पांचवें भाव के गुरु के उपचार

पंचम भाव का स्वामी सूर्य होता है,और सूर्य के घर में गुरु के रहने का मतलब होता है,कि पिता का काम किसी न किसी प्रकार से शिक्षा से जुडा होता है,कुन्डली में अगर सूर्य भारी होता है,तो राजनीतिक शिक्षा का प्रभाव देता है,या सरकारी शिक्षक के रूप में पिता का व्यवसाय होता है,चन्द्र से जुडा होता है,तो कृषि या जडी बूटी से जुडे काम होते है,और पिता को इनकी शिक्षा का काम करना होता है,या फ़िर यात्रा वाले कामों के करने के बाद गाइड का काम करना पडता है,मंगल होता है,तो डाक्टरी या इन्जीनियरिन्ग या फ़िर होटल वाले या पुलिस वाले अथवा सेना से जुडे शिक्षा वाले काम होते है,इसी तरह से अन्य ग्रहों के द्वारा अपना अपना असर देने के बाद कार्य या व्यवसाय पिता के लिये जाने जाते है,पंचम के प्रभाव सीधे तरीके से संतान,शिक्षा,जल्दी से कमाये जाने वाले धन,खेलकूद और मनोरंजन के क्षेत्र में काम करने वाले स्थानों के अलावा पत्नी या पति,साझेदारी के काम,नौकरी से मिलने वाले धन,बैंक और किसी होटल आदि में किये जाने वालों के अलावा अस्पताल और सेवा वाले संस्थानों के अन्दर किये जाने वाले कामो के बदले में मिलने वाले धन तथा ऋणों आदि के द्वारा जीवन पर परेशानियों का समय आता है.इसके अलावा पंचम का गुरु सीधे रूप से धर्म और भाग्य पर अच्छा या बुरा असर देता है,पूर्वजों की इज्जत पर अगर खराब असर देता है,तो जरा सी देर में दाग लगा देता है,संसारी मित्रों के द्वारा दिये जाने वाले प्रभाव का सीधा असर इसी गुरु के द्वारा जाना जा सकता है,बडे भाई और बडी बहिन का प्रभाव भी इसी गुरु के द्वारा देखा जा सकता है,पिता के द्वारा किये जाने वाले धन का असर भी इसी गुरु से देखा जाता है,राजनीति में जाने और चुनाव में हारने जीतने का प्रभाव भी इसी गुरु से देखा जाता है,इसके बाद जातक के स्वभाव और शरीर पर पडने वाले प्रभाव मे गुरु का स्थान बहुत ही महत्व पूर्ण माना जाता है,अगर इस स्थान का गुरु किसी तरह से गलत असर देता है,तो जातक को किसी प्रकार का दान स्वीकार नही करना चाहिये,यहां तक कि पंचम गुरु वाले व्यक्ति को मंदिर या धर्म स्थान से मिलने वाले प्रसाद को भी ग्रहण नही करना चाहिये,किसी से किसी भी प्रकार कोई मुफ़्त की वस्तु को नही लेना चाहिये,चाहे वह किसी प्रकार के व्यवहार में ही क्यों न मिले,सिर की चोटी को कभी नही कटवाना चाहिये,जो भी धार्मिक लोग होते है,धर्म के प्रवचन आदि देते है,या गेरुये वस्त्र पहिन कर घूमते है,उनका कभी उपहास या उनकी बददुआ नही लेनी चाहिये,जो भी धर्म स्थान होते है चाहे वे किसी भी धर्म से क्यों न जुडे हों उनकी साफ़ सफ़ाई के अन्दर अपना योगदान देना चाहिये,इस प्रकार से की जाने वाली छोटी छोटी बातों से गुरु का प्रभाव माफ़िक आता चला जाता है.

छठे भाव के गुरु के उपचार

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