तीसरे भाव के गुरु के उपचार

तीसरे भाव का गुरु बुध के घर में होता है,और बुध के घर मे होने के कारण जातक का पराक्रम बातों से होता है,जातक के द्वारा किया जाने वाला पराक्रम ही तीसरा घर दर्शाता है,तीसरे गुरु के कारण जातक का पराक्रम दिखाने का कारण या तो धर्म से जुडा होता है,या फ़िर वह धार्मिक बातें करता है,उसके रहने वाले स्थान और आसपास के माहौल में धर्म की भावना फ़ैली होती है,इस भाव के गुरु के लिये अगर वह कोई गलत परिणाम देता है,किसी प्रकार की धार्मिक भावना को आहत करता है,किसी प्रकार के चालचलन में खराबी करता है,कहीं से शुक्र का समावेश हो गया है,और अपने पति या पत्नी के अलावा किसी प्रकार से अन्य अनैतिक सम्बन्धों की तरफ़ ध्यान चला गया है,या फ़िर किसी प्रकार से दिमाग में वर्तमान में पहले से चले आ रहे रिस्तों के अन्दर अपने हाव भाव को प्रदर्शित करने का मानस और लालसा बनी रहती है,और शास्त्रों को जानने के बाद भी जातक जीन और पेंट पहिनने का आदी है,पूजा करने बाद भी उसके अन्दर आमिष खाना खाने की आदत बनी हुई है,वह अपने को धार्मिक रूप से बना ठना कर केवल पूजा पाठ का ढोंग करता है,तो मान लेना चाहिये कि वह गुरु से प्रताडित किया जा रहा है,इस लिये उसे बुध का सहारा लेना जरूरी है,बुध का सहारा लेने के लिये दुर्गा पाठ करना बहुत ही उत्तम साधन माना गया है,दुर्गा पाठ के लिये दुर्गा सप्तशती का पाठ बहुत ही उत्तम साधन माना जाता है,रोजाना घी का दीपक जला कर दुर्गा की तस्वीर को दक्षिण की तरफ़ देखती हुई रखकर अपना मुंह उत्तर की तरफ़ रख कर और सफ़ाई पूर्वक दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिये,इसके अलावा जो भी लोग परिवार के बुजुर्ग है,या अपने से बडे है,और वे अगर किसी बात को करने के लिये कहते है,तो उसे करना जरूरी होता है,इस गुरु के कारण व्यक्ति के अन्दर बडों की बात काटने का मानस अधिकतर बनता रहता है,और बुजुर्ग लोग जातक की बात का बुरा मान कर उसे किसी न किसी प्रकार से बद दुआयें दिया करते है,समय आने पर वे बददुआयें जातक पर हावी हो जाती है,और जातक का बुरा होने लगता है,इसलिये जातक को कभी भी बडों की बात की अवहेलना नही करनी चाहिये,और उनकी हर बात को शिरोधार्य करनी चाहिये.

चौथे भाव के गुरु के उपचार

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