दूसरे भाव के गुरु के उपचार

दूसरा भाव धन और कुटुम्ब का होता है,इस भाव में गुरु के होने पर गुरु जो कि आध्यात्मिक शक्तियों का राजा होता है,का भाव भौतिक चीजों में चला जाता है,लालकिताब के अनुसार गुरु जो जीव का कारक है,एक धन और भौतिक साधनो में उलझ कर रह जाता है,अक्सर जब कुप्रभाव देता है,तो साक्षात रूप से रहने वाले स्थान के आसपास के रास्तों पर उलझने बन जाती है,घर से निकलने पर डर लगता है,जानपहिचान के लोग और पडौसी घर के मुख्य दरवाजे पर कोई न कोई अडचन बना डालते है,दूसरे भाव के गुरु का ध्यान केवल धन और भौतिक साधनो की तरफ़ जाने के अलावा वह अपने रहने वाले स्थान को और अपने घर को ही देखता है,अपने जान पहिचान वाले लोगों पर अपना प्रभाव डालने के लिये घर को ऊंचा बनाता है,उसे कर्जा दुश्मनी और बीमारी को पनपाने और निकालने का ज्ञान होता है,माता के छोटे भाई बहिनो के पास उसका आना जाना रहता है,पिता के परिवार का मुखिया बनना चाहता है,इस भाव का गुरु दादा के बारे में सूचना देता है,कि वे एक संसारी शिक्षक थे,बडे भाई या बडी बहिन को किसी प्रकार के बैंकिन्ग या घरेलू धन के बारे में कार्य रूप से करने के बारे में बताता है,पत्नी को या पति को दो भाइयों के होने के बारे में जानकारी देता है,पत्नी या पति को किसी मृत्यु के बाद के बाद प्राप्त धन को भी सूचित करता है,किसी प्रकार से पति या पत्नी को बीमा से प्राप्त धन के बारे में भी सूचित करता है,शमशानी ताकतों के साथ सामजस्य बनाने की बात भी बताता है,अपमान मृत्यु और जानजोखिम के कामों में अपने को लगाये रहने की बात भी बताता है,उन जानकारियों के बारे में भी ज्ञान देता है,साझेदार या जीवन साथी के द्वारा छुपी हुई रहस्यात्मक और शमशानी ताकतों को अपने बस में करने की योग्यता रखता हो,इस भाव के गुरु का कुप्रभाव अगर किसी प्रकार से जीवन में समझ में आ रहा हो तो,अपने आसपास के रहने के स्थान पर किसी प्रकार की कोई रंजिस है,तो उसे दूर करने का उपाय करना चाहिये,अगर कोई पडौसी किसी प्रकार से बुराई मान कर बैठा है,और अपनी बातों को इधर उधर बिना किसी कारण के फ़ैला रहा है,तो उससे उन बातों को सुन कर लडाई झगडा या वैमन्स्यता नही करनी चाहिये,अपने सामने के रास्ते को साफ़ और स्वच्छ रखना चाहिये,जिससे आने जाने वाले निवास के प्रति कोई गलत धारणा बनाकर नही चलें,इसी बात का अभिप्राय: लालकिताब में बताया गया है,कि अपने सामने की सडक के खड्डों को भर कर रखना चाहिये,इसका अभिप्राय: अक्सर लोग सडक के खड्डों को भरने के लिये ही प्रयुक्त करते है,जबकि लालकिताब का हर अभिप्राय किसी न किसी रूप से दूसरे रूप में बता कर समाज या अपनी भलाई के लिये बताया गया होता है.दूसरा उपाय इस भाव के गुरु के लिये बताया गया है,कि माथे पर केसर या हल्दी का तिलक लगाना चाहिये,यह एक आयुर्वेदिक उपाय है,दूसरे भाव के गुरु को माथे पर हल्दी के या केसर के रूप से लगाने पर दोनों आंखों के बीच में जो मन को साधने वाली इन्द्रिय है,जिसे अपने को हर प्रकार से फ़ैले हुये कारणों को एकत्रित करने का प्रमुख उपाय है,इस प्रकार से अपने दिमाग में मानसिक सबलता और लक्ष्य की प्राप्ति में सहायता मिलती है.

तीसरे भाव के गुरु के उपचार

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