चौथे भाव के गुरु के उपचार

चौथा भाव माता मन मकान और पानी के साधनो के साथ आपस में जुडे लोगों से भी होता है,चौथे भाव का सीधा सम्बन्ध आठवे और बारहवें भाव से होता है,इसी चौथे भाव को लालकिताब कारों ने एक कहावत से जोडा है,वह कहावत है,"पौ बारह होना",इस भाव के प्रभाव से ही जातक को मुफ़्त की सम्पत्ति या उपाधि से, आठवें भाव का फ़ायदा होता है,और फ़िर वह सुख से बारहवें भाव का शान्ति से जीवन जीता है,चौथे भाव का गुरु अपनी तीसरी नजर से छठे भाव को देखता है,यह भाव कर्जा दुश्मनी बीमारी से जुडाव रखता है,फ़िर इसकी नजर आठवें भाव में होने से अपमान और मृत्यु के साथ किसी भी जोखिम में जाने का जातक मानस बन जाता है,अथवा किसी प्रकार से छुपे हुये रहस्य को जानने का प्रयास करता है,पिता के बडे भाइयों और बहिनों के द्वारा या तो पाला जाता है,या फ़िर अपेक्षा की जाती है,माता के परिवार के द्वारा या तो भलाई की जाती है,या फ़िर पालपोष कर उपेक्षा की जाती है,संतान के नाम पर या तो केवल पुत्री ही होती है,या फ़िर पुत्री के भाग्य के लिये आजीवन जूझना पडता है,जनता के अन्दर अपना नाम कमाने के चक्कर मे अपने को साहित्यिक जीवन से जोडा जाता है,और अधिक से अधिक अपनी धर्म और भाग्य की सराहना के चक्कर में अपना समय निकाला जाता है,तीसरा भाव लेखन का होता है,और उससे दूसरा गुरु होने के कारण लेखन के द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से धन को कमाने और पुरस्कार प्राप्त करने का मानस बनता रहता है,अपनी नवीं नजर के चलते यह गुरु अपने समय में या तो हवाई यात्रायें करवाता है,या फ़िर ध्यान समाधि के लिये अग्रसर करता है,अधिकतर इस भाव का गुरु किसी प्रकार से अपनी औकात ओ बैंकिन्ग से सम्बन्ध रखता है,या फ़िर बैंकों को अपना ब्याज देकर अपना घर द्वार आदि सब गिरवी रख कर अपना जीवन निकालता है.इस भाव का गुरु चन्द्रमा के घर में होता है,और चन्द्रमा से गुरु शिष्य का नाता होने से तथा चन्द्रमा के द्वारा गुरु के साथ विश्वासघात करने के कारण चन्द्रमा को गुरु का मानसिक दुश्मन माना जाता है,चन्द्रमा की सहायता नही मिलने के कारण जातक को मंगल की सहायता अन्दरूनी तरीके से लेनी पडती है,और किसी प्रकार की बीमारी से बचने के लिये ह्रदय आदि की बीमारियों के लिये या सांस सम्बन्धी बीमारियों के लिये जातक को अपने अन्दरूनी भागों पहिनने वाले कपडों मे लाल रंग का एक निशान लगाने से फ़ायदा मिलता है,साथ ही अपने से बडों की सेवा करनी चाहिये,और अपने को नहाने के बाद या स्त्री जातक बाल खोल कर किसी के सामने नही जाने चाहिये,इस प्रकार से बचाव करने के बाद ही गुरु का प्रभाव कम हो सकता है.अक्सर अपने शरीर का प्रदर्शन करने वालों को चौथे गुरु के दुष्प्रभाव से जूझना पडता है,उनको नजर जल्दी लगती है.

पंचम भाव के गुरु के उपचार

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