ज्योतिषीय सलाह

आज लाखो लोग ज्योतिष सीख कर जगत कल्याण की भावना से अपने अपने विचार व्यक्त करते आ रहे है। ज्योतिष को वेद की आंखों के रूप में प्रकट करने के लिये हम उन महान ऋषि और मुनियों के आभारी है जिन्होने अपने जीवन को सितारों की पहिचान और उनक स्वभाव को जानने में लगा दिया। आज जैसे मशीनी उपकरण नही होने के बाद भी उन्होने अपने अपने अनुसार मशीनी उपकरण बनाये और उनसे ग्रहों की चाल और हर चाल में उनके द्वारा दिया जाने वाला प्रभाव मनुष्य पर क्या प्रभाव डालता है के बारे में प्रकट किया। मनुष्य जीवन बहुत ही मुश्किल से मिलता है,इस जीवन की गणना को करने के लिये सिवाय ब्रह्माजी के और कोई अपना मत प्रकट नही कर सकता है,मनुष्य कितना ही विद्वान हो जाये,केवल वह अपने अपने मन के अनुसार और ज्ञान के अनुसार अपना भाव प्रकट कर सकता है। भाव को प्रकट करने के लिये भी सही भावना की जरूरत होती है,अगर भावना के अन्दर लोभ या किसी प्रकार का मोह पैदा हो जाता है तो भावना भी गलत होनी है,कारण लोभ आते ही जिस कारक का लोभ किया गया है वह कारक ही दिमाग में बसेगा,मनुष्य की पीडा दिमाग में नही बस पायेगी। जब तक किसी भी व्यक्ति की पीडा को अपने ऊपर नही समझा जाता है तब तक किसी भी भाव को प्रकट करना बेकार की बात है। पढी हुयी बात के लिये भी यही कहा जा सकता है,कोई कितना ही किताबी ज्ञान प्राप्त कर ले लेकिन जब तक ज्ञान स्वयं अनुभूत नही होता है तब तक फ़लादेश दिया ही नही जा सकता है। धन के लोभ में व्यक्ति अनाप सनाप अनर्गल बातें कहता है,लेकिन सटीकता नही आने पर अपने को तो दोषी बनाता है इस विषय को भी उलाहना दिलवाता है,इसलिये जब तक ज्योतिषीय ज्ञान व्यवहारिक रूप से नही सीख लिया जाये तब तक ज्योतिष के लिये फ़लादेश करना बेकार की बात है।

भाव अपना प्रभाव जरा सी गल्ती पर बदल देता है

ज्योतिष में जन्म समय का बहुत बडा मूल्य है,और समय की जरा सी त्रुटि कुछ का कुछ बखान करने लगती है। कई बार ऐसा भी होता है कि विषय तो सटीकता की तरफ़ जाता है लेकिन परिणाम बदल जाता है। अक्सर परिणाम के बारे में भी कथन सही होता है लेकिन परिणाम को ग्रहण करने वाला बदल जाता है,परिणाम को लेने वाला भी सटीकता की तरफ़ जाता है लेकिन परिणाम का मूल्य बदल जाता है,इसी बात को ध्यान में रखने के लिये ज्योतिष की सलाह लेने के लिये कुछ जरूरी बाते आपको बतानी जरूरी होती है। जैसे आपने अपने जीवन की परेशानी को बता दिया कि धन की कमी है,धन के लिये इतन सा प्रश्न कभी उत्तर नही दे पायेगा,कारण धन आने का और धन को सम्भालने का कोई एक रास्ता तो नही है,मान लिया कि धन के मालिक आपके धन के ही भाव में है,और धन के मालिक को आपके लगनेश ही देख रहे है,तो धन के मालिक को वह मिल रहा है या नही इसका उत्तर तो धन कहाँ से किसे मिलेगा इसका प्रभाव भी देखना पडेगा,एक राशि में तीस डिग्री को सर्वमान्य बनाया गया है,लेकिन एक डिग्री में कितना बल है इसका रूप भी देखना जरूरी होगा,सूक्ष्म रूप में जाने के लिये नाडी का प्रयोग करना जरूरी है,कारण है कि नाडी एक राशि के 150 हिस्से कर डालती है,अब अगर समय की सटीकता है और प्रश्न का रूप सही है तो नाडी अपना प्रभाव बता देगी,लेकिन समय की सटीकता यानी दो घंटे की राशि को एक सौ पचास हिस्सों में बांटने के लिये ज्योतिषी के अन्दर बल चाहिये,और जो भी भाग उस राशि का है उस भाग के बारे में पूर्ण ज्ञान की आवश्यक्ता है,जब तक एक राशि के 150 भागों का पता नही होगा फ़लादेश करना निराट उसी तरह से माना जायेगा कि एक देश के बारे में केवल उसके नाम को बता दिया जाये।

प्रश्न पूंछते समय क्या सावधानिया रखनी चाहिये ?

अधिकतर मामले में लोगों के प्रश्न पूंछे जाते है -"शादी कब होगी","धन कब आयेगा" "बीमारी कब हटेगी","सन्तान कब होगी" इस प्रकार से जब प्रश्न पूंछे जायेंगे तो साधारण सी बात है उसका जबाब भी चलता हुआ दिया जायेगा,जब जबाब चलता हुआ मिलेगा तो सन्तुष्टि भी मिलनी मुश्किल है,जब सन्तुष्टि नही मिली तो ज्योतिष ही बेकार है। यह भावना आते ही जीवन उस रहस्यमयी विषय से अरुचि पैदा हो जायेगी जिससे जीवन की गति का बढना या घटना माना जाता है। प्रश्न करते समय पूरा ब्यौरा देना चाहिये,जैसे प्रश्न शादी का करना है तो सबसे पहले अपने भाई बहिन की शादी के बारे में उल्लेख करें,शादी का प्रयास किस माध्यम से किया गया,शादी वाले आते है लेकिन शादी के बारे में बाते करते समय वे अक्सर तुम्हारे अन्दर क्या देखने की कोशिश करते है,वह कौन सा गुण है जो आपके अन्दर वे नही पाते है,शादी धनी या निर्धन का रूप नही मानी जाती है,शादी का मतलब होता है अपने वंश की वृद्धि और जीवन के दूसरे आयाम में सहायक की जरूरत,शादी कोई मौज मस्ती और खाने पीने घूमने का नाम नही है,अगर किसी के दिमाग में आयेगा कि शादी करने के बाद मजे होंगे विदेश में घूमने को मिलेगा,बढिया रहने को मिलेगा,खूब सारा धन होगा कमाऊ पति या पत्नी मिलेगी और जो भी धन मिलेगा उससे ठाठ बाट लोगों को दिखाऊंगा और तरह तरह से काम सुख की प्राप्त होगी,लेकिन शादी के बाद जितना भी इस प्रकार से सोचा गया है वह पहले तो पूरी तरह से मिलेगा भी नही अगर कैसे भी मिल गया तो एक व्यक्ति कितना घूम सकता है,कितना खा सकता है कितना आराम कर सकता है कितना कामसुख ले सकता है,इन सब बातों को ध्यान में रखने से शादी के बारे प्रश्न करना चाहिये। मतलब यही है कि जब भी प्रश्न किया जाये उसे पिछले कारणों से जोड कर किया जाये,जिससे ज्योतिषी गणना करते समय पिछली बातों की सटीकता में जाये तो आगे की भविष्यवाणी कर सके.

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