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Meaning of Astrology ज्योतिष का मूल्यांकन

A capable astrologer sees birth chart and tells about past present and future.In astrology Saturn Rahu ketu makes sense about past life.Mainly Jupiter is the head of life,because living beings are defined by Jupiter.Maharishi Parashar Saw about past by the method of Dreshkan. To see about past Sun and Moon also helps.find meaning about Pitrulok or Chandra Lok by the Moon and Venus.Sun and Mars creates Pruthvi Loka.Rishi's define that if Jupiter in sixth,8th or 12th house,it should be good for next birth.Through the helps of fifth house and Saturn defines past life.Sun in fifth house means dosha of Pitru,Moon means Matru,Mars means Bhratru,Venus means Jayatru and Saturn with Rahu means dosha by Sun.Jaapa and Donations good for removing doshas.Rishi's thoughts about Gems and Mani as business.We find all those done in past.We are making karma in present,we find sure in future.By the making truthful karma,results of karma will be good in future.
एक योग्य ज्योतिषी कुंडली को देखकर भूत वर्तमान और भविष्य का कथन कर सकता है। ज्योतिष में शनि राहु केतु से गत जीवन का विचार किया जाता है,विशेष रूप से गुरु की प्रधानता मानी जाती है,क्योंकि जीव की संख्या गुरु से ही दी गयी है। गत जीवन के बारे में महर्षि पाराशर ने द्रेषकाण से जानने की विधि बतायी है।सूर्य और चन्द्रमा से भी पीछे के जीवन की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। चन्द्र शुक्र को चन्द्र लोक या पितृ लोक माना गया है। सूर्य और मंगल पृथ्वी लोक का निर्माण करते है। ऋषियों का कथन है कि गुरु अगर छ: आठ या बारहवें भाव में है तो अगले जन्म का रूप बहुत ही अच्छा होता है। पांचवे भाव और शनि से पिछला जीवन देखा जाता है,पांचवे भाव में सूर्य हो तो पिता का चन्द्र हो तो माता का मंगल हो तो भाई का शुक्र हो तो स्त्री का और शनि के साथ राहु हो तो सूर्य के श्राप से जीवन में दोष होता है। इस हेतु जाप और दान करना श्रेष्ठ माना जाता है,रत्न और मणियों को ऋषियों ने व्यापार बताया है। कर्मफ़ल अवश्य प्राप्त होगा। अत: जो हम वर्तमान में कर रहे है वह आगे जरूर प्राप्त होता है इसलिये सात्विक तरीके से अपने कार्यों को करने से आगे का कर्म फ़ल अच्छा मिलने की बात बतायी गयी है।

सूर्य क्यों जल रहा है ?Soory Kyon Jal Rahaa hai

सूर्य तारागणों के मध्य है। सभी तारों का आकर्षण सूर्य के चारों ओर है। सभी सूर्य की परिक्रमा लगा रहे है। भ्रमण काल में जो चुम्बकीय क्षेत्र बन रहा है वह सूर्य को तारों की तरफ़ से लगातार प्रदान किया जा रहा है। भ्रमण काल में जो गति ग्रह की बनती है उसी के अनुसार सूर्य को ईंधन के रूप में चुम्बकीय रूप से ईंधन की प्राप्ति हो रही है और सूर्य उसी गति से अधिक से अधिक जल रहा है। जैसे हाड्रोजन और आक्सीजन मिलकर पानी का रूप धारण कर लेती है,लेकिन पानी से हाईड्रोजन निकलकर जब सूर्य की तरफ़ जाती है तो वह सूर्य में अपना आस्तित्व खो देती है,बदले में सूर्य हाड्रोजन को लेकर प्रकाश और ऊर्जा को प्रदान करता है। सभी ग्रहों पर अपने अपने अनुपात के अनुसार हाड्रोजन की उपस्थिति है,वह जितनी अधिक मात्रा में सूर्य की तरफ़ जा रही है उतनी मात्रा में ही सूर्य अपनी ऊर्जा को अन्य ग्रहों के लिये प्रदान कर रहा है।

ग्रहों के नाम Grahon ke naam

क्रम ग्रह अंग्रेजी नाम फ़ारसी नाम
1 सूर्य Sun आफ़ताब
2 चन्द्र Moon माहताब
3 मंगल Mars मिर्रीख
4 बुध Mercury उतारूद
5 गुरु Jupiter मुश्तरी
6 शुक्र Venus जुहरा
7 शनि Saturn जुहल
8 राहु Dragon's Head रास
9 केतु Dragon's Tail जनव

राशि चक्र

सूर्य स्थिर है और सभी ग्रह इसकी परिक्रमा करते है एवं प्रकाश प्राप्त करते है। चन्द्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है। जिस मार्ग पर पृथ्वी भ्रमण करती है उसे सूर्य का कांति वृत कहा जाता है।यह अण्डाकार है। पृथ्वी एक वर्ष में बारह राशियों में भ्रमण करती है (इसे सूर्य का भ्रमण माना जाता है).बारह राशियां तीस तीस अंश की मानी गयी है। इन राशियों के १३’२० अंश का भाग करने पर २७ बराबर के भाग बने है वही नक्षत्र की श्रेणी में गिने जाते है।

ग्रह और उनके तत्व

१.सूर्य और मंगल अग्नि तत्व की मीमांसा करता है.
२.बुध पृथ्वी तत्व की मीमांसा करता है.
३.शनि और राहु हवा तत्व की मींमासा करते है.
४.गुरु ईथर तत्व की मीमांसा करता है.
५.शुक्र और चन्द्र पानी तत्व की मीमांशा करते है.
गुरु सूर्य और चन्द्र सात्विक है बुध शुक्र राजसी है और शनि मंगल राहु केतु तामसिक है।

मनुष्य जीवन पर प्रभाव Manushy Jeevan Par Prabhaav

मनुष्य का स्वभाव एवं कर्म इन्ही तत्वों पर निर्भर है। जन्म के समय जो ग्रह प्रभावी होता है उसी के अनुसार व्यक्ति का स्वभाव बनता है। ईथर का प्रभाव अधिक हो और लगन पर सीधा प्रभाव पडता हो तो जातक धर्मी होगा ज्ञानी होगा और हमेशा कार्य में लगा रहने वाला होगा। सूर्य मंगल राहु का प्रभाव लगन पर हो तो व्हक्ति दुबला होगा लम्बा होगा क्रोधी होगा और समय समय पर धन को नष्ट करने वाला होगा।वह सदाचार और कुलाचार से दूर होगा,यानी वह हमेशा तामसी चीजों की तरफ़ भागता रहेगा उसके कुल के अन्दर को मर्यादा होगी उससे वह दूर ही होगा। बुध के पृथ्वी तत्व के प्रभाव से जातक बच्चों जैसा व्यवहार करता है,उसे नये कपडे मकान और नये नये सामान की जरूरत रहती है,पानी के तत्व से पूरित चन्द्र और शुक्र का प्रभाव जब जातक पर पडता है तो वह अपने अनुसार भावनाओं को प्रदर्शित करने वाला कलाकार गायक या सामाजिक होता है। हवा तत्व का प्रभाव होने से जातक दुबला कल्पनाशील विद्वान और दानी स्वभाव का होगा जैसी जमाने की हवा होगी उसी के अनुसार अपने को चलाने वाला होगा लेकिन लापरवाह भी होगा।

ग्रहों के कारकत्व Grahon Ke karakatwa

भाव सूर्य चन्द्र मंगल बुध गुरु शुक्र शनि राहु केतु
1 पीडा पीडा पीडा कान्ति कान्ति कीर्ति भ्रम संचालन इकलौता
2 नेत्रदुख द्विविवाह वाचाल कर्जाई द्विसम्बन्ध बहुविवाह धनहीन नेत्ररोगी नौकर
3 अहम गृहत्यागी बन्धुहीन गायक ज्ञानी सजीला मन्दगति जुझारू सहायक
4 लकडाहारा भावुक क्लेशी किरायेदार विदेशी कामी निर्दयी शंकालु धोखेबाज
5 राजसी बहुपुत्री पुत्रहीन गणितज्ञ शिक्षक रसिया दुखी सर्प कुलद्रोही
6 गरीब प्रयासहीन सिरफ़ोडा मधुर कर्जाई स्त्रीविरोधी मेहनती जासूस पेटरोगी
7 द्विविवाह छलिया कर्कस कुलद्रोही द्विविवाह बहुविवाह अविवाहित वैश्यावृत्ति नि:सन्तान
8 ह्रदयरोगी तकनीकी बन्धुविरोधी कपटी तांत्रिक विदेशी गरीब ठंडीमौत लंगडा
9 राजनीतिज्ञ सामाजिक कानूनी जगतगुरु लक्ष्मीपुत्र धार्मिक ज्योतिषी इकलौता भंडारी
10 राजसेवक पितृहीन तांत्रिक राजयोगी पत्नीघातक अविवाहित भंडारी सहायक गणक
11 ठग कंजूस द्रोही धनी ज्ञानी दुखी न्यायी ठग कुलहीन
12 अन्धा भूतसेवी गुस्सैल छनकबुद्धि समाजसेवी सुखी विदेशी डरपोक निडर

ग्रहों के रंग रत्न और धातु Grahon Ke Rang aur Dhatu

क्रम ग्रह कपडे का रंग धातु रत्न उपरत्न
1 सूर्य केशरिया तांबा माणिक्य लाडली
2 चन्द्र सफ़ेद चांदी मोती मून स्टोन
3 मंगल लाल तांबा मूंगा लाल हकीक
4 बुध हरा स्वर्ण पन्ना जेड
5 गुरु पीला स्वर्ण पुखराज सुनहला
6 शुक्र सफ़ेद स्वर्ण हीरा जिर्कान
7 शनि काला रांगा नीलम काकानीली
8 राहु नीला लोहा गोमेद तुरमुली
9 केतु धारीदार पंचधातु लहसुनिया सुलेमानी

आयु गणना में ग्रहों की रश्मियां Ayu Ganana me Grahon Ki Rashmiyan

सूर्य= पांच साल
चन्द्र = इक्कीस साल
मंगल = सात साल
बुध = नौ साल
गुरु = दस साल
शुक्र = सोलह साल
शनि = चार साल
राहु = चार साल
केतु = इकतालीस साल

ग्रहों के लिंग भेद

पुरुष ग्रह सूर्य मंगल गुरु
स्त्री ग्रह शुक्र चन्द्र राहु
नपुंसक ग्रह बुध शनि केतु

ग्रहों का शरीर में स्थान

सूर्य हड्डी और पेट का कारक है,चन्द्रमा रक्त के पतलेपन और ह्रदय का कारक है,मंगल सिर और रक्त का कारक है,बुध चमडी का कारक है,गुरु शरीर में चर्बी का का कारक है,शुक्र वीर्य और रज का कारक है,शनि रोम और बाल तथा बाह्य त्वचा का कारक है,राहु विचारों के आने का कारक है और केतु विचारों को व्यक्त करने के साधनों का कारक है।

ग्रह और उनके द्वारा आयु निर्धारण Grahon ke dwara aayu nirdharan

सूर्य पचास साल,चन्द्रमा सत्तर साल,मंगल दस साल बुध बीस साल गुरु तीस साल शुक्र सात साल शनि सौ साल उम्र के लिये जाना जाता है राहु केतु इन वर्षों को घटाने और बढाने वाले है.

ग्रहों की मनपसन्द जगह Grahon kee manpasand jagah

सूर्य राजदरबार और जंगल में निवास के लिये माना जाता है चन्द्रमा पानी के किनारे वाले स्थानों में अपना स्थान बनाता है मंगल लडाई के मैदानों में अपना स्थान बनाता है तथा पथरीला रेतीला स्थान अपने लिये चुनता है,बुध हरे भए मैदान बाग पहाडी क्षेत्र के तराई वाले स्थान और बस्तियों के बीच में अपना स्थान बनाता है,गुरू धन स्थान में अपना स्थान बनाता है और रईसों की रिहायस में रहने के लिये जाना जाता है,शुक्र का स्थान सजीले और चमक दमक वाले स्थान माने जाते है शनि के लिये कार्य करने वाले लोगों के बीच यानी मजदूर बस्तियों में तथा गन्दे स्थानों मे रहना माना जाता है राहु के लिये शमशानी स्थान माने जाते है और केतु के लिये कबिर्स्तानी स्थान तथा पुल और पानी के ऊपर रहने वाले मकानो में रहने के लिये माना जाता है।

ग्रहों की जातियां Grahon ki jatiyan

सूर्य और मंगल क्षत्रिय है,लेकिन बुध के साथ होने से खून में दोगलापन आजाता है,चन्द्र बुध व्यापारी है लेकिन सूर्य मन्गल के साथ आने से भी दोगलापन आजाता है शनि राहु केतु नौकर और शूद्र की श्रेणी में आते है लेकिन अन्य ग्रहों के साथ आने से मिला जुला शंकर वर्ण बन जाता है गुरु शुक्र से ब्राह्मण वर्ण बनता है लेकिन बुध इनकी भी जाति में वर्ण शंकर का भेद पैदा करता है.

ग्रहों के द्वारा असर देने का समय Grahon ka asar dene kaa samay

सूर्य पूरे छ माह असर देता है चन्द्रमा केवल चौबीस मिनट का असर देता है,मंगल एक दिन का असर देता है बुध एक ऋतु का असर देता है गुरु एक माह का असर देता है शुक्र पन्द्रह दिन का असर देता है शनि एक साल के लिये अपना असर देता है यह असर अक्सर अच्छे और बुरे दोनो कामो के अन्दर देखा जाता है।

हिन्दी के लिये दूसरा पन्ना

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