भविष्यफ़ल 2012 (भाग 3)

तुला राशि के बारे मे क्रमश:……..

शनि का गोचर तुला राशि के ऊपर है इसलिये इस राशि वालो के लिये कहने को तो साढेशाती का समय कहा जाता है लेकिन शुक्र की राशि होने और शनि का सुख और बुद्धि का कारक होने के कारण शनि कभी भी तुला राशि पर अपना गलत असर नही देता है,केवल दिमाग और शरीर को व्यवसायी बना देता है और जो भी घर और बाहर के कारण होते है उनके अन्दर केवल कार्य और सामाजिक रिस्तो केबारे मे अपना बेलेन्स बनाने के लिये दिमागी चिन्ताओ को देता है। इस राशि वाले पिछली मई के महिने से अपने को पैक करके रहने के लिये माने जा सकते है कारण पीछे के समय मे जितना उन्होने घूमा और खर्च किया वह शनि देव की मेहरबानी से अब बन्द हो गया है खर्चा भी कम हो गये है और घूमने का समय भी बन्द होना माना जा सकता है। रोजाना की जिन्दगी मे शनि की दया से केवल आराम करने के लिये और किसी से भी बात चीत करने के अन्दर केवल कार्य वाले कारण ही बेलेन्स बनाने की क्षमता का कहा जाता है। जीवन साथी के मामले चल रही आपसी फ़्रीजिंग के लिये भी आने वाले समय में शनि के वक्री होने के कारण अभी से मिलने वाले फ़लो मे फ़्रीजिन्ग का मामला कुछ गर्मी मे बदलने की बात मानी जा सकती है। इस मामले से पहले से बिगडे घरेलू रिस्तो में सुधार की बात भी मानी जा सकती है। यह शनि अब तुला राशि के लिये छोटे भाई और पुत्र सन्तान आदि के साथ अपनी अनबन का कारण भी पैदा करेगा कारण पीछे के समय मे छोटे भाई और पुत्र सन्तान के द्वारा जो उत्पात किये गये या किसी प्रकार की चालाकी का रास्ता अपनाया गया वह अब इस शनि के कारण दूरिया देने के लिये माना जा सकता है,शनि की एक आदत और भी मानी जा सकती है कि यह कभी भी महिला जातको पर बहिन बुआ बेटी पर अपना असर तब तक नही देता है जब तक वे अपनी मर्यादा और धर्म कर्म के अन्दर लगाकर रखती है लेकिन जैसे ही उनकी भावना गलत हुयी यह शनि अपनी फ़्रीजिंग उनके हर काम मे देने लगता है। इस राशि की महिलायें भी तभी परेशान हो सकती है जब उनके अन्दर कोई न कोई कमी पैदा हो जाये और इस कमी के द्वारा उनके सिर मे दर्द और चक्कर आना आंख दांत या कान की बीमारिया पैदा हो जाना सिर का ऐसा लगना के फ़्रीज हो गया है और इसी प्रकार से बुद्धि का काम नही करना कौन कैसा है का विचार दिमाग से निकल जाना किसी भी चीज को रखकर भूल जाना यहां तक कि किसी के नाम या किसी स्थान का नाम भी ऐन वक्त पर भूल जाना माना जा सकता है जिनके जीवन साथी मेष राशि के है उनके लिये यह समय कुछ गलत इसलिये माना जा सकता है कि अपनी धुन मे मस्त रहने के कारण या किसी प्रकार की बुद्धि का भ्रम मे जाना या फ़्रीज होने के कारण जो उनके द्वारा कहा जाता है वह याद नही रहने के कारण और सुनी हुयी बात को अनसुनी कर देने के कारण उनकी आवाज मे तेजी भी आजाती है और अधिक चिल्लाने के कारण मेष राशि वालो की जो तुला राशि के जीवन साथी है उनकी आवाज भी कर्कश इसी शनि के कारण होनी मानी जा सकती है। शनि का पूरा असर कार्य भाव पर पडने के कारण इस राशि के जातक किसी भी कार्य को मेहनत से करने के बाद अगर उसका फ़ल जल्दी लेने की कोशिश मे होते है तो उनकी सबसे बडी भूल मानी जा सकती है कारण शनि का कार्य धीरे धीरे से प्रदान करना होता है जो लोग जल्दी से अपनी योजना को सफ़ल करने के बाद फ़लो को प्राप्त करने की योग्यता को बनाना चाहते है वे किसी न किसी कारण से फ़ेल होने माने जा सकते है। पिता या पिता के धन पर जरूर किसी न किसी प्रकार की दिक्कत का आना माना जा सकता है और किसी भी कारण के बनने पर पिता सम्बन्धी जायदाद के लिये कोई कागजी कारण का बनना भी माना जा सकता है जो चालाकी के साथ किसी प्रकार की हेराफ़ेरी आदि की की जाने की बात भी मिलती है। कुंडली के अनुसार भी शुक्र का गोचर इस राशि वालो के लिये गलत असर को देने के लिये माना जा सकता है।

उपाय

तुला राशि का भाग्य का मालिक बुध है और बुध का इस समय मे वृश्चिक राशि मे राहु के साथ गोचर करना साल भर जातको के लिये बुद्धि को भ्रम मे ले जाना वाला माना जायेगा। घर की बहिन बुआ बेटी और कमन्यूकेशन के साधनो के साथ कोई बडी चीटिंग जैसी बात का होना भी माना जा सकता है। जो भी कमन्यूकेशन के कारण देश विदेश से बनने वाले है उनकी लीकेज से भी किसी हानि का होना माना जा सकता है किसी प्रकार की यात्रा आदि मे यही बात होनी भी मानी जा सकती है। राहु के लिये इस राशि के जातक बहुत ही आसान तरीके से उपाय कर सकते है राहु के मंत्र-"ऊँ भ्रां भीं भ्रौं स: राहुवे नम"" का जाप रोजाना सूर्यास्त के बाद अठारह माला रोजाना करने से भी राहु शांत रहेगा और किसी प्रकार की अस्पताली दुर्घटना या चीटिंग जैसे काम से दूर रखेगा इसके बाद जो भी शरारत केतु करना चाहेगा जैसे किसी खरीद बेच मे की जाने वाली हेरा फ़ेरी अथवा घर के किसी केतु वाले व्यक्ति जैसे घरेलू नौकर या भांजा या भतीजा अथवा कोई मामा साला आदि कोई हरकत आदि करेगा तो वह राहु के जाप के बाद अपनी हरकत को नही कर पायेगा और समय पर अपनी हरकतो से खुल जायेगा या उसकी चाल समझ मे आजायेगी। इस राशि वाले शनि के लिये बहुत अच्छे उपाय इस समय कर सकते है और अपने व्यवसाय के लिये भवन आदि का निर्माण नये व्यवसाय के लिये साझेदारी का बढिया समय माना जा सकता है किसी प्रकार की शनि वाली कमजोरी या धन आदि की प्राप्ति नही होने पर इस राशि वालो को चन्द्रमा को ठोस रूप मे स्तेमाल करना चाहिये यानी अपने कार्य स्थान पर ठोस गोल क्रिस्टल की बाल ग्लोब के रूप मे रखनी चाहिये और उसे दिन मे कई बार घडी की दिशा मे घुमाते रहने से शनि की पडने वाली छाया का गलत असर नही पडेगा जो लोग धोती या नीले कपडे या पेंट आदि पहिनते है उन्हे सफ़ेद रंग का पाजामा अपने कार्यों के लिये करना चाहिये तथा अंग वस्त्र टाइट नही पहिनने चाहिये,गुप्तांगो को साफ़ रखना चाहिये पेट आदि की सफ़ाई के लिये आयुर्वेदिक दवाइयों का प्रयोग करते रहना चाहिये। कारण जून के बाद गुरु का राहु से सीधी युति लेने के कारण वायुरोधी कपडो के नही होने से राहु का इन्फ़ेक्सन होने और अचानक सांस वाली बीमारी अथवा किसी प्रकार के इन्फ़ेक्सन का होना भी माना जा सकता है। अधिक जानकारी के लिये ईमेल कर सकते है moc.liamg|airuadahbortsa#moc.liamg|airuadahbortsa

वृश्चिक राशि

पिछली मई के महिने से इस राशि पर राहु का प्रकोप शुरु हो गया था और इस राहु का प्रकोप आने वाले जनवरी दो हजार तेरह तक चलेगा। इस राहु के कारण इस राशि वाले लोगों का मानसिक संतुलन सही नही रहना माना जा सकता है एक शरीर और एक मन को एक साथ कई स्थानो पर ले जाने के कारण या एक ही समय मे कई कारण एक साथ जीवन मे पैदा करने के कारण इस राशि वालो का कार्य व्यवहार सम्बन्ध और दैनिक जीवन का बाधित होना माना जाता है इसी प्रकार से सलाह देने और जीवन साथी के भाव मे केतु के साथ होने से इस राशि वालो का दिमाग अक्समात किसी न किसी प्रकार के अनैतिक रिस्तो की तरफ़ भी जा सकता है और इस कारण से उनका गृहस्थ जीवन भी बेकार का होना माना जा सकता है इसका प्रभाव सबसे अधिक कमन्यूकेशन के साधनो पर बोलने चालने की भाषा से और अस्पताली कारण बनने तथा कोर्ट केश और इसी प्रकार के कारण का बनना भी मिलता है। किसी प्रकार के घरेलू कारणो से भी दिमाग का उत्तेजित रहना माना जा सकता है छोटे भाई बहिन के लिये किसी प्रकार के बदनामी के कारणो को भी देखना पड सकता है। किसी प्रकार से घरेलू कारणो में बदनामी के कारण भी पैदा हो सकते है। इस राशि मे राहु के गोचर के कारण जो लोग शिक्षा मे है उनके लिये भी बहुत ही सोच समझ कर चलने की बात है कही किसी प्रकार की धोखे वाली शिक्षा की तरफ़ भी उनका रुझान हो सकता है और उस रुझान के कारण हो सकता है कि वे अपने जीवन की गति को आगे के समय सम्भालने मे असमर्थ होजाये। इसके साथ ही जो लोग नौजवान है वे अपने को स्थिर नही रखने के कारण रिस्तो के मामले में कनफ़्यूजन मे रहने माने जा सकते है।इस राशि वालो का स्वभाव भी खोजी होता है और खोजी स्वभाव होने के कारण इस राशि के जातको के लिये बहुत से कारण भी खोज करने के लिये सामने आने के योग बन गये है जो भी जिसकी भी जानकारी चाहता है उसके अन्दर उस जानकारी के लिये बहुत से प्रश्न एक साथ उपस्थित होना लाजमी बात है। इस राशि के जातक अगर किसी से कोई प्रश्न का हल जानना चाहते है तो उन्हे एक के बाद एक प्रश्न लगातार दिमाग मे उपजने के कारण इनका जबाब देना हर किसी के वश की बात नही मानी जा सकती है केवल इस राशि वाले व्यक्ति के जबाब वृष राशि वाले ही दे सकते है कारण उनकी राशि मे केतु होने के कारण दोहरे कारण उनके पास आने वाले जनवरी दो हजार तेरह तक के रहेंगे। इसके अलावा इस राशि वालो का शनि बारहवां होने के कारण भी इस राशि वाले अपने आने जाने के साधन और किये जाने वाले खर्चे के प्रति भी अधिक चिन्तित हो सकते है,वे जहां भी जाना चाहते है उनके लिये रोक लगना भी जरूरी है और जहां पर खर्चा किया जाना है वहां पर खर्च की कमी को भी माना जा सकता है। घर से बाहर रहना और घर से बाहर रहने पर भी खर्चो में कटौती होना उनके शनि का कारण भी दिक्कत देने वाला माना जा सकता है। इस राशि वाले अगर किसी प्रकार की जमीनी खरीद बेच करते है या किसी प्रकार की जायदाद बनाने की बात करते है तो भी यह देखना जरूरी होगा कि उनकी राशि मे राहु का गोचर चन्द्रमा के साथ होने पर उनकी मानसिक स्थितिका लाभ उठाकर उनके साथ कोई चीटिंग तो नही करने जा रहा है। इस राहु के कारण इस राशि के जो पुराने चालाकी वाले कारण थे उनके भी खुलने का समय आ गया है जो लोग गुप्त योजनाओं के सहारे बडे बडे सपने पैदा करने के बाद लोगों की जेब काट रहे थे उनके घेरे मे आने और अक्समात ही अन्डरग्रांउड होने की बात भी समझी जा सकती है,जैसे लोग मल्टी मारकेटिंग का काम करते थे या लोगों की चैन बनाकर काम करने वाले है उनकी पोल खोलने के लिये यह राहु अक्समात ही कोई न कोई कारण पैदा करने के लिये अपने प्रभाव को देने के लिये भी माना जा सकता है। यह बात उन लोगो के लिये अधिक मानी जा सकती है जो लोग बेरोजगारो से अपने मतलब के हल के लिये उन्हे प्रयोग कर रहे थे इस कारण का बद्ला भी केतु और राहु की श्रेणी मिलकर लेने के लिये कोई कसर आने वाले जनवरी दो हजार तेरह तक नही चूकेगी। इसके अलावा भी शनि जो अभी तक उन्हे अनाप सनाप फ़ायदा देने वाला था वह भी उन्हे अक्समात ही रहने वाले स्थान या कार्य करने वाले स्थान से दूर रखने के लिये मानी जा सकती है।

उपाय

इस राशि वालो के राहु की शांति के उपाय ही काम कर सकते है इसके लिये उन्हे गेंहू गुड कांसा मन्दिर मे दान करना चाहिये,चांदी का चौकोर टुकडा उन्हे अपनी गर्दन मे लटका कर रखना चाहिये चांदी की जंजीर मे डाला जाये तो बहुत ही अच्छा है,शिवजी को दूध से स्नान करवाना भी सही है। बारहवे शनि के लिये भी उन्हे उपाय करना चाहिये कि वे मांस मदिरा का सेवन बन्द कर दें,किसी नशीली वस्तु का सेवन नही करे,अगर के अन्दर कोई बदलाव करना है तो घर के आखिरी हिस्से मे कोई खिडकी दरवाजा आदि नही लगवाये,जितना हो सके झूठ बोलने से बचे।

धनु राशि

इस राशि का स्वामी गुरु है और गुरु का गोचर वर्तमान मे मेष राशि पर होने के कारण आने वाले सत्रह जून तक इस राशि वालो के लिये परिवार सुख का कारण देखा जा सकता है,इसके अलावा जो लोग पीछे से किसी प्रकार के विदेश के कारण या न्याय आदि के कारणो से उलझे हुये थे वे अब इस गुरु के कारण सुलझते हुये माने जा सकते है। पुत्र और सन्तान के सुख मे बढोत्तरी के कारण भी बनते है। गुरु के प्रभाव के कारण पीछे से जो जीवन साथी वाले कारण अनबन के कारण चल रहे थे उनके अन्दर भी कोई न कोई सुधार होने से और घर से दक्षिण-पश्चिम मे रहने के बनने के कारण बन गये है। इस राशि का शनि ग्यारहवे भाव मे होने के कारण जो भी लाभ के साधन थे वे किसी प्रकार की सम्पत्ति को बनवाने के कारण अथवा किसी प्रकार के भवन आदि के निर्माण के कारण अथवा पानी की कमी के कारण खर्च अधिक हो जाने से दिक्कत देने वाले माने जा सकते है। रहने के लिये अक्सर जो भाषा समझ मे नही आये उस भाषा वाले लोगों के साथ रहना भी माना जा सकता है। शनि का ग्यारहवे भाव मे आजाने से भी शनि प्रकृति के लोग साथ देने के लिये सामने आने माने जा सकते है जो केवल स्वार्थ और धन की कमाई के बाद दूर हो जाये यह कारण भी पिछले पन्द्रह नवम्बर से बन गया है औरआगे की साल तक रहेगा। शनि की नजर शरीर पर होने के कारण जो नाम और पहले की गरिमा थी उस पर सन्तान सम्बन्धी कारण से दाग लगना भी माना जा सकता है साथ ही सन्तान की देख रेख का कारण भी बनना माना जाता है। जिनकी सन्तान अविवाहित थी या जिनकी विवाहित जिन्दगी मे दिक्कत थी उनकी सन्तान के लिये अपने से नीची कैटेगरी के जीवन साथी मिलने का भी योग बन गया है। साथ ही जो लोग अपने को कार्य आदि के लिये परेशान थे उनके लिये अधिक मेहनत करने के बाद केवल रहने और अपनी रक्षा करने के साधन ही उपलब्ध हो पायेंगे इसका भी कारण है कि जो भी कमाया जायेगा वह ईमानदारी से ही कमाने की बात मानी जा सकती है और इतनी कमाई नही होने से तथा खर्च अधिक होने के कारण वे अपने केवल खाने और रहने के साधन ही बडी मुश्किल से प्राप्त करने के लिये माने जा सकते है। शनि का प्रभाव तीसरे भाव पर होने से अधिकतर के कमन्यूकेशन के साधनो पर भी दिक्कत का आना माना जा सकता है जो पहले कमन्यूकेशन के साधनो से कमाई आदि के लिये योग बन रहे थे वे सभी किसी न किसी प्रकार से बन्द होने के कारण भी मिल सकते है या किसी प्रकार की बन्दिस जो घर वालो या जीवन साथी के द्वारा भी लगायी जा सकती है। शनि का प्रभाव पंचम भाव पर होने के कारण भोजन और सलाह आदि के कामो के अन्दर भी ठंडक और राजनीति वाली बाते अधिक मिलने की बात मानी जा सकती है जो लोग राजनीति से सम्बन्ध रखते है उनके लिये भी कोई न कोई अजीब सी स्थिति मे आकर बडे रूप से चुनाव आदि के लिये तैयारी की जा सकती है और उस तैयारी का कारण भी आने वाले ढाई साल तक उन्हे अधिक खर्च करने के बाद भी नीचे की सीट दिलाने के लिये माना जा सकता है। अन्दरूनी रूप से जो लोग इस काम मे लग रहे होंगे या अपनी पैठ बनाने के लिये अपने प्रयास कर रहे होंगे वे भी अपनी अपनी कमी के कारण किसी न किसी प्रकार के बद्लाव मे जाने के लिये सोच सकते है। एक समय ऐसा भी आ सकता जो धन और मान मर्यादा के लिये दिक्कत देने वाला भी हो सकता है। शनि से आगे बारहवा भाव होने के कारण जो भी बाहर की सहायतायें थी वह बन्द होने की बात मिलती है तथा बाहर रहने के बाद भी किसी प्रकार की उच्च सहायता नही मिलनी मानी जा सकती है। छोटे भाई बहिने भी अपने अपने स्वभाव से फ़्रीज होने के कारण कोई मानसिक या आर्थिक सहायता नही करने के लिये जानी जा सकती है। कोई भी सहायता करने वाला नौकर आदि कोई बडी हानि देने के लिये अपनी योजना को सफ़ल कर सकता है या जो लोग पहले किसी प्रकार की कानूनी आदि सहायता मे थे वे किसी भी समय अपघात करने के लिये अपनी बाजी को चित्त करने की कोशिश मे रहेंगे,साथ चलने वाले लोग ही किसी न किसी प्रकार की अपघात करने के लिये माने जा सकते है। केतु की तीसरी निगाह अषटम भाव पर जाने से भी अपमान मौत और बडे दुख को देने के लिये माना जा सकता है जो लोग अपने घरो को छोड कर बाहर रह रहे है उनके लिये भी यही माना जा सकता है जिन लोगों के सहारे वे अपने घर और सम्पत्ति की रक्षा का भार सौंप कर आये थे वे ही किसी न किसी प्रकार की घात करने से नही चूकेंगे। खुद के ही भानजे मामा साले भतीजे आदि भी अपनी चाल कामयाब करने के लिये कोई भी काट जो परिवार के लिये आगे दिक्कत देने वाली हो कर सकते है।

उपाय

राहु के दुष्प्रभाव के लिये इस राशि वाले जातक धर्म स्थानो पर या गन्दी जगहों पर रहने वाले लोगों के लिये भोजन का बन्दोबस्त करवाते रहे,अपने साथ लाल रंग का कपडा हमेशा साथ रखे,यात्रा और बाहर रहते समय किसी भी अन्जान आदमी पर विश्वास करके नही चले,साथ चलने वाले लोग जो सहायता आदि करते है उन पर भी अपनी नजर को रखे,अपने हाथ पैर का इन्तजाम करके चले किसी प्रकार की दुर्घटना से टूट फ़ूट हो सकती है,किडनी गुर्दा आदि के रोगों से अपने को सम्भाल कर रखे,पीडित व्यक्ति राहु का तर्पण भी करवा सकते है राहु के तर्पण के लिये ईमेल करे moc.liamg|airuadahbortsa#moc.liamg|airuadahbortsa

मकर राशि

मकर राशि वाले जातको के लिये यह समय बहुत ही कष्ट का है कारण पिछली मई से ही उनके लिये परिवार का संकट होना माना जा सकता है। पारिवारिक कारणो मे भी किसी न किसी प्रकार की दिक्कत का होना भी देखा जा सकता है। पति पत्नी और ससुराल सम्बन्धी कारण भी देखे जा सकते है। इस राशि वाले लोगों के लिये ग्यारहवे भाव मे राहु के जाने से दोस्ती और बडे भाई वाले कारण भी माने जा सकते है जो लाभ और रोजाना के काम के बाद मिलने वाली मेहनत के लिये दिक्कत देने वाले माने जा सकते है। राहु का असर शरीर पर जाने के कारण दिमागी परेशानी और शरीर मे इन्फ़ेसन वाले रोग भी होने माने जा सकते है,राहु का असर तीसरे भाव मे जाने से छोटे भाई बहिने और दाहिने तथा बायें कन्धे की बीमारी भी किसी न किसी प्रकार की मानी जा सकती है,राहु का स्थान पंचम मे होने के कारण और केतु का पंचम मे होने के कारण विद्या के क्षेत्र मे कोई न कोई दिक्कत होनी मानी जा सकती है। सन्तान के क्षेत्र मे कोई न कोई दिक्कत का होना और स्त्री जातको के लिये पेट सम्बन्धी बीमारी और मोटापा बढने की बात मानी जा सकती है,परिवार मे किसी प्रकार के जल्दी से धन कमाने वाले कारणो का होना भी माना जा सकता है। जिन कारणो से खुद के बहुत ही घनिष्ठ व्यक्ति के साथ कोई न कोई दिक्कत होने के कारण उससे विश्वास का खत्म होना भी माना जा सकता है। राहु का असर पति या पत्नी भाव पर होने के कारण उसके लिये कोई दवाई या किसी किसी प्रकार के रति रोगों का होना भी माना जा सकता है। किसी प्रकार के निर्जन स्थान पर रहना या किसी निर्जन स्थान की यात्रा आदि भी अक्समात मानी जा सकती है बहिन या बहनोई की आवक मे खर्च का होना माना जा सकता है स्कूली कारण और परीक्षा वाले कारण मे किसी प्रकार की दिक्कत जो कनफ़्यूजन के कारण कम नम्बर मिलने और किसी प्रकार से आगे वाली पढाई का रुकना भी माना जा सकता है। शनि का इस राशि से दसवे भाव मे होने से पिता माता से दूरिया भी मानी जा सकती है और किसी प्रकार के कठिन काम के लिये भी यह शनि अपनी दिक्कत को देने वाला माना जा सकता है बाहर घूमने और वाहन आदि के लिये भी कोई न कोई परेशानी का होना माना जा सकता है धन के कारणो को फ़्रीज होने के लिये भी देखा जा सकता है माता मन मकान के बारे मे कोई न कोई बनाव बिगाड की बात भी मानी जा सकती है रोजाना के कामो के अन्दर वही काम किये जा सकते है जो रोजाना के लिये घर के सदस्यो या अपने ही लोगो के लिये किये जाते हो साथ ही जो काम पहले से चल रहे होते है उनके बन्द होने के कारण भी बनते है। इस राशि वालो के लिये गुरु का गोचर आने वाले सत्रह जून तक है इस गोचर के कारण इस राशि वालो के लिये मानवीय सजावट और सदभावना आदि का अधिक होना भी माना जा सकता है। रोजाना के कामो के अन्दर अपने खुद के व्यवसाय के लिये भी जातको का मन लगना माना जा सकता है साथ ही बैंक आदि से कर्जा लेना और रोजाना के कार्यों के अन्दर मर्यादा वाले कामो का करना भी माना जा सकता है धार्मिक कार्यों का होना और धार्मिक कार्यों के अन्दर मन का लगना भी माना जा सकता है,अपने जन्म स्थान के लिये भी समय का बिताना और जन्म स्थान के पास ही या मे अपने व्यवसाय को स्थापित करना भी माना जा सकता है वाहन आदि के लिये खरीदने और बेचने का कारण बनता है दूध और दूध से सम्बन्धित काम को करने का कारण भी माना जा सकता है। विद्या वाले क्षेत्रों मे जाना या विद्या से सम्बन्धित कामो को करने का कारण भी बनता है। धर्म और मोक्ष सम्बन्धी कामो के अन्दर भी मन का लगना माना जा सकता है। किसी पारिवारिक व्यक्ति के लिये मृत्यु के बाद के कार्यों का करना उसकी स्मृति मे किसी प्रकार के मूर्ति आदि का लगाना भी माना जा सकता है। कपडे से सम्बन्धित काम का करना और अपने लिये कपडो आदि के बारे नयी योजना बनाना और अपने पिता या माता के प्रति अधिक श्रद्धा के कारण कोई धार्मिक उत्सव का करना भी हो सकता है। बडे भाई या बहिन के साथ मिलकर काम करने का कारण भी बनना पाया जाता है। सरकारी संस्था या राजनीति से सम्बन्धित कामो के अन्दर भी जाना पड सकता है। जोखिम वाले कामो या किसी प्रकार के धन सम्बन्धी कारण का पीछे की बचत से कार्य किये जाने की बात भी मिलती है। हवाई यात्रा के लिये भी कई मौके आने की बात मिलती है। शनि का गोचर इस राशि वालो के लिये दसवे भाव मे होने से जीवन साथी से अनबन के कारण भी मिलते है और शनि के द्वारा ही अधिक खर्चा करना आना जाना आदि सीमित हो सकता है या शनि वाले स्थानो मे काम करने से अधिक श्रम और कम आवक की बात भी समझी जा सकती है। शनि के द्वारा धन और परिवार के भाव मे अपनी युति होने के कारण भी दिक्कत का कारण और भोजन मे देरी या कभी कभी नही मिलने की बात भी मानी जा सकती है। धन के बारे मे जहां खर्च होना है वही पर धन की कमी होनी भी मानी जा सकती है। घर और परिवार के लोगों से दिक्कत का होना भी माना जा सकता है ससुराल खान्दान मे किसी बुजुर्ग की मोक्ष की बात भी मिलती है जिसके कारण मृत्यु के बाद के कार्य या अस्पताली कार्य करने का कारण भी बनता है। रहने वाले स्थान पर अधिक शीत और अधिक गर्मी के कारणो से भी जूझना पड सकता है,वाहन दूध और जनता से जुडे कार्यों मे अधिक मेहनत करना भी माना जा सकता है।

उपाय

मकर राशि वालो के लिये उपायों के रूप में बुध के उपाय ही उनके धर्म और भाग्य को बढाने वाले होते है इस राशि वाले जितनी अधिक मर्यादा और सहायता अपनी बहिन बुआ बेटी आदि के लिये कर सकते है उतना ही उनके लिये भाग्य की बात का बनना जाना जा सकता है। जो लोग गांव मे रहते है उनके लिये बकरी पालन का कार्य इस समय मे बहुत फ़ायदा देने वाला माना जा सकता है या टिकट आदि की बुकिंग और यात्रा के काम भी फ़ायदा देने वाले माने जा सकते है। स्कूली काम या एन जी ओ वाले काम करने से भी बाहरी सहायताये मिलने से जनता और उससे सम्बन्धित कामो मे सफ़लता का कारण बनना सही माना जा सकता है। शनि की कठिनाई से बचने के लिये सोने वाले स्थान पर शनि की वस्तुये स्थापित नही करे जैसे किसी प्रकार के काले कपडे बिछाना आदि अथवा किसी कठोर सतह पर सोना आदि पीठ की बीमारियों को जन्म दे सकता है। अपने घर के दक्षिण के पडौसी से भी अपने को सतर्क रखने की जरूरत को देखा जा सकता है। नीलम जो सफ़ेद आभा वाला हो इस राशि वालो के लिये शरीर की शक्ति और परिवार के सुख के लिये ठीक माना जा सकता है। किसी भी धर्म स्थान पर जाने के बाद वहां की सेवा आदि करने से भी इस राशि वालो के लिये उत्तम समय का होना माना जा सकता है जो उन्हे भविष्य मे सन्तान और धन के लिये प्रदान करने वाला होगा।

कुम्भ राशि

शनि का गोचर इस राशि वालो के लिये भाग्य भाव को फ़्रीज करने वाला है और पिता सम्बन्धित कष्ट को प्रदान करने वाला है।जो लोग न्याय आदि के कार्य से जुडे है उनके लिये कठिनाई का समय माना जाता है इसी प्रकार से जो लोग ऊंची शिक्षा आदि से अपने को जोड कर चल रहे है उनके लिये भी बहुत ही कठिन समय का होना माना जा सकता है। इस भाव का शनि इस राशि के जातको को धर्म भाग्य और पिता आदि के लिये फ़्रीजिंग वाला प्रभाव देगा,इसके साथ ही मित्र वर्ग के लिये भी कठिनाई और लाभ के साधनो में कमी देने का कारक भी बन सकता है,अपने छोटे और बडे भाई बहिन के लिये भी दूरिया देने और मर्यादा से दूर जाने तथा किसी प्रकार की प्रेम मोहब्बत आदि की बातो से इस राशि वालो के लिये बदनामी का समय भी चल रहा है। इस राशि वाले अगर बाहर रह रहे है तो उन्हे जहां भी रह रहे है वहां की संस्कृति आदि के बारे मे कार्यों के बारे में जलवायु आदि से कार्य करने और वहीं की सामाजिक व्यवस्था में ढलने के लिये भी माना जा सकता है। सन्तान से कष्ट और अनबन का कारण भी बन रहा है जिनकी सन्तान शिक्षा मे उन्हे अधिक कष्ट का कारण बनना पाया जाना भी मिलने की बात मिलती है। बैंक बीमा आदि से मिलने वाली आय मे कमी का कारण माना जा सकता है उसी प्रकार से बीमारी आदि के लिये लम्बे समय तक दिक्कत होने की बात भी मिल सकती है। दुश्मनी आदि से भी निजात पाने का कारण मिलता है। जीवन साथी के खर्चो मे भी कटौती करने का समय माना जा सकता है। पुत्री सन्तान के लिये कष्ट का समय भी चल रहा है। राशि चक्र से राहु का कुम्भ राशि के लिये दसवे भाव मे होने से धर्म स्थान भाग्य स्थान पैतृक स्थान आदि के मामले मे कनफ़्यूजन का होना भी मिलता है। किसी प्रकार की मानसिक परेशानी से भी इस राशि के जातको की व्यथा को जाना जा सकता है। समाचार मीडिया आदि के प्रति झुकाव भी माना जा सकता है। गीत संगीत और पुराने जमाने की विचार धारा वाले मानसिक कारणो के प्रति लगाव भी माना जा सकता है। राहु के कारण जो भी वास्तविक कारण राज्य और राज्य की सेवाओं से सम्बन्धित है उनके लिये भी अपनी कनफ़्यूजन वाली स्थिति को प्रकट करने के बाद उल्टी सीधी टिप्पणी करने के लिये जाना जा सकता है। राहु का प्रभाव धन भाव पर होने के कारण अक्समात ही खर्च होने और अपने ही परिवार मे किसी प्रकार का बहुत ही खराब प्रभाव होने के कारण दिक्कत का होना भी माना जा सकता है। पिता के लिये भी शमशानी कारण बनने और बीमारी के लिये दिक्कत का होना माना जा सकता है। राहु का प्रभाव माता मन मकान पर भी होने के कारण छत आदि के कार्य या बनाने बिगाडने के कारण बनते है,अपनेही परिवार से दूरिय देने के लिये भी इस राहु की युति को माना जा सकता है। सबसे अधिक प्रभाव बीमारी आदि के लिये माना जा सकता है जो पीठ आदि के दर्द और नही समझी जाने वाली बीमारियों के लिये भी अपनी युति को दे सकता है। केतु का प्रभाव चौथे भाव मे होने से अपने या अपने रिस्तेदारो के परिवार के लोग कुछ समय तक घर पर डेरा डाल सकते है या उनकी किसी समस्या जो शिक्षा या मकान रहने वाले कारणो से समझी जा सकती है के लिये भी प्रयास करना माना जा सकता है,घर मकान मेपानी और पानी वाले साधनो का बनाना या बिगाडना भी माना जा सकता है किसी प्रकार के शिक्षा वाले कारणो मे दोहरी शिक्षा का प्राप्त करना या किसी प्रकार की ट्रेनिंग आदि का होना भी पाया जा सकता है किसी नियोक्ता द्वारा कोई बैंक बीमा या फ़ायनेन्स वाली नौकरी के लिये भी प्रभाव मिलता है अथवा किसी प्रकार की अस्पताली सहायता के लिये जुडना भी माना जा सकता है। ननिहाल या माता परिवार मे किसी प्रकार की मृत्यु आदि के कारणो मे भी जाना पड सकता है अथवा किसी प्रकार से सहायता का कारण भी बनता है। गुरु का प्रभाव तीसरे भाव मे होने से भी छोटी यात्रायें धर्म या शादी विवाह आदि के मामले मे की जा सकती है। छोटे भाई बहिन की शादी की बाते चलना भी माना जा सकता है। किसी प्रकार के अनैतिक सम्बन्ध बनने का कारण भी बनना पाया जाता है जो आगे चलकर बदनामी आदि दे सकते है। मौसी या छोटी बहिन के द्वारा घर की जिम्मेदारी को भी निभाया जा सकता है। घर से बाहर रहने से इस राशि वाले कुछ समय के लिये अपनी मानसिक स्थिति को ठीक करके चल सकते है।

उपाय

इस राशि वाले के नवे भाव मे शनि होने से शनि पूज्य हो जाता है इस शनि के लिये इस राशि के जातक धर्म स्थानो मे जाते रहे और अपने कुल समाज और धर्म से अपने चलाते रहे तो उनके लिये आने वाले समय मे यह शनि अपनी अच्छी शक्ति देने के प्रभाव को पैदा करेगा। इसके अलावा अगर इस राशि के जातक धर्म से किसी प्रकार से दूर होते है या पीछे जो धर्म लेकर वह चल रहे थे उससे उनकी श्रद्धा खत्म होती है तो आगे के समय मे शनि अपनी शक्ति से उन्हे दिक्कत दे सकता है। इस कारण से उनके आगे किये जाने वाले काम तथा परिवार से सम्बन्धित बिलगाव भी माने जा सकते है।वर्तमान मे जो भी कार्य जीवन साथी के द्वारा किये जाते है वे धीमे और गुप्त होते है उन कार्यों पर अगर नजर नही रखी गयी तो वह जीवन साथी के लिये आगे के समय मे शरीर या मानसिक रूप से बिलगाव की बातो को भी माना जा सकता है जो लोग नौकरी पेशा मे है उनके लिये बहुत ही समझ कर चलने वाली बात को माना जा सकता है कि अगर वे किसी प्रकार से चालाकी से या किसी अन्य कार्य के लिये बार बार बदलाव की सोच रहे है तो जल्दी ही उन्हे नौकरी आदि के कारणो से दूर होकर बहुत ही कठिन समय को निकालने के लिये मजबूर होना पड सकता है। सन्तान के मामले मे अगर कोई फ़्रीजिंग वाली बात है तो उन्हे ध्यान देकर इस मामले मे सुलझाने की कोशिश करनी चाहिये और किसी भी प्रकार से दूर के रिस्ते आदि करने से बचना चाहिये। सफ़ेद नीलम इस राशि वालो के लिये भी सहायता को देने वाला है,इसके अलावा अष्ट धातु का कडा जो दाहिने हाथ मे पुरुष और बायें हाथ मे स्त्रियां पहिन सकती है लाभ देने वाला साबित हो सकता है नीले कपडे चितकबरे कपडे दिक्कत देने वाले हो सकते है और यही रंग उनके लिये घर और वाहन के लिये त्याज्य मानने चाहिये।

मीन राशि

इस राशि का मालिक गुरु है और गुरु के दूसरे भाव मे गोचर करने से रिस्तो के अन्दर किसी न किसी प्रकार की बनाव बिगाड वाली बात मानी जा सकती है प्राप्ति के अन्दर उन्हे नये नये व्यक्ति मिल सकते है लेकिन धन आदि के लिये दिक्कत का समय जून तक माना जा सकता है। वर्तमान मे घर परिवार और व्यवसाय के लिये भी कोई न कोई अडचन उनके सामने आने की बात भी मिलती है। राहु के भाग्य भाव मे होने से भी इस राशि वालो के लिये बहुत ही दिक्कत का कारण इसलिये भी माना जा सकता है क्योंकि इस राशि वाले अपने पिता परिवार और पूर्वजो के प्रति या तो कोई बहुत अच्छा काम कर सकते है या कोई बहुत ही बुरा काम कर सकते है,राहु की गति उल्टी होने के कारण जो भी कार्य उनके द्वारा किये जायेंगे वे सभी आने वाले समय में शक्तियों को समाप्त करने की क्रिया से ही सम्बन्धित हो सकते है। केतु के तीसरे भाव मे होने से मीन राशि वाले जातक व्यवसाय और धन के कारणो के लिये कमन्यूकेशन का सहारा ले सकते है अथवा अपने निजी कार्यों के लिये अपने रिस्तेदारों मे जो भानजा साला देवर या भतीजा आदि हो सकता है की सहायता ले सकते है। शनि का गोचर अष्टम मे होने के कारण जो लोग जमीन जायदाद आदि की खरीद बेच आदि से जुडे है उनके लिये भी बहुत ही कठिन समय का होना माना जा सकता है उनकी किसी असावधानी से उनके कोई भी सौदे आदि अन्धेरे मे जा सकते है या किसी प्रकार का छल आदि मिल सकता है।

उपाय

इस राशि वालो के लिये राहु के उपाय बहुत जरूरी है कारण राहु के द्वारा नवे भाव मे गोचर करने से भाग्य मे कनफ़्यूजन पैदा हो जाता है कोई भी अच्छी शक्ति सहायता नही कर पाती है। शनि के लिये भी इस राशि वाले अपने को आकस्मिक अन्दरूनी बीमारियों से बचा कर चलते है तो ठीक है अन्यथा गैस पाचन क्रिया धन की कमी और रिस्क लेने वाले कारणो मे ठंडक होने से दिक्कत हो सकती है। अधिक जानकारी के लिये moc.liamg|airuadahbortsa#moc.liamg|airuadahbortsa पर लिख सकते है.

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