जन्म पत्रिका निर्माण और वरवधू मेलापक

जन्म पत्रिका

जन्म पत्रिका पांच प्रकार की बनाई जाती है,:-

१. सर्वोत्तम जन्म पत्रिका

इस जन्म पत्रिका के अन्दर जन्म विवरण बताया जाता है,जैसे हिन्दी अन्ग्रेजी महिना समय के बारे मे विशेषता,जन्म के समय के लक्षण जन्म के समय जातक का प्रभाव जातक की नाडी योनि और वश्य आदि का भेद बताया जाता है,इसके बाद जातक का टेवा बनाया जाता है,टेवा के अन्दर स्पष्ट ग्रहों का विवरण बताया जाता है,ग्रहों की उदय अस्त की स्थिति बक्री और मार्गी आदि के अंशों का बखान किया जाता है,इसके बाद जन्म चक्र और काल चक्र का भेद लिखा जाता है,जो जन्म लगन कहलाती है फ़िर चन्द्र चक्र बनाया जाता है इसके अन्दर राशि भेद और जातक का वैदिक नामाक्षर का स्थान बताया जाता है,सप्तमेश का प्रभाव बताने मे उसे किन किन क्षेत्रों मे अपने जीवन के पराक्रम को दिखाना पडेगा,नवमांश चक्र के द्वारा बताया जाता है कि जातक के जीवन साथी की जीवन मे क्या स्थिति है,वह शादी के बाद अपने विचार जातक के परिवार के अनुसार बनाकर चलेगा या अपने विचारों को परिवार की मान्यताओं से बाहर लेकर चलेगा,शादी के बाद जीवन साथी के अन्य लोगों से रिस्ते कैसे और किस परिस्थित मे होंगे,वह सदाचारी रहेगा या दुराचारी रहेगा शादी के बाद संतान का क्या फ़लादेश होगा आदि बाते नवमांश से बतायी जाती है,इसके बाद द्वादसांस चक्र के द्वारा पूरे जीवन मे किस समय मे क्या जीवन मे होगा और घटना दुर्घटना का क्या योग रहेगा,जीवन के सभी क्षेत्रों का विचार इस चक्र से किया जाता है,इसके बाद सुदर्शन चक्र के द्वारा एक ही ग्रह के अलग अलग क्या रूप होंगे,जातक अपने लिये क्या होगा,माता के लिये और संसार के लिये क्या होगा अपनी संतान के लिये क्या होगा अपने दादा और समाज के लिये क्या होगा साथ ही जातक के द्वारा धन कमाने की स्थति कहां से होगी वह अपने द्वारा क्या कमा सकता है और संसार के द्वारा उसे कहां से धन कमाने की राहें होंगी,उसे पिता से क्या मिलेगा,दादा परदादा की संपत्ति मिलेगी या नही मिलेगी,होरा चक्र से उसे धन और सम्पत्ति का विस्तार कहां खर्च करने के बाद अधिक या कम मात्रा मे कहां से मिलेगी,ग्रह दशा का प्रभाव बताये जाने में किस ग्रह की दशा मे क्या होगा,उसके लिये कौन सी दशा उत्तम होगी और कौन सी दशा बेकार की होगी,प्रत्यन्तर दशा मे क्या होगा जब एक ग्रह दूसरे ग्रह की शक्ति को लेकर चलेगा तो उसका होने वाला असर क्या होगा,योगिनी दशा मे उसके पास किस प्रकार की शक्ति किस समय में प्राप्त होगी,शनि की साढेशाती का प्रभाव कब शुरु होगा और उसका प्रभाव क्या क्या होगा कब शनि किस ग्रह के साथ क्या क्या करवायेंगे,जातक की कुंडली मे कालसर्प दोष की समीक्षा का वर्णन इस दोष के होने पर उत्तम उपाय क्या क्या होंगे,क्योंकि एक ही उपाय हर जातक के लिये नही होता है,जातक का मांगलिक विचार और उसके उपाय क्या क्या होंगे, जीवन मे सभी ग्रहों का एक दूसरे पर द्रिष्टि का फ़ल क्या क्या होगा,दो ग्रह मिलकर किस प्रकार का प्रभाव उत्पन्न करेंगे,जीवन के अन्दर मुख्य रूप से शनि राहु केतु और गुरु आदि ग्रहों के साथ गोचर करने से क्या क्या फ़ल मिलेंगे,किस समय मे कौन सा ग्रह अन्य भावों में गोचर करेगा और उसके द्वारा क्या क्या फ़ल मिलेंगे,अशुभ ग्रहों का निवारण और पूजा पाठ तथा उनके लिये प्रयोग किये जाने वाले रत्न तथा अन्य उपायों का वर्णन इस प्रकार की पत्रिका में बताये जाते हैं। इस प्रकार की जन्म पत्रिका को लिखने मे दस दिन का समय लगता है,इसलिये इस पत्रिका की दक्षिणा मात्र ५००१ रुपया है.

२. उत्तम जन्म पत्रिका

इस प्रकार की जन्म पत्रिका के अन्दर जन्म विवरण टेवा ग्रह स्पष्ट जन्म चक्र चन्द्र चक्र सप्तांश नवमांश होरा चलित चक्र ग्रहदशा ग्रह अन्तरदशा योगिनी दशा शनि की साढेशाती कालसर्प का शुभ और अशुभ विचार रत्न धारण ग्रहों का संक्षिप्त फ़लादेश ग्रह शान्ति के उपाय बताये जाते है,इस प्रकार की जन्म पत्रिका की दक्षिणा मात्र ३००१ रुपया है.

३. कम्पयूटर द्वारा निर्मित जन्म पत्रिका

इस प्रकार की पत्रिका के अन्दर योग्य सोफ़्टवेयर से जन्म पत्रिका का निर्माण किया जाता है,यह जन्म पत्रिका ग्रहों की आपस की मित्रता को पूर्व लिखित विवरण को प्रकाशित कर पाती है,जैसा कि अक्सर एक ही प्रकार का फ़लादेश सब के लिये किया जाता है,फ़लादेश में ग्रहों की उन्नति या अवनति का प्रकाश मानव बुद्धि से परे होने के कारण यह अक्सर ज्योतिषी से पढवाने पर ही अपना महत्व रखती है,अस्सी पेज तक की जन्म पत्रिका का विवरण प्रकाशित करने की दक्षिणा मात्र १००१ रुपया है।

४. वार्षिक भविष्य-फ़ल

एक साल का पूरा भविष्यफ़ल मय ग्रहों के गोचर और विपरीत ग्रह की शान्ति के उपायों सहित दक्षिणा मात्र १००१ रुपया है।

५. विवाह मेलापक

विवाह के लिये मेलापक में वर और कन्या के अष्टकूट गुण विचार ग्रहों के आपसी सम्बन्ध में जीवन में वर कन्या के लिये होने वाले शुभ और अशुभ प्रभावों का वर्णन किया जाता है। इनके अन्दर वर कन्या का आपसी सामन्जस्य कैसा रहेगा,सन्तान उत्पत्ति मे वर और कन्या के हिस्से मे कितनी सन्ताने है,कितनी सन्तानों की सुरक्षा वर के ग्रह कर पाते है और कितनी सन्तानों की रक्षा कन्या के ग्रह कर पाते है,कब और कौन सी सन्तान वर अथवा कन्या के ग्रह खराब करते है वर और कन्या के आपसी मेल के बाद स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पडता है,दोनो के जीवन को सुखमय जीने के लिये धन का क्या स्थान रहेगा वर और कन्या की पारिवारिक स्थिति क्या रहेगी आदि बातों का विवरण दिया जाता है,इस विवरण के लिये मानव मस्तिष्क से फ़लादेश करने की दक्षिणा मात्र ५०१ है और कमयूटर से बखान करने की दक्षिणा मात्र २५१ रुपया है।

६. जन्म पत्री निर्माण और वरकन्या के मेलापक बनवाने के लिये चाहे गये तथ्य

जातक की कुन्डली को बनवाने और मेलापक को बनवाने के लिये आपके द्वारा जातक या वर और कन्या की अलग अलग जन्म तारीख जन्म का समय जन्म का वर्ष जन्म का स्थान और वर्तमान मे रहने के स्थान की जानकारी जो समुचित रूप से सही हो,को प्रदान करवाना पडेगा,जन्म विवरण सही नही होने की स्थति में गलत फ़लादेश के लिये हम उत्तरदायी नहीं है।

७. जन्म विवरण भेजने के लिये तरीके

आप जन्म विवरण को निम्न लिखित तरीके से भेज सकते है
ईमेल के द्वारा
डाक द्वारा
मोबाइल के द्वारा
बेवसाइट के द्वारा

ईमेल से भेजने के लिये आप इस ईमेल पर जन्म विवरण भेज कर और बेवसाइट पर लिखे एकाउन्ट मे दक्षिणा की राशि जमा करवा कर हमे सूचित करें,विदेश मे जन्म पत्रिका या मेलापक केवल पीडीएफ़ फ़ाइल में बनाकर भेजे जाते है,भारत मे भेजे जाने के लिये कागज पर लिख कर और डाक द्वारा भेजे जाते है,जिसके लिये डाक खर्च अलग से देना होता है। ईमेल है moc.liamg|airuadahbortsa#moc.liamg|airuadahbortsa बेव साइट का पता है http://.astrobhadauria.com मोबाइल नम्बर है +91-9414386494 डाक से विवरण भेजने का पता है Astrobhadauria (Ramendra Singh Bhadauria),37 Panchwati Coloney,NBC Road Jaipur-302006 Rajsthan India.

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