गुरु के उपचार

गुरु के द्वारा सही फ़ल नही देने की स्थिति में अगर सामान्य उपचार किये जायें तो वह बहुत अधिक दिये जारहे गलत फ़लों के अन्दर कुछ कमी कर लेता है,और सामान्य सहायता मिलने पर जातक को डूबते को तिनके का सहारा मिलने जैसी बात मिल जाती है,हिम्मत के बढने पर जातक अन्य सम्यक उपायों के द्वारा अपने जीवन को सुखी बना सकता है.

लगन में गुरु के उपचार

गुरु अगर किसी प्रकार गले वाली बीमारियां,सांस लेने मे दिक्कत,पानी का निगलना और भोजन के अन्दर निगलने में परेशानी,शादी विवाह में दिक्कत,छोटे भाई बहिनो पर पडने वाली मुशीबतें शिक्षा के प्रति आलस,जीवन साथी की परेशानियां,और भाग्य का काम नही करना,धर्म से अरुचि होने की स्थिति में पूर्वजों के नाम के आगे बट्टा या पैतृक सम्पत्ति में परेशानी मिलने पर गुरु के सामान्य उपचारों से शान्ति मिलती है,लेकिन शान्ति मिलते ही सम्यक उपचारों की तरफ़ ध्यान देना जरूरी होता है,साधारण उपायों में गुरु के लिये सबसे पहले पितृ ऋण को उतारने का उपाय करना चाहिये,किसी से किसी प्रकार का दान या गिफ़्ट नही लेनी चाहिये,केवल अपने कर्म और अपने भाग्य पर ही भरोसा करके चलना चाहिये,पितृ ऋण को उतारने के लिये परिवार के जो भी सदस्य है,सबको साथ लेकर किसी मन्दिर या धर्म स्थान पर जाना चाहिये और सभी सदस्यों से पूर्वजों के नाम का जो भी बन पडता है,धर्म स्थान पर आने वालॊ के लिये सुविधाओं का बन्दोबस्त करना चाहिये,लगन के गुरु का दुष्प्रभाव तब और बढ जाता है,जब व्यक्ति देने के बजाय लेने के लिये हाथ फ़ैलाने लगता है,लगन का गुरु केवल लोगों को देने के लिये ही संसार में भेजता है,और जातक जितना देता है,उतना ही ईश्वर उसके पास भेजता है,और जितना किसी के सामने हाथ फ़ैला कर लेता है,उससे कई गुना किसी न किसी कारण से चला जाता है.

दूसरे भाव के गुरु के उपचार

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