फ़लादेश

शनि-रहु=निरर्थक यात्रा
चन्द्र-राहु=अशान्त मन,कला समाज में कमी
शनि-चन्द्र=कार्य में यात्रा
शुक्र-राहु=बृहद धन,बडा भवन,बहुमन्जिली इमारत,पत्नी को माया,जमीन.
शुक्र-चन्द्र्मा=पत्नी कलाकार,साली से प्रेम.
बुहस्पति-राहु=बडा ज्ञानी
शनि-केतु=अधीनस्थ कर्मचारी.
चन्द्र-बुध-केतु-प्रेमी से संतान
शुक्र-मंगल-पत्नी जल्दबाज
सूर्य राहु से देखा जा रहा हो,शुक्र और चन्द्र पीछे हो,आगे शनि हो तो अपुत्र योग.
राहु-सूर्य-चन्द्र=अपुत्र योग.
बुध-शनि=शिक्षा में अबरोध
राहु वृश्चिक का हो तो निराशा घेरती है.
शनि से नवम मे केतु का जाना कार्यों में अवरोध पैदा करता है.केतु शनि और बुध का प्रबल शत्रु है.
शनि कन्या में बैंक आदि मे काम देता है
सूर्य और शनि नवम पंचम मे हो तो सरकारी कामो मे जाने का योग बनता है.
कुम्भ का शनि अनुसन्धान करवाता है.
राहु-केतु की सीधी रेखा से बाहर शनि विदेश में काम करवाता है
बुध-गुरु के साथ केतु-ज्योतिषी बनाता है.
शनि-केतु कार्य छुटाता है.
शुक्र-राहु=एक्टिन्ग भी करवाता है
मंगल-राहु=अति संवेदनशील और जिद्दी.
शुक्र स्वग्रही-गुरु साथ=जीवन में आदर और प्रतिष्ठा,दयावान,परोपकारी और सहानुभूति रखने वाला.
गुरु के साथ बुध केतु=पुस्तक लेकन का काम
शनि के आगे मन्गल=काम तकनीकी,
सूर्य के साथ गुरु का गोचर आत्मा में परिवर्तन.
शनि राहु के बीच में जो भी ग्रह वह नष्ट
गुरु के आगे शुक्र चन्द्र्मा=दो बहिने
जिस भी ग्रह पर शनि राहु की द्र्ष्टि वही ग्रह कष्ट में
गुरु के साथ जितने स्त्री और पुरुष ग्रह उतनी ही पुत्र और पुत्रियां
गुरु के सूर्य मंगल=रक्तचाप की बीमारी,ह्रदय सम्बन्धी बीमारी.
शनि से बात रोग
गुरु के आगे शुक्र=पुरुष की शीघ्र शादी,
शुक्र के आगे मन्गल=स्त्री की जल्दी शादी.
शुक्र से पंचम में केतु=गर्भपात.
शुक्र-केतु=मूत्र सम्बन्धी बीमारियां
गुरु गोचर से जन्म के चन्द्र के साथ बाहर जाने का अवसर
शनि से आगे और पीछे के घर खाली =कार्यों में देरी.
शनि के आगे केतु =कई बार कर्म का त्याग.
केतु का शनि पर गोचर=कर्म मे कथिनाइयां
आत्मा कारक की अन्तरदशा में असफ़लता मिलने लगती है.
शनि गुरु का परिवर्तन और सूर्य गुरु का संयोग प्रबल राजयोग का कारक है.
पुरुष की शादी का विचार गुरु से करें
गुरु जब जन्म समय के शुक्र,या शनि पर आवे तो शादी होगी.
शनि विषम राशि मे हो तो देर से शादी.
गुरु गोचर मे राहु के ऊपर तो बीमारी.
गुरु का मंगल के ऊपर गोचर मकान दिलवाता है.
गुरु चन्द्र से गोचर करने पर स्थान परिवर्तन करवाता है
राहु के ऊपर गोचर से गुरु का जाना और चन्द्रमा से देखना विदेश भेजता है
गुरु शुक्र पर हो तो कन्या,गुरु पर हो तो पुत्र,मंगल और शनि पर भाई पैदा होता है.
मीन का शुक्र मधुमेह की बीमारी देता है.
चन्द्र नीच का एक बहिन को अनिष्ट देता है
गुरु से पहले के ग्रह आगे आने वाले भाई बहिनो को और गुरु के बाद के ग्रह बाद के भाई बहिनो को बताते है.
गुरु जब शनि के साथ आता है तो व्यवसाय करना बताता है.
गुरु शनि पर गोचर करे और सूर्य से देखा जाये तो सरकारी कामो को बताता है.
गुरु के ऊपर गुर गोचर करे और चन्द्र्मा से देखा जाये तो स्थानान्तरण करवाता है,पदोन्नति देता है.
शनि से पंचम मे गुरु केतु हो अध्यापक की हैसियत देता है.
शनि के त्रिकोण के अन्दर सूर्य राहु से चिकित्सक,मंगल कुम्भ मे भी चिकित्सक बनाता है.
मंगल केतु से पुलिस या चौकीदार के पोस्ट देता है.
शुक्र से सप्तम में गुरु और शनि हो तो भी स्कूल मे कार्य होता है.
सूर्य से सप्तम में शनि गुरु हो तो दवा की दुकान करवाता है.
कन्या राशि बैंक है.
कन्या और कुम्भ बीमारी की राशिया है,कन्या में बुध के अलावा कोई भी ग्रह हो बीमारी देता है.
कुम्भ का सूर्य ब्लडप्रेसर देता है.
कुम्भ का चन्द्र खून या मष्तिस्क की बीमारी देता है.
कन्या और कुम्भ में बुध स्नायु रोग.शुक्र से मधुमेह,गुरु से कान,मन्गल से टांसिल फ़ेफ़डा,राहु से मलेरिया,जैसी बीमारिया देता है.
कन्या का राहु दादा की दो शादियों के बारे में बताता है.
सिंह का राहु वैष्णों देवी की पूजा और नागपूजा के बाद पुत्र देता है.
गुरु शनि से वास्त्विक है कि पूर्व जन्म में पाप किया है,अगर दोनो का योग कन्या या बुध मे हो.
मन्गल-राहु=मशीन के काम,भाई को अनिष्ट,शिक्षा मे रुकावट,पुलिस स्टेशन,कब्रगाह,कारखाना.
सूर्य-मन्गल-गुरु=सर्जन
गुरु-मन्गल-आपरेशन.
गुरु मन्गल का योग १-७ में = शादी के बाद परेशानी.
सूर्य नीच ग्रहो को नही अपनाता,मन्गल अपना लेता है.
मन्गल-राहु-सूर्य =कोढी
मन्गल-शुक्र-राहु = परस्त्री से सम्बन्ध
मन्गल-राहु-बुध =पति की मृत्यु
मन्गल के पीछे शनि से देर से शादी होती है,मन्गल शनि को देखे तो एडी मे चोत लगती है.
गुरु मन्गल = भगवान शिवजी
मन्गल नीच = एक भाई
मन्गल-गुरु = स्थूल
राहु-शनि = अन्धेरा
मन्गल-शनि=राहु=साधारण कार्य
गुरु स्वगृही दो भाई बताता है.
मन्गल - शुक्र =पत्नी से मनमुटाव,रसायन या दवाई
शनि-मन्गल-राहु = उद्योग
मगल-शनि-सूर्य-केतु = पिता अन्धे हो.
मन्गल-चन्द्र = परिवरतन
सूर्य से आगे शुक्र धन देता है,जमीन देता है.
सूर्य केतु = पिता को राजकीय कार्य,साधू स्वभाव
गुरु के आगे सूर्य=पिता वाले कार्य करने पडे.
सूर्य राहु का साथ पिता को चोट लगे,शादी मे अनबन,भाई को अनिष्ट
शनि-शुक्र-बुध-सूर्य=पेट्रोल
शुक्र और चन्द्र शत्रु ग्रह मे हो तो बहिन नही होती है,काम भी दूर के होते है
चन्द्र-गुरु किसी नीच स्त्री से सम्बन्ध
चन्द्र-बुध= विद्वान
शनि-केतु-चन्द्र= पुरोहित
शुक्र-चन्द्र =पिछले जीवन मे स्त्री का श्राप था.
केतु-चन्द्र=दर्जी
केतू-चन्द्र-शुक्र=फ़ूल
केतु=तना
चन्द्र्मा=पत्ता
शुक्र=गन्ध,
शनि गोचर मे चन्द्र के ऊपर =स्त्री द्वारा धोखा
चन्द्र-राहु=तेल
राहु-चन्द्र=मुसलमान कन्या
राहु=गुरु= मुसलमान पुरुष
शनि-शुक्र-चन्द्र=कई स्त्रियों से सम्बन्ध,दुराचारी.
चन्द्र-मन्गल= माता को कष्ट,राक्षस का अंश,माता को गुस्सा
शनि-चन्द्र=अर्धनारीश्वर,दूर के काम.

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