हिन्दी ज्योतिष भाग दो

राशियां

ज्योतिष के अनुसार बारह राशियां प्रतिपादित की गयी है,इनमें मेष राशि जो तकनीकी नाम से जानी जाती है,वृष राशि जो वित्त और खजाने के लिये जानी जाती है मिथुन राशि व्यापार के लिये जानी जाती है कर्क राशि यात्रा और माता के लिये जानी जाती है सिंह राशि राज्य क लिये जानी जाती है और तुला राशि बौद्धिक राशि के नाम से जानी जाती है।वृश्चिक राशि का रूप तकनकी कामो के लिय जाना जाता है धनु राशि का रूप परामर्श और आशीर्वाद के लिये जाना जाता है मकर राशि को कर्म का जंगल कहा जाता है कुम्भ राशि कर्म फ़ल के लिये जानी जाती है और मीन राशि का रूप मोक्ष के लिये जाना जाता है।

मेष राशि

सौरमण्डल की प्रथम राशि है,स्वाभाविक है कि यह महत्वपूर्ण है यह भचक्र की राजधानी है और तकनीकी काम का घर है यह ईश्वर अंश है और मशीन चाहे वह इन्सानी हो या भौतिक रूप से बनी हो पेड पौधे के रूप में हो या किसी भी जीव के रूप मे बनी के नाम से जानी जाती है। इस राशि से क्रियाशीलता के लिये जाना जाता है और कितनी एकता जातक के अन्दर है और किस क्षेत्र की एकता को वह इकट्ठा कर सकता है के लिये इस राशि को समझा जाता है। यह राशि सिर का प्रतिधिनित्व करती है।

वृष राशि

भचक्र की यह दूसरी राशि है जिसका स्वामी शुक्र ग्रह है मुख्य रूप से यह वित्त का रूप बताती है शनि इस राशि के लिये अपना काम करता है आभूषण स्त्री जाति संगीत गीत श्रंगार गणना गणित एवं धन वाले संस्थान आदि के लिये इसे जाना जाता है यह चेहरे का रूप बताती है और जातक को परिवार से क्या मिला है तथा जातक परिवार के लिये कितना समझदार है का अध्ययन इस राशि से किया जाता है।

मिथुन राशि

भचक्र की यह तीसरी राशि है स्वामी बुद्धि का कारक बुध है मुख्य रूप से यह व्यक्ति की सजधज के बारे मे व्यवसाय स्थान के नाम और उसकी पहिचान के बारे मे बताती है,व्यक्ति की भाषा कैसी है उसका बोलने चालने का व्यवहार कैसा है आदि बातों की जानकारी इसी राशि से की जाती है। यह पहिनावा को बताती है।

कर्क राशि

यह भचक्र की चौथी राशि है स्वामी चन्द्रमा जो मन का कारक है यह राशि मुख्य रूप से मां और यात्रा के साथ रहने वाले स्थान के बारे में बताती है,शरीर के अन्दर पानी की मात्रा को भी यह राशि बताते है मन की कारक होने से अगर यह राशि किसी त्रिक भाव मे है तो जातक के मन के अन्दर उसी प्रकार की बाते मानी जाती है।

सिंह राशि

यह भचक्र की पांचवी राशि है इसका स्वामी सूर्य है और सूर्य की गति के अनुसार इस राशि का रूप माना जाता है। इस राशि से पेट का रूप देखा जाता है जातक की बुद्धि का विकास कितना है देखा जाता है,इस राशि के द्वारा राजनीतिक दखल जातक के जीवन में कितना यह भी जाना जाता है।

कन्या राशि

इस राशि का मालिक बुध है और यह भचक्र की छठी राशि है यह राशि रोजाना के कामो के अलावा नौकरी धन की बचत और नौकरों के लिये जानी जाती है जातक के जीवन में किस प्रकार के लिये कर्जा दुश्मनी बीमारी आदि का आना होगा वह किस स्थान से अपने रोजाना के कामो को करेगा और जीवन साथी तथा माता से छोटे भाई बहिनो के लिये वह कितना कार्य करेगा आदि इस राशि से जाना जाता है।

तुला राशि

यह राशि भचक्र की सातवीं राशि है और जातक के बेलेन्स करने वाले क्षेत्र का बखान करती है यह वायु राशि के नाम से जानी जाती है और इस राशि का स्वामी भी शुक्र है। जातक के व्यवहार में बोलचाल में रिस्तेदारी मे और जीवन साथी के प्रति किस बात का बेलेन्स बना रहेगा या इस राशि पर किसी बुरे ग्रह की शक्ति के कारण जातक किस बात मे सोचने समझने में असमर्थ रहेगा आदि बाते इस राशि से समझी जाती है.

वृश्चिक राशि

यह राशि भचक्र की आठवी राशि है और इस का स्वामी मंगल है यह राशि सकारात्मक राशि है जैसे मेष राशि के लिये केवल सोचने का काम माना जाता है तो इस राशि के द्वारा निर्माण किया जाना माना जाता है अगर शरीर मे कोई बीमारी है तो इस राशि के द्वारा शरीर का निर्माण होने या ठीक होने के लिये जाना जाता है इस राशि के प्रति डाक्टर इन्जीनियर और भोजन आदि का काम जानने वाले लोगों के लिये जाना जाता है।

धनु राशि

यह राशि भचक्र की नवी राशि और गुरु का स्थान माना जाता है,इस राशि को भाग्य और भाग्य के निर्माण का घर भी कहा जाता है इस राशि से जातक के न्याय धर्म और समाज के बारे मे भी जाना जाता है यह गुरु की सकारात्मक राशि है.

मकर राशि

यह भचक्र की दसवी राशि कही जाती है शनि इस राशि का मालिक है और कर्म के लिये यह राशि आजीवन अपने असर को जातक के लिये प्रदान करती है।

कुम्भ राशि

यह भी शनि की राशि है और यह भचक्र की ग्यारहवी राशि है तथा कर्म फ़ल के मिलने वाले स्थान के बारे मे सूचित करती है जैसे कर्क लगन वालो के लिये यह राशि आठवें भाव मे है तो जातक कमाने के लिये तकनीकी और कमन्यूकेशन के काम से कमाने की कला को जानने वाला होगा लेकिन वह अपने बडप्पन से दूर भागेगा उसके लिये बदनामी और बरबादी के कारणो में उसके खुद के दोस्त ही कारण बनेंगे.

मीन राशि

यह राशि भचक्र की बारहवी राशि है इसके स्वामी भी गुरु है और यह राशि मोक्ष के लिये मानी जाती है,इस राशि के स्वभाव के लिये जाना जाता है कि जातक के लिये यह यात्रा और शान्ति के स्थान को बताती है,जैसे यह राशि अगर कर्क राशि के नवे भाव मे है तो जातक पिता के ननिहाल से अपने जीवन को उठाना शुरु करेगा और पिता के दुश्मनो और दिक्कत देने वाले लोगों के प्रति ही वह आस्था रखेगा इससे पिता के तौहीन ही मानी जा सकती है।

बारह भाव

प्रथम भाव

इसे लग्न कहते है जातक का स्वास्थ्य लक्षण आकृति रंग चर्म सुख दुख स्वभाव धन केश एवं आय आदि की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

द्वितीय भाव

यह धन भाव है परिवार दक्षिण नेत्र नाखून क्रय विक्रय शिक्षा आंख आभूषण वाणी भोजन कपडा आय जिव्हा नाक दांत गाल धन संचय मित्रता नव अन्न आदि का विचार किया जाता है।

तृतीय भाव

यह पराक्रम का भाव है अनुज यात्रा दायां कान कालर बोन कंधा स्नायु मंडल युद्ध पडौसी लेखन फ़ैसन दिखावा आदि के लिये माना जा सकता है.

चतुर्थ भाव

यह सुख स्थान है मां स्थायी सम्पति वाहन भवन कृषि उपवन जल सुरंग रक्त भैंस गाय घोडा हाथी भूमि गडा धन शिक्षा ह्रदय आदि का विचार किया जाता है।

पंचम भाव

यह स्थान सन्तान के लिये जाना जाता है बुद्धि का कितना विकास हो सकता है बुद्धि पर किस ग्रह या राशि का प्रभाव पड रहा है आदि के द्वारा समझा जाता है गर्भ में क्या है कला की जानकरी कितनी विद्या दूसरों को परामर्श के लिये है कविता रचना शेयर बाजार मूवी देखना भविष्य के प्रति सोच रखना कपडे का धारण करने का स्वभाव हाथों की बनावट प्रेम सम्बन्ध प्लान बनाने का कार्य बुद्धि से सही दिशा का चयन आदि इसी भाव से देखे जाते है।

छठा भाव

इस भाव से रोगो के बारे मे जाना जाता है भय शत्रु कर्ज डाक्टरी विद्या कानूनी शिक्षा नौकर पालतू जानवार चोट युद्ध जडी बूटी उबला चावल ऊंट कमर चाचा मामा पेशाब स्थान आदि के बारे में विचार किया जाता है,बैंक में जमा किया जाने वाला धन और कमाये गये धन की बचत आदि के बारे में भी यह भाव बताता है।

सातवां भाव

यह स्थान पति या पत्नी के बारे में बताता है जीवन के प्रति की जाने वाली साझेदारी मुकद्दमा आदि में विरोधी पक्ष की शक्ति राय लेने वाले की शक्ति स्त्री पुरुष के सम्बन्ध चोरी का माल पान फ़ूल दाल जनता जो मानसिक रूप से साथ रहने वाली है,रज या वीर्य की मात्रा जो शरीर में है,विदेश जाने का प्रभाव याददास्त भूलना ठेके लेने वाला काम आदि इसी भाव से जाना जाता है।

आठवां भाव

गम्भीर रोगों के बारे में जानकारी दुर्गा की पूजा कुत्ता सांप ससुराल कर्ज के द्वारा होने वाला अपमान भूत प्रेत शाकिनी डाकिनी का प्रभाव नजर दोष मृत्यु के बाद मिली सम्पत्ति की जानकारी बीमा आदि से प्राप्त धन पीछे के बचत के द्वारा मिलने वाला धन कसाई वाले काम करना आदि इसी भाव से जाना जाता है अक्सर मौत के भाव से भी इसे जाना जाता है।

नवां भाव

इस भाव को पिता के नाम से भी जाना जाता है सामाजिकता का प्रभाव भी इसी भाव से जाना जाता है धर्म और कानून के लिये भी इस भाव की सहायता लेते है विदेश यात्रा के बारे में भी इस भाव को जाना जाता है उच्च शिक्षा को भी इसी भाव से देखा जाता है,तीर्थयात्रा के बारे में पुत्री की सन्तान को दया करुणा देश प्रेम और त्याग आदि के बारे में भी जाना जाता है।

दसवां भाव

यह कर्म स्थान यश नौकरी व्यवसाय कर्म क्षेत्र राज्य लोकसभा सांस घुटना पीठ की हड्डी आसमान मन्त्र जाप अध्यापन करना राज्य से यश मिलना पुरस्कार अधिकार सफ़लता नैतिकता आदि का विचार इसी भाव से जाना है।

ग्यारहवां भाव

यह कर्म फ़ल के नाम से जाना जाता है,इस भाव से जो भी जीवन के कर्म किये जाते है उनके प्राप्त होने का भाव कहा जाता है। यह भाव बडे भाई बहिनो के लिये भी जाना जाता है तथा पिता के रहन सहन के लिये भी माना जाता है,माता के अपमान मृत्यु और जोखिम के कामो के लिये भी जाना जाता है। इस भाव के स्वामी का बली होना भी जीवन मिलने वाले फ़लों के अन्दर अच्छा या बुरा फ़ल मिलने वाली बात जानी जाती है।

बारहवां भाव

यह भाव कर्म फ़ल को खर्च करने वाला भाव कहा जाता है। इस भाव के द्वारा जो भी कर्म किये जाते है उनके खर्च करने से मिलने वाले दुख और सुख के लिये भी माना जाता है। इस भाव को यात्रा खर्चा जेल और गूढ ज्ञान के लिये भी जाना जाता है। इस भाव को माता के धर्म और जातक के पूर्वजों के मकान का भी देखना होता है।

हिन्दी ज्योतिष भाग 3

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