भारत की राजनीति

स्व.श्री राजीव गांधी का पापकर्तरी योग

दिनांक बीस अगस्त सन उन्निस सौ चवालिस में सुबह सात बजकर तीस मिनट पर श्री राजीव गांधी का जन्म हुआ था। इनके छोटे भाई स्व.श्री संजय गांधी इनसे केवल सवा साल ही छोटे थे। दोनों भाइयों की जन्म कुन्डलियों में पापकर्तरी योग विद्यमान है। पाप कर्तरी योग का मतलब होता है,जब सौम्य ग्रह क्रूर ग्रहों के मध्य विद्यमान हों। स्व.श्री राजीव गांधी की कुन्डली में कन्या का मंगल दूसरे भाव में और कर्क का राहु बारहवें भाव में विद्यमान है,गुरु बुध चन्द्र तथा सूर्य इन दोनो क्रूर ग्रहों के मध्य स्थापित हैं। लालकिताब ज्योतिष के अनुसार चन्द्र से माता बुध से पुत्री सूर्य से पुत्र शुक्र से पत्नी और गुरु से खुद जीव की व्याख्या की जाती है। सिंह लगन की कुन्डली के साथ सूर्य और चन्द्र लगन भी एक साथ है,और तीनों लगनों का मालिक सूर्य है,गुरु राज्य भाव के साथ साथ मृत्यु भाव का मालिक भी है,गुरु अगर राज्य देता है तो राज्य के बाद मृत्यु भी देता है। कर्क का राहु धर्मी होता है,लेकिन ग्यारहवें शनि के असर के कारण वह अपने धर्मी पन से दूर है। ग्यारहवां शनि मिथुन राशि का है,कार्यों के अन्दर कमन्यूकेशन पबलिसिंग आदि कामों के अन्दर तरक्की देता है,उनके राज्य काल में भारतवर्ष में टेलीफ़ोन कम्प्यूटर की सुविधाओं का विस्तार हुआ और आज कोई ही ऐसा बचा होगा,जो इन सेवाओं के द्वारा लाभान्वित न हो रहा हो। शनि का प्रभाव केवल उन्ही कारकों की तरफ़ जाता है,जिन कारकों के अन्दर राहु का समावेश हो। राहु छाया ग्रह है,लेकिन लालकिताब के अनुसार असीम शक्तियों का मालिक है,राहु अनन्त आकाश है,राहु की सीमा का पता नहीं है। राहु की अद्रश्य शक्ति को समझने के लिये तार के अन्दर उपस्थित बिजली टेलीफ़ोन या इन्टरनेट का करेंट,पेट्रोल डीजल के अन्दर छुपी ज्वलनशीलता,बारूद के अन्दर छुपी विस्फ़ोटक छमता,बादलों के अन्दर छुपी तडित बिजली आदि के बारे में पता करना भौतिक रूप से बिना केतु (नापने के साधनों) के असम्भव है। जातियों के अन्दर केतु सिख धर्म से सम्बन्धित है,गुरु हिन्दू धर्म से सम्बन्धित है,बुध बौद्ध धर्म से तो राहु मुस्लिम धर्म से सम्बन्धित माना जाता है। आपकी कुन्डली में मकर का केतु द्रविण समुदाय से सम्बन्धित है,राहु उत्तर दिशा के मुस्लिम समुदाय से सम्बन्धित है,गुरु पूर्व दिशा के हिन्दू समुदाय से सम्बन्धित है,बुध भी पूर्व दिशा के बौद्ध धर्मावलम्बी समुदाय से सम्बन्धित है, राहु और केतु हमेशा एक दूसरे से समान अंशों में विरोधी स्वभाव रखते हैं। केतु बिना राहु के काम नहीं कर सकता है और राहु बिना केतु के कोई काम नहीं कर सकता है। लालकिताब में तो यहां तक कहा गया है कि शनि एक सांप की तरह है,जिसका मुँह राहु है और केतु उसकी पूँछ। स्वर्गीय श्री राजीव गांधी की कुन्डली में मकर का केतु ही गुरु सूर्य बुध चन्द्र और शुक्र का मारक है। केतु को कन्या के मंगल का बल मिला हुआ है,और बारहवां राहु मंगल को अपनी अद्रश्य शक्तियों से पूर्ण करता है। शनि कर्म का मालिक है,और अगर वह राहु से अपना सम्बन्ध स्थापित करता है,तो कर्म के अन्दर शंका का पैदा होना लाजिमी माना जाता है। आपने बोफ़ोर्स सौदे के अन्दर जनता के अन्दर पैदा हुई शंकाओं को झेला है। आपकी कुन्डली में केतु छठे भाव कर्जा दुश्मनी दैनिक कार्य और बीमारी के घर में बैठा है। केतु का स्थान छठे घर में होने के कारण वह बैंक और धन सम्बन्धी कारणों को भी देखता है। राशियों की दिशाओं के अनुसार मकर राशि दक्षिण दिशा की कारक है,और इसी दिशा का केतु आपके पूरे परिवार की मृत्यु का कारक है। राहु के निर्देशानुसार केतु कार्य करता है। राहु लालकिताब के अनुसार गुरु के बारहवें भाव में विद्यमान है,और कर्क राशि का होने के कारण वह वाहन का भी कारक है,बारहवां भाव हवा का घर है,आसमान का कारक है,इसलिये इसे वायुयान का भी रूप दिया जा सकता है,और मंगल लालकिताब के अनुसार भाई का कारक है तो इसी वायुयान रूपी राहु ने इनके भाई स्व.श्री संजय गांधी को काल का ग्रास बनाया था। राहु का असर पाकर केतु ने आपको बारूद से भरे बम के द्वारा जनता के अन्दर काल का ग्रास बनाया था। उसी केतु ने आपकी माताजी माननीय स्व.श्रीमती इन्दिरा गांधी को बारूदी गोलियों से छलनी किया था। लालकिताब के अनुसार कन्या का मंगल जो भी गलत कार्य करता है,उनको साधारण व्यक्ति समझ नहीं सकता है,कन्या का मंगल जब भी वर्ष कुन्डली से अपने दायरे में आता है,तो वह अपना कार्य किये बिना नहीं मानता है। वर्तमान समय में राहु उसी केतु पर अपना असर दे रहा है,इस राहु ने पिछली बाइस मई सन दो हजार चार से केतु को अपने घेरे में लिया था,और आगे आने वाले अक्टूबर के महिने से यह केतु से दूर होकर अपना प्रभाव समाप्त कर रहा है।

केतु का तंत्रात्मक प्रयोग

केतु के द्वारा खराब असर को दूर करने के लिये जो उपाय श्रीमती सोनिया गांधी के द्वारा किये गये वे इस प्रकार हैं:-
१.श्री मनमोहन सिंह सिख समुदाय से हैं,जो भारतवर्ष के उत्तर दिशा से सम्बन्धित है,जबकि श्रीमती इन्दिरा गांधी के बडे पुत्र श्री राजीव गांधी की कुन्डली में दक्षिण दिशा का केतु उनके परिवार के लिये मारक है,श्री मनमोहन सिंह को प्रधान मंत्री की पदवी केवल इसलिये ही दी गयी थी,कि उत्तर और दक्षिण के सकारात्मक और नकारात्मक केतु को मिलाकर आस्तित्वहीन कर दिया जाये।
२.केतु के उपायों के अनुसार जब केतु खराब असर देता है,तो गणेशजी की स्थापना करवायी जाती है,उनको घर के अन्दर मुखिया की उपाधि दी जाती है,और सभी परिवार वाले उनकी आराधना करते हैं,उस आराधना से गणेशजी अपने द्वारा दिये जाने वाले दुष्प्रभाव समाप्त कर देते हैं,उसी प्रकार से श्री मनमोहन सिंह को भारतवर्ष का प्रधान मंत्री बनाकर उनकी स्थापना गणेशजी की तरह कर दी गयी थी,और उनके राज्यकाल में श्री राजीव गांधी का परिवार सुरक्षित रहा। इससे भी बडा एक प्रयोग और किया गया कि राहु से सम्बन्धित समुदाय के मुखिया महामहिम श्री अब्दुल कलाम को भारतवर्ष का राष्ट्रपति बनाकर बिठाया गया,और उनका कार्य काल समाप्त होने के बाद मंगल से बचाव के लिये राजपूत समाज की बुजुर्ग महिला महामहिम राष्ट्रप्ति श्रीमती प्रतिभा पाटिल को पदासीन किया गया।
३.राहु ने श्री मनमोहन सिंह को पिछले अप्रैल मई २००८ से अपने शिकंजे में लेना चालू कर दिया था,और उनके द्वारा राहु का उपाय परमाणु समझौता अमेरिका के द्वारा करवाया गया,यहां तक कि दक्षिण में भारत और श्री लंका के बीच बने केतु (रामसेतु) को खत्म करने की राजनीति भी शुरु हुयी थी,इस केतु को समाप्त करने के बाद फ़िर कोई समस्या श्री राजीव गांधी के परिवार को नहीं रहती है।
४.राहु की पूजा के लिये शक्ति की पूजा की जाती है,शक्ति के रूप में माता दुर्गा को स्थापित किया जाता है,श्री राजीव गांधी के परिवार ने परमाणु सयंत्र की स्थापना का जो प्रयोग शुरु किया है,वह अद्रश्य शक्ति के रूप में ही माना जायेगा,यह संयत्र उनके द्वारा पंजाब में ही स्थापित करने का विचार अक्समात होगा। समझौते के कारण ही राज्य हाथ से भी जा सकता है,कारण इनके परिवार में मंगल धन भाव में विराजमान है,और जो बडा धन इस समझौते के बाद प्राप्त होगा,उसके अन्दर बन्दरबांट के चक्कर में यह राहु यानी मुस्लिम समुदाय से सम्बन्धित दक्षिण भारत का केतु इनके राज्य भाव पुत्र भाव और धन भाव को समाप्त करने जा रहा है,इसका मतलब साफ़ है कि प्रधान मंत्री पद पर दक्षिण भारत का व्यक्ति ही आसीन होगा।
५.प्रभाकरण को पूरी तरह से समाप्त करने के लिये यह राहु अपना असर दे रहा है,लेकिन वह किसी प्रकार से आगे आने वाली पच्चिस सितम्बर तक बचा लेता है,तो वह ही इनके परिवार के लिये आगे चल कर खतरनाक स्थिति दे सकता है।
६.श्री राजीव गांधी के परिवार भाव में राहु आगे आने वाले अक्टूबर के महिने से प्रवेश करेगा,इनके परिवार को बल देने वाला गुरु विरोध में एक मई से आ गया है,केतु गुपचुप रूप से अक्टूबर के महिने से गुरु का साथ देने जा रहा है,गुरु शनि और केतु के लिये विरोधात्मक रूप यह परिवार किस प्रकार से सहन कर पायेगा। क्या श्रीमती सोनियां गांधी के लिये राहु से अष्टम में जाना उनके जीवन के लिये खतरनाक स्थिति तो नहीं प्रस्तुत कर रहा है?
५.राहु के पंचम में आने से और केतु का शनि के साथ गोचर करने से क्या श्री राहुल गांधी को अन्डर ग्राउन्ड होना पडेगा,या वे शिक्षा से सम्बन्धित यात्रा के दौरान किसी हादसे के शिकार होंगे।
६.दक्षिण भारत का कोई भी प्रधान मंत्री पद का हकदार श्री राजीव गांधी परिवार के लिये हानिकारक है,श्री राजीव गांधी की हत्या के बाद श्री नृसिंहाराव ही प्रधान मंत्री बने थे.

वर्तमान के भारतीय संसद के चुनाव और उनके परिणाम

अबकी बार भारत वर्ष में होने वाले चुनावों में उल्टा परिणाम क्षेत्र समझ में आयेगा,जहां पर कान्ग्रेस का वर्चस्व था वहां पर बीजेपी और जहां पर बीजेपी थी वहां पर कान्ग्रेस का किला जीता जायेगा। दिल्ली में अबकी बार कान्ग्रेस ही किल्ली गाडेगी,इसमें कोई संसय नहीं है,उ.प्र.में समाजवादी और बसपा की टक्कर में थोडा सा अंतर रहेगा। कर्नाटका में कान्ग्रेस की फ़तह सुनिश्चित है,गुजरात में भी भाजपा को करारा झटका लगेगा,हमेशा से जीते जाने वाले गढ अबकी बार कान्ग्रेस ढहा देगी। मध्य प्रदेश में भोपाल को छोड कर अधिकांश जगह पर कान्ग्रेस अपना झन्डा फ़हरायेगी। बिहार में लालू का अधिकार बरकरार रहेगा,बंगाल में मकपा का बोलवाला रहेगा,महाराष्ट्र में शिवसेना को मात खानी पडेगी,और पंजाब का अकालीदल गिन गिन कर सांसे लेगा।

यह सब क्यों?

दक्षिण का केतु ही सोनिया गांधी को मात देगा,और वही इनके लिये बहुत बडा सिर दर्द बन जायेगा,राहुल और सोनिया की कोई भी यात्रा दक्षिण के लिये बहुत खतरनाक मानी जा सकती है। मनमोहन सिंह का प्रधानमंत्री पद का रहेगा तो लेकिन वह अधिक समय तक नहीं माना जा सकता है। आगे ईश्वर मालिक है।

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