शरीर के अंगों का संदेश

जीव जन्तु और मनुष्य पेड पौधों फ़लों आदि सभी में करेंट होता है,न्यूनतम या अधिकतम पेड पौधे और जीव जन्तु की उम्र के अनुसार माना जाता है,यह करेन्ट मिली एम्पीयर की नाप में होता है,शरीर की गति,पेड पौधों के अन्दर होने वाली गति जो हवा या धूप की अधिकता से होती है,विद्युत उत्पादन के लिये मानी जाती है। भोजन करने पर शरीर में आलस आना इसी बात का द्योतक है कि शरीर में बनने वाली ऊर्जा का विकास नये सिरे से चालू हो रहा है। शरीर के अन्दर बनने वाली विद्युत का प्रयोग शरीर किन किन कामों में करता है उसके लिये हमें गहन अध्ययन की तरफ़ जाना पडेगा। शरीर में खाना के द्वारा ऊर्जा की पूर्ति होती है,शरीर के द्वारा जो भी खाद्य पदार्थ प्रयोग में लाये जाते है वे सभी जमीन से उत्पादित होते है,या समुद्र के पानी से उत्पादित होते है,उन्ही उत्पादनों को शरीर आराम से हजम कर सकता है जो एक बार धरती पर उत्पादित हो चुके है,इस प्रकार के भोजन से शरीर के अन्दर जो ऊर्जा बनती है उसे ही बायो इलेक्ट्रिक की संज्ञा दी जाती है। शरीर अपने तंत्रिका तंत्र को सूचना देने की क्रिया में इस विद्युत ऊर्जा को प्रयोग में लाता है,शरीर के अलावा भी यह बाहर की दुनिया में भी अपने संदेशों को भेजने और संदेशों को प्राप्त करने के लिये प्रयोग में लाता है। कही भी शरीर में चींटी काटती है तो तंत्रिका तंत्र को संदेश देने वाली शरीर में फ़ैली तंत्रिका तंत्र वाहिनियां चींटी के काटे का अहसास सीधे मस्तिष्क के पीछे मेडुलाआबलमगेटा नामक स्थान को पहुंचाती है,और दिमाग से तुरत उस काटे जाने के स्थान को सुरक्षित करने के लिये या बाह्य सहायता के लिये हाथ पैरों को दिमाग से आदेश दिया जाता है और हाथ पैर मिली सेकेंडों मे मिले उस आदेश का पालन अपनी गति के अनुसार करते है। अगर कोई चीटी की जगह पर बिच्छू या अन्य जहरीला जीव काटता है तो अपने हाथ पैरों की सहायता के अलावा बाहर की सहायता के लिये दिमाग आवाज और शरीर को गति भी प्रदान करता है,जैसे कोई बर्र काटती है और वहाँ पर अन्य बर्रों के काटने की आशंका है तो शरीर के अन्दर भागने की शक्ति भी अचानक ही पैदा हो जाती है,दिमाग अपने इस विद्युत शक्ति का प्रयोग सुरक्षित बाह्य स्थान को खोजने के लिये भी प्रयोग करता है साथ ही काटे जाने वाले स्थान को सूजन आदि देकर विष को आगे बढने से रोकने के उपाय भी करता है। चीखने के लिये आवाज भी देता है,और चीख के अन्दर उस आवाज को भी प्रकट करने की शक्ति और डीबी पावर देता है जिससे आसपास का माहौल भी जो भी पास में रहने वाले लोग है,चाहे वे अन्जान हो या जान पहिचान वाले सभी का ध्यान अपनी ओर किसी भय से देखने के लिये और उस भय की चीख की आवाज को सुनकर अपनी अपनी सुरक्षा के साथ उनके अन्दर भी हिम्मत को प्रदान करने के लिये शक्ति सम्पन्न ऊर्जा अपना काम करने लगती है,इससे अगर भय कोई सार्वजनिक है तो सभी अपनी अपनी सुरक्षा को देखकर सहायता के लिये भागने लगते है। अगर पीडा शरीर की शक्ति से अधिक होती है तो शरीर को बेहोस करने के बाद तंत्रिका तंत्र अपनी गति के अनुसार शरीर की शक्ति को इकट्ठा करने और जमा बलवान तत्वों की पूर्ति के लिये किये जाने वाले उपायों के साथ शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले कारकों का निदान करता है। इस निदान में जो कारक महत्वपूर्ण होते है उनके अन्दर आसपास रहने वाले लोग या दूरस्थ रहने वाले लोगों को भी यह तंत्रिका तंत्र सूचनायें पहुंचाने का काम करता है। आसपास रहने वाले लोगों के अन्दर तो पीडा की खबर करने के लिये अपने आसपास के कारकों को शरीर की ऊर्जा अपना कार्य करती है,और जो बाहर और दूरस्थ लोग होते है उनके लिये सम्बन्धित शरीर के अंगों को फ़डकाने का कार्य करती है,उनके अन्दर अक्समात ही विचारधारा के अन्दर बदलाव का कार्य करती है,अगर कष्ट भोगने वाला व्यक्ति किसी का पुत्र है तो माता को,पति है तो पत्नी को,पिता है तो पुत्र को और अन्य सम्बन्धी है तथा उस सम्बन्धी से अधिक लगाव है तो उस सम्बन्धी को अपने अपने अंग को फ़डका कर सूचना देने का काम यह ऊर्जा करती है। यही नही इस ऊर्जा का काम किसी भी खुशी की खबर को भी शरीर के अंगों को फ़डकाकर भेजने का काम करना होता है,अगर खुशी खबर प्राप्त करने वाला जातक सो रहा है तो स्वप्न के माध्यम से भी इसी ऊर्जा के द्वारा से संदेश प्रसारित किये जाते है। स्त्री का बांया और पुरुष का दाहिना अंग खुशी की खबर को प्राप्त करने के समय फ़डकना आरम्भ करता है और बुरी खबर के समय स्त्री का दाहिना और पुरुष का बायां अंग इस क्रिया को प्रदर्शित करने लगता है।

बुजुर्ग माता को भी अपने पुत्र की संकट की स्थिति में फ़ौरन अहसास तब हो जाता है जब उसके स्तनों में खुजली चलना शुरु हो जाती है.पुत्र के ऊपर आने वाले संकट का अहसास माता अपने आप महसूस करने लगती है उसके दिल में चैन नही आता है,और रात को बुरे बुरे स्वप्न भी चालू हो जाते है। इस ऊर्जा का प्रभाव किस प्रकार से अपने संदेश पहुंचाने का कार्य करता है इसके लिये पूर्वकाल से ही अनुभव के आधार पर अंग फ़डकने के फ़लाफ़लों का इतिहास चलता आ रहा है.शरीर का हर हिस्सा अपना अपना प्रभाव बताने लगता है,जैसे किसी व्यक्ति का मस्तक फ़डकने लगता है तो उसे नौकरी लगने या काम मिलने अथवा किसी जमीन के मिलने का अहसास होने लगता है,मस्तक के लिये वह चाहे पुरुष हो स्त्री,अक्सर स्थान बदलने या किराये का मकान सिफ़्ट करने के पहले यह अहसास होने लगता है। नौकरी में या अपने व्यवसाय में स्थान बदलने के समय भी यह अनुभव देखा गया है। अक्सर किसी व्यक्ति की दोनों भोहें अपने आप फ़डकने लगती है तो उसे समझ लेना चाहिये कि उसके बुरे दिन अब बीत गये है और सुख का समय आने वाला है,वह जिस बात के लिये भी दुखी था उसका दुख दूर होने वाला है,साथ ही उसके ह्रदय में एक उत्साह भी जन्म लेने लगता है। आंखों की फ़डकन अधिकतर समाज में प्रचलित है,स्त्री की बायीं आंख और पुरुष की दाहिनी आंख किसी भी स्थान से फ़डकने लगती है तो उसे जो भी प्रिय होता है उसी का दर्शन होना होता है। लेकिन विपरीत अवस्था में अशुभता का देखना भी मिलाकरता है। स्त्री के बायें नेत्र का कान की तरफ़ का कौना फ़डकना शुरु होता है तो जरूर लक्ष्मी की प्राप्ति होती है,वह चाहे सोने चांदी के रूप में हो या नगद धन के रूप में मिले उसे मिलती जरूर है। यही हाल पुरुष के दाहिने नेत्र के लिये माना जाता है। आंख के ऊपर के किस्से में भी यही जाना जाता है कि अगर पुरुष का दाहिना और स्त्री का बायां पलक फ़डकता है तो किसी पदवी की प्राप्ति होती है और विपरीत में पदवी का अंत होता है। कन्धा फ़डकने में भोगों की प्राप्ति और विपरीत अवस्था में भोगों का चला जाना मिलता है। थोडी का फ़डकना स्त्री और पुरुष के लिये किसी बडे डर के लिये माना जाता है,किसी की धमकी या किसी प्रकार से घर या बाहर के व्यक्ति के साथ अक्समात हादसा होने की खबर थोडी से मिलती है,लेकिन कण्ठ फ़डकने की स्थिति में यह उल्टा होता है,इसमें प्रसिद्धि और धन लाभ मिलता देखा गया है। गर्दन का पिछला हिस्सा फ़डकने की स्थिति में जो भी बैर भाव मानने वाले लोग होते है वे हावी होने की कोशिश करते है,होंठों के फ़डकने के समय में भौतिक वस्तु जो बहुत प्रिय होती मिल जाती है। पीठ फ़डकने को स्त्री और पुरुष दोनो को भी बुरा माना गया है,या तो बीमारी पकडती है,या फ़िर किसी बात में हारना पडता है। कोख फ़डकने पर जो अपना खास होता है उससे मिलना होता है,लेकिन दाहिनी और बायीं का भी ख्याल रखना पडता है,विपरीत अवस्था में बिछडना भी माना जाता है। दिल का धडकना अक्सर जो भी जन्म सिद्ध कामना होती है उसके मिलने का समय माना जाता है,चाहे वह हमेशा से माने जाने वाले भगवान के किसी भी रूप में क्यों ना हो। मुंह के अन्दर फ़डकाहट अच्छे भोजन की प्राप्ति का संकेत माना जाता है,हथेली में खुजलाहट धन के आगमन और विपरीत अवस्था में खर्च करने की स्थिति को भी दर्शाता है। कमर का फ़डकना बहुत अच्छे काम के अन्दर कुछ समय के लिये बिजी होना और बाद में सम्मान देने के लिये माना जाता है। नाभि का फ़डकना पति के लिये पत्नी का बिछोह और पत्नी के लिये पति का बिछोह के रूप में जाना जाता है। प्राइवेट पार्ट के फ़डकने पर इच्छित साथी के साथ रमण करने का समय बताया गया है। गुदा के फ़डकने पर वाहन का लाभ होता है,चाहे वह खुद का मिले या किराये के वाहन से सफ़र करने का अवसर मिले,जांघों के फ़डकने से वस्त्रों की प्राप्ति होती है,घुटने के फ़डकने से घर में शत्रुओं की और व्यापार में कम्पटीटर के उदय होने का समय माना जाता है। पैर फ़डकने पर किसी नये स्थान की तरफ़ पलायन होता है,विपरीत अवस्था में बुरे स्थान को प्राप्त करने का संकेत भी माना जाता है। पैर के तल के फ़डकने की स्थिति में अचल सम्पत्ति की प्राप्ति और विपरीत अवस्था में अचल सम्पत्ति के जाने का समय माना जाता है। बच्चे के बीमार होने के समय माता की छाती अपने आप द्रवित होने लगती है,बच्चे के ठीक होने के समय माता की बायीं छाती फ़डकने लगती है। सुबह के समय में जल्दी असर मिलता है शाम के समय में देर से असर मिलता है,लगातार फ़डकने की स्थिति में भला या बुरा प्रभाव प्लान के बनाने के बाद मिलता है। एक साथ दोनो अंगो का फ़डकना भाग्य और दुर्भाग्य के बीच में चलने वाली बहस मानी जाती है। इसके अलावा और भी सैकडों क्रियायें इस शरीर के द्वारा सम्पादित की जाती है,जो केवल बायो इलेक्ट्रिक करेंट के द्वारा ही सम्भव हैं। कोई व्यक्ति अगर लगातार नकारात्मक स्थिति में चला जाता है और वह बार बार अपने को अकेला रहने के लिये परिवार या समाज के लोगों से दूर रखता है तो उस व्यक्ति के लिये यह नकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का समय माना जाता है,इस काल में उस व्यक्ति से कोई भी वार्ता करने पर वह खीजता है और अपने शरीर को समाप्त करने की धमकी देता है। नकारात्मक ऊर्जा को शरीर से दूर करने के लिये व्यक्ति के ऊपर से खाने वाला सादा नमक एक मुट्ठी शाम के समय सात वार उसारा करने के बाद घर के बाहर सडक पर डालने से उसकी नकारात्मक ऊर्जा से छुटकारा भी मिलता देखा गया है। नकारात्मक ऊर्जा का एक प्रभाव और देखा गया है कि वह घर के अन्दर सबसे पहले क्लेश पैदा करने का कारण पैदा करती है,वह व्यक्ति के किये जाने वाले काम से ध्यान भंग करती है,वह कर कुछ रहा होता है और करता कुछ है,इस कारण से घर के अन्दर नुकसान,सम्बन्धों के अन्दर बिगाड और व्यापार के अन्दर नुकसान तथा नौकरी के अन्दर मालिक से प्रताणना का असर देती है,इसके लिये सुबह को अपने जागने के बाद अपने इष्ट को ध्यान में रखकर उसकी मानसिक इमेज अपने दोनों हाथों में देखने के बाद तथा जो स्वर चल रहा हो,उसी पैर को पहले बिस्तर से नीचे रखने के बाद ही कार्यों को शुरु करना चाहिये। रात को नींद नही आने की अवस्था में भी सूर्योदय से पहले जागने की क्रिया को करना चाहिये,और जहाँ से भी उगते हुये सूर्य का द्रश्य दिखाई दे देखने का प्रयास करना चाहिये। अक्सर उन लोगों को बहुत ही सफ़ल होते देखा गया है जो लोग सुबह के उगते हुये सूर्य को नदी या समुद्र या तालाब के पार देखने की कोशिश करते है। दान भजन पूजा और सम्बन्धित व्यक्ति की भलाई की कामना के लिये जो भी उपचार किये जाते है वे अप्रत्यक्ष रूप से फ़ायदा देते देखे गये हैं। दिमाग की अधिक अशान्ति से बचने के लिये पहाडी यात्रायें भी कामयाब होती है।

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