,लेकिन रुद्रशक्ति के अनुसार व्रुश्चिक राशि का रुद्र शिवजी के रूप में भी माना जाता है,ग्यारहवा रुद्र हनुमानजी को बताया गया है,शिव अघोरी रूप में वृश्चिक राशि के माने जाते है,और जो व्यक्ति इस लडकी के लिये तांत्रिक प्रयोग करने वाला है वह इसके सप्तम भाव को प्रयोग करने के बाद इस लडकी पर अपने प्रयास को प्रेषित करेगा। एक बार इस लडकी के दरवाजे पर एक नंगा मैला कुचैला व्यक्ति जिसके अन्दर बदबू आ रही थी कुछ खाने के लिये मांगने के लिये आया,इस लडकी ने उसे घर के अन्दर बनी हुयी दाल और रोटी खाने के लिये देनी चाही,उसने इस लडकी से माँस पकाकर खिलाने के लिये कहा,इस बात पर इसे गुस्सा आयी और आसपास से दो चार लोगों को बुलाकर उस व्यक्ति दरवाजे से भगा दिया। वह व्यक्ति जाते जाते बोलकर गया कि एक तुझे भी नंगा नही घुमा दिया तो देखना। एक महिने के बाद यह लडकी अपने बाल नोचने लगी और भद्दी भद्दी गालियां देने लगी,आसपास के लोगों ने इसे मनोचिकित्सक को दिखाया,उसे पागल खाने में भर्ती कर दिया गया,लेकिन एक साल तक कोई इस लडकी पर दवाइयों और इलाज का फ़र्क नही आया,इसके परिजन इसकी जन्म पत्री और विवरण लेकर मेरे पास आये,मैने जन्म पत्री में देखा तो उपरोक्त ग्रह स्थिति सामने आयी। उपाय के लिये लडकी को उन तांत्रिक बाधाओं से मुक्ति के लिये केवल केतु को सबल बनाकर ही उसे सुधारा जा सकता था। केतु की सबलता के लिये दुर्गा उपासना और सप्तशती का हवनात्मक रूप भी करना जरूरी था। लेकिन जो उपाय सबसे अधिक कारगर साबित हो सकता था वह काली का विपरीत प्रत्यांगिरा स्तोत्र। नवरात्रों में मैने उस लडकी को उसके पति और भाई के साथ बुलवाया और विधि विधान से काली का महाविपरीत प्रतियांगिरा स्तोत्र का पाठ किया और अभिमंत्रित जल को उसे पिलाने लगा,दिनो दिन उस लडकी के अन्दर बदलाव आना शुरु हो गया,कभी कभी वह एकदम नर्वस हो जाती और बहुत जोर से हंसने लगती,कभी अचानक रोने लगती,कभी अचानक गालियां और तोडफ़ोड पर उतारू हो जाती,लेकिन मैने अपनी हिम्मत नही हारी,अष्टमी के दिन त्रिमधू से प्रत्यांगिरा का हवन किया और पेठा (एक प्रकार का फ़ल जो पेठा नामकी मिठाई के लिये प्रयोग किया जाता है) की बलि माँ काली को प्रदान की,प्रसाद लडकी को खिलाया,वह बहुत अच्छी तरह से बातें करने लगी और ऐसे लगने लगा जैसे उसे कुछ भी बीमारी नही है।
इस लडकी का पूरा चित्रों सहित विवरण आप इस स्लाइड शो के माध्यम से देख सकते है:-

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