जन्म पत्री

ग्रहो के व्यक्तित्व और प्रभाव

ग्रह व्यक्तित्व प्रभाव
सूर्य आन्तरिक सदाचार प्रभुता प्रसिद्धि अहम
चन्द्रमा बाहरी दिखावा शरीर मन भावना और संवेदना
मंगल बाहरी दिखावा हिम्मत आनन्द इच्छा मजबूती खुद पर विश्वास
बुध अन्दरूनी निर्णय लेना बुद्धि का प्रयोग करना तर्क करना
बृहस्पति बाहरी धर्म अन्दरूनी मनन सम्बन्ध पर्यावरण
शुक्र अन्दरूनी कला सजावट लगाव सुन्दरता
शनि अन्दरूनी कर्म का रूप रक्षा की भावना सुनना अधिक बोलना कम

ग्रह और तत्व

ग्रह तत्व
सूर्य और मंगल अग्नि तत्व,सूर्य बाहरी और मंगल अन्दरूनी
बुध पृथ्वी तत्व,जिस ग्रह के साथ मिल जाये उसी के अनुसार अपना रूप बना लेना
शनि वायु रूप लेकिन सूर्य मंगल से विपरीत प्रभाव
राहु अक्समात प्रकोप देने वाली रूह के रूप में वायु
गुरु ईथर,सजीव वायु के रूप में जो प्राणियों के अन्दर जीवन को प्रदान करती है
शुक्र जीवित पानी
चन्द्र ग्रहों के अनुसार अपनी भावना को बदलने वाला पानी
केतु ग्रहों के साथ रश्मि रूप में प्रभाव देने वाला,जैसे सूर्य से किरण के रूप में बुध से दीवाल के रूप में
गुरु सूर्य चन्द्र सात्विक
बुध शुक्र राजसी
शनि मंगल राहु केतु तामसिक

संसार के जीव का स्वभाव और कर्म इन्ही ग्रहों पर निर्भर है,जो तत्व अधिक होता है उसी के अनुसार व्यक्ति काम करने लगता है और जीव के अन्दर जिस तत्व की अधिकता होती है उसी के अनुसार वह अपने जीवन को बिताने लगता है,जन्म के समय जो ग्रह अधिक बलवान होते है और जिस भाव या राशि में बलवान होते है उसी के अनुसार आजीवन व्यक्ति के प्रति अपने प्रभाव देते रहते है गोचर के द्वारा जो ग्रह जन्म के ग्रह के साथ भाव या राशि मे गोचर करते है उसी के अनुसार अच्छा या बुरा प्रभाव व्यक्ति के जीवन में होना शुरु हो जाता है। जब गुरु का प्रभाव लगन पर होता है तो व्यक्ति के अन्दर धर्म और सम्बन्धो के मामले मे अनुराग विराग पैदा हो जाता है सूर्य मन्गल राहु का प्रभाव जब लगन पर होता है तो व्यक्ति लम्बा पतला क्रोधी और कब क्या करना शुरु कर दे कोई पता नही होता है,वह अपने समय धन और रिस्तेदारों से बिगाड कर चलने वाला होता है,जब बुध की अधिकता होती है तो व्यक्ति बच्चों जैसा व्यवहार करने लगता है बातूनी होता है और हमेशा अपने दिमाग को ग्रहों की युति के अनुसार बनाने बिगाडने की बात करने वाला होता है। मंगल बुध की युति वाला जातक लेकर नही देने वाला और बुध के साथ गुरु की युति होने से लिया जाने वाला बढाकर देने वाला होता है। शुक्र की अधिकता होने से व्यक्ति रसिक मिजाज का होता है और उसे सजावटी कारणों और वाहनो आदि से अधिक जुडा माना जाता है चन्द्रमा के साथ होने से जातक के लिये भावना प्रधान सोच कर अच्छा या बुरा प्रभाव प्रकट करने वाला होता है लेकिन दिमाग से किसी न किसी प्रकार से छल करने वाला ही माना जाता है।

ग्रहों के द्वारा विचार करने वाले कारक

सूर्य सूर्य जीव की आत्मा के रूप में जाना जाता है साथ ही पिता और पुत्र की स्थिति को दर्शाता है,लकडी मिर्च घास जानवर हिरन शेर ऊन स्वर्ण तांबा आदि का कारक है,मन्दिर राजकीय भवन जंगल नदी का किनारा सूर्य का निवास माना जाता है,पेट आंख ह्रदय चेहरा की ताकत को देने वाला है,आंख सिर ब्लड प्रेसर खोपडी के बाल बुखार आदि सम्बन्धी बीमारी को देने वाला माना जाता है
चन्द्रमा माता आकर्षण शक्ति खरीदना बेचना यात्रा विदेश वास पानी के साधन और पानी के प्रयोग करने वाले स्थान किराना की दुकान सिल्क वाले कपडे शादी नींद का आना और नही आना आदि का कारक है
Unless otherwise stated, the content of this page is licensed under Creative Commons Attribution-ShareAlike 3.0 License