मेष राशि

सन २०१० मे मेष राशि का स्थान साल की शुरुआत मे अष्टम स्थान मे है। अष्टम स्थान अपमान मृत्यु जानजोखिम के लिये माना जाता है। इस राशि को शनि कन्या राशि से अष्टम द्रिष्टि से देख रहा है। प्लूटो सूर्य शुक्र राहु और बक्री बुध इस राशि को सुख स्थान से अपने आधीन करने के बाद सहायता मे है,गुरु छठे भाव से गुपचुप रूप से सहायता करने के लिये तैयार है। मंगल बक्री होकर राशि से चौथे भाव मे है लेकिन पराक्रम को याद करवा रहा है,पराक्रम भी धन और परिवार की तरफ़ से मांग रहा है। यह राशि अष्टम मे होने के कारण जो प्रभाव परिवार की तरफ़ से उसके सामने आयेंगे वे इस प्रकार से है।

मेष राशि पर आठवे भाव का प्रभाव

आठवा भाव हमारे जीवन में आने वाली अशुभ स्थितियों तथा मुशीबतों की मात्रा को दर्शाता है,हमारे मकान के अन्दर के हिस्सों मे यह घर मकान की छत जहां खाना बनाने के लिये आग का संबन्ध है,उस स्थान का कारक है। हमारे शरीर के हिस्सों में मेदे पित्त अर्थात गर्मी की मात्रा तथा हमारे शरीर मे भोजन को पचाने की शक्ति की मात्रा का दर्पण भी यही भाव है,हम अपने जीवन में दूसरी औरतों या मर्दों के साथ रहकर तथा हमारे जीवन में हमारी पत्नी या पति कितना सहायक हो सकता है उसका प्रभाव भी यही भाव बताता है। यह हमारी उम्र के हिस्सों से उस उम्र से सम्बन्ध रखता है जब हममें किसी न किसी मात्रा मे साधुपन होने की संभावना पैदा होती है,यानी हमारी दिमागी हालत संसार से विरक्त होने की मालुम होती है। अधिकतर मामलों में व्यक्ति को चोट लगती है वह भी पारिवारिक रूप से और उन लोगों की तरफ़ से जो हमारे सबसे नजदीक होते है और उनके लिये हमारे मन और दिल के अन्दर बहुत ही चाहत होती है और जब हमारे पर कष्ट आता है तो वे अक्समात अपनी आंख को घुमाकर बात करना चालू कर देते है जिन्हे हमने सब कुछ दे दिया होता है वे ही हमारे गाढे वक्त पर दूर चले जाते है और उस समय यह लगता है कि यह संसार केवल स्वार्थ से भरा पडा है और इसे छोडने मे या त्यागने मे ही भलाई है। इसके बाद यह भाव लपेटने के फ़ार्मूले के लिये भी जाना जाता है,किसी की सहायता करने के लिये जा रहे है और हमे यह पता नही है कि सामने वाला किसी अच्छे काम के लिये जा रहा है या बुरे काम के लिये जा रहा है,उसके साथ जाने पर जब वह कोई बुरा काम करता है तो उसके साथ हमारा नाम भी आता है और उसकी मिलने वाली सजा के साथ हम भी लपेट लिये जाते है,यह भाव इस कारण को भी दर्शाता है। तीसरी बात इस भाव से झपेट की भी मानी जाती है,हम किसी दूसरे काम से बाहर जाते है और किसी स्थान पर दंगा हो जाता है,और दंगाइयों के साथ हम भी पुलिस या किसी प्रकार के हादसे में झपेट मे आजाते है,उन दंगाइयों के साथ हमे भी सजा मिलती है,जबकि हमारा उद्देश्य कतई नही था कि हम जाकर उस दंगा को करें या उस दंगे से हमारा कोई सम्बन्ध रहा हो। इन बातों से हमारे सामने जो मुशीबत आती है वह भी इसी भाव से जानी जाती है। इन सब बातों के होने से हम किसी एकान्त जगह पर अपना निवास बनाते है और हमे छुप कर रहना पडता है और जब तक समय नही आजाता हम संसार के सामने नही आपाते है,यह भाव हमारे किस्मत के घर से बारहवा भाव है,हम अपनी किस्मत को मेष राशि के कारण वृष यानी धन को ही अपनी किस्मत मान बैठते है और उसे अपनी किस्मत मानने के कारण धन के कारण या परिवार के मामले मे ही हम धक्के खाते है,यही भाव अगर किसी प्रकार की पूजा पाठ से लिया जाता तो शायद हमे अपमानित नही होना पडता,लेकिन धन के अहम को हम मानकर दूसरों के लिये जानजोखिम जो आने वाली थी उसके लिये हम आगे आकर आ बैल मुझे मार वाली कहावत को चरितार्थ कर लेते है। अपने अपमान का बदला लेने के लिये हम कोर्ट केश या अदालत मे धन को बरबाद करने की हिमाकत करते है,और कोई हमारा साथी नही दिखाई देता है तो केवल धन के सहारे से अपने जीवन को बदलने की कोशिश करते है,रोजी रोजगार के सम्बन्ध मे हमे जो धक्के खाने पडते है वे भी इसी भाव से जाने जाते है,यानी इस राशि वालों के लिये रोजी रोजगार के मामले मे भी धक्के खाने की नौबत आ सकती है,कारण जब उन्होने अपने भगवान को पैसा ही मानलिया होता है। हमारा रहने का स्थान परिवारिक घर मे दक्षिणी दिशा की तरफ़ मुड जाता है और हमे उसी दिशा की यात्रायें और आने जाने के कारण मिलते है,तथा रहने के लिये भी वही दिशा अच्छी लगती है। इसके साथ ही हमारा स्थान अगर कोई शारीरिक कष्ट है तो दवाइयों वाले घर मे रहने के लिये भी प्रकृति मजबूर करती है। हमारे भाग्य की बढोत्तरी के लिये कितना धन का नुकसान होगा वह भी इसी भाव से जाना जाता है,यह भाव मौत का भी घर है और आठ प्रकार की मौतों में कौन सी मौत से इस साल जूझना पडेगा यह भी इसी भाव से जाना जाता है,किसी दबाब के कारण अपने निजी घर को छोड कर बाहर जाने का प्रभाव भी कुछ समय के लिये परिवार से दूर होजाना भी एक प्रकार की मौत ही कही जायेगी। घर का कोई सदस्य जो उम्र और पदवी में छोटा हो वह अगर अपमान कर दे तो वह भी मौत कही जायेगी,केवल शरीर के मरने से मौत को ही नही माना जा सकता है। मेष राशि के रहने वाले स्थान में किसी न किसी प्रकार का शमशान वाला माहौल भी होने की पूरी सम्भावना है,जिस प्रकार से शमशान में सन्नाटा होता है,उसी प्रकार से इस राशि वालों के स्थान में सन्नाटा होने और केवल अपमानित शब्दों को सुनने और रोने चिल्लाने की आवाजों के अलावा और कुछ समझ मे नही आयेगा। शरीर के अन्दर यह भाव हमारी पीठ का कारक है इस साल मेष राशि वालों के लिये पीठ वाले रोग होने की सम्भावना है,कारण इस भाव से लगन मे शनि होने से और पीठ का किसी पत्थर जैसी चट्टान से सटे रहने से और पत्थर या स्थान की ठंडक से पीठ की हड्डी के अन्दर दर्द या जकडन होना भी माना जा सकता है,हमारे शरीर के अन्दर की चर्बी जो पकी नही होती है उसका कारक भी यह भाव है,अक्समात तबियत खराब होने और किसी उल्टे सीधे खाने को खा लेने के बाद होने वाले लगने वाले दस्त भी इसी भाव से माने जाते है,इस भाव का कालपुरुष की कुंडली के अनुसार मालिक बद मंगल है,और इस मंगल के कारक देवता भूत प्रेत पिशाच है,इस राशि का पाला इस साल इसी प्रकार के लोगों से पडेगा।

मेष राशि को सहारा देने वाले कारक

मेष राशि के नवे भाव मे सूर्य शुक्र राहु प्लूटो और बुध है,जब भी मेष राशि को कोई तकलीफ़ होगी तो वह अपनी सहायता को मांगने के लिये सूर्य यानी पिता या पुत्र के निवास स्थान की तरफ़ भागेगा,किसी सांसारिक सहायता के लिये वह बडे नेता या सरकारी सहायता के लिये प्रयास करेगा,लेकिन इन स्थानो में जाने के कारण अक्समात पिता या पुत्र या सरकारी सहायता मे मेष राशि वाले के लिये कोई ना कोई उलझन तब पैदा हो जायेगी जब सहायता देने वाले लोग खुद किसी न किसी आशंका से ग्रसित होकर सहायता देने के लिये असमर्थ हो जायेंगे। राहु का प्रभाव मेष राशि में भाग्य के लिये भी माना जाता है,और मेष राशि वाले अपनी सहायता को प्राप्त करने के लिये भाग्य का सहारा भी लेने से नहीं मानने वाले। मेष राशि वालों के नवें भाव मे बक्री बुध के होने से उनसे की गई बात को पिता या पुत्र या सरकारी व्यक्ति के द्वारा पलत दिये जाने से उन्हे जो सहायता मिलने वाली है उससे भी आशंकाओं के कारण चैन नही आयेगा। अक्सर पिता या पुत्र के घर पर जाकर मेष राशि वालों को नींद नही आयेगी और कई प्रकार की आशंकाओं के कारण उन्हे सारी रात करवटें ही बदलनी पड सकती है। मेष राशि वालों के नवें भाव में बक्री बुध के होने से उनकी बुजुर्ग बुआ या बुआ जैसी स्त्री उसके घर के अन्दर धन या भाग्य के कामो के लिये कुछ न कुछ नुक्ताचीनी जरूर करेगी,मेष राशि वाले अगर किसी विदेश यात्रा पर जाने वाले है तो वीजा या किसी कमी के कारण उन्हे जाने मे परेशानी भी मिलेगी,यह सब प्लूटो के नवें भाव मे होने के कारण मशीनी गडबडी से भी हो सकता है,और उन्हे एक बार के बनाये गये कागजों को दुबारा बनवाना भी पड सकता है। सरकारी मुद्रा के मामले मे भी मेष राशि को परेशानी मिल सकती है किसी प्रकार की गलत मुद्रा के मामले मे इस राशि वाले को परेशानी तब मिल सकती है जब वह उस मुद्रा के बदले मे किसी प्रकार की खरीददारी या मकान या रहने वाले स्थान के लिये मशीन या घर का सजावटी सामान खरीदने जायेगा। शनि के द्वारा मेष राशि के पराक्रम भाव को अष्टम द्रिष्टि से देखे जाने पर वह पराक्रम को दो दिखाने की कोशिश करेगा लेकिन बिलकुल नीचा स्थान होने के कारण उसके पराक्रम को समझा नही जायेगा। उससे छठे भाव मे शनि होने के कारण वह काम करते वक्त अगर किसी नौकर की हैसियत से काम करेगा तो उसका गुजारा हो सकता है,यानी दिन भर काम करने के बाद केवल भोजन और साधारण निवास,लेकिन जिस समय भी इस साल में मेष राशि वाले ने मालिकाना हक दिखाया तो उसे मुंह की खानी पड सकती है और यह शनि उसे नीचे से नीचे ले जाने से बिलकुल नही हिचकिचायेगा। मेष राशि के चौथे भाव मे बक्री मंगल का प्रभाव पूरी साल उसे परेशान करेगा,उसके द्वारा घर के अन्दर की कलह केवल धन के मामले मे होगी,और वह बार बार घर बदलने और यात्रा करने के बाद घर जाने की परेशानी को झेलेगा। मेष राशि वाले को किसी प्रकार की ह्रदय सम्बन्धी बीमारी होने के बाद उसे बार बार घर और अस्पताल के चक्कर लगाने पडेंगे,अगर उसके लिये कोई खून सम्बन्धी परेशानी होती है तो उसे दुबारा से जांच करवाने के लिये जाना पड सकता है,मशीनी चैक करने के बाद हो सकता है कि जांच करने वाली मशीन के अन्दर हुई गणना वाली परेशानी होने के कारण उसे दुबारा से खर्च करने के बाद जांच करवानी पडे। मेष राशि के चौथे भाव मे मंगल बक्री होने से और नवे भाव में सूर्य के होने से पिता वाली परेशानी को इस राशि के व्यक्ति के द्वारा आफ़त समझा जायेगा,वह बात बात में पिता की परेशानियों से अपने अन्दर झल्लाहट को प्रदर्शित करेगा,इसी प्रकार की परेशानी के लिये जातक अपने पुत्र के लिये भी समझ सकता है। सरकारी परेशानी के लिये जातक बार बार सरकारी व्यक्तियों पर आक्षेप भी लगायेगा लेकिन सोल्व की जाने वाली परेशानी को देखेगा भी नहीं। अपनी पैतृक या पूर्वजों वाली सम्पत्ति के लिये भी इस राशि के जातक को ध्यान रखना पडेगा,कारण किसी भी मशीनी गल्ती के कारण नाम या अन्य कारण जैसे जमीनी नाप जोख में अन्तर मिल सकता है,इस कारण के पैदा होने के कारण आगे चलकर अदालती कार्यवाहियां भी करनी पड सकती है जिसके कारण से धन और समय दोनो ही बरबाद हो सकते है।

मेष राशि की धन वाली स्थिति

पिछले सितम्बर के महिने से शनि का कन्या राशि मे प्रवेश हो चुका था,इस कारण से मेष राशि का दैनिक कार्य क्रम फ़्रीज होने लगा है,इस राशि का जातक दैनिक कार्यों के प्रति जाम सा हो गया है,उसे कार्यों के अन्दर मेहनत तो करनी पडती है लेकिन उसकी नगद धन की स्थिति शुक्र के सहारे पर ही निर्भर है,शुक्र का बक्री बुध के साथ होना भी उसके लिये परेशानी का कारक है,वह धन को कमाना चाहता है और रोजाना के कार्यों को भी करना चाहता है लेकिन अपने दोस्तों अपने इष्ट मित्रों की जीवन शैली को कष्ट में देखकर वह अपने दैनिक कार्यों को नही कर पा रहा है,उसे अपने लाभ वाले स्थान पर कार्यों में वे ही काम समझ मे आते है जो खरीद बेच करने के बाद फ़ायदा देना चाहते हो,शनि से गुरु का छठे भाव से देखे जाने के कारण इस राशि का जातक काम की खोज मे अपने अधिक से अधिक समय को बरबाद करेगा,जो विदेश या अन्य स्थान पर जाकर धन कमाने के इच्छुक है वे भी अपनी विदेश जाने के प्रभाव और विदेश मे फ़ैली अराजकता के कारण विदेश जाने का प्रोग्राम आने वाली मई के महिने तक स्थगित ही कर सकते है। राहु का भाग्येश पर पडने वाला प्रभाव अचानक आशंकाओं को पैदा करने वाला होता है,इस राशि के जातक को कोई भी बात अगर हित की भी बताई जायेगी तो उसके द्वारा आशंका करने से वह बात भी आयी गयी हो सकती है। उसके द्वारा बनाये गये सम्बन्धो के अन्दर कोई ना कोई शंका रहने से सम्बन्धों के अन्दर भी दरार की आशंका है,राहु का नवे भाव से देखे जाने और गुरु का शनि के घर मे रहने से बलहीन होने के कारण भाग्य से आने वाली कमाई के अन्दर आशंका ही रहेगी। वैसे मेष राशि का जातक अगर सरकारी नौकरी मे है तो वह मशीनी कामों के द्वारा नगद धन को प्राप्त कर सकता है लेकिन वह धन अवैधानिक रूप से की जाने वाली कमाई ही माना जायेगा जैसे सरकारी तंत्र के अन्दर मिलने वाला कमीशन आदि माना जाता है।

मेष राशि मे विभिन्न ग्रहों का फ़ल

मेष राशि का स्वामी मंगल है और इस वर्ष यह मंगल बक्री होकर चौथे भाव मे विराजमान है,इस मंगल के प्रभाव इस प्रकार से होंगे इस राशि वालो को हर काम मे जल्दबाजी की आदत रहेगी,वह चाहे रहने वाले स्थान की हो या आने जाने के साधन के रूप में हो,वह जल्दी से हर काम को करना चाहेगा,और यही जल्दबाजी इस राशि वाले के साथ वाहन चलाते वक्त एक्सीडेन्ट आदि का कारक होगा और वह मशीनी दुर्घटना उसे लम्बे समय तक अस्पताल और मशीनी जांचों के दायरे मे ले जाने वाला होगा। इस राशि वालों को सबसे अधिक चिन्ता अपने रहने वाले स्थान की सुरक्षा और वाहन की सुरक्षा के लिये होगी,वह अपने धन को इस सब कारकों की सुरक्षा करने के लिये जल्दी तैयार होगा,जैसे घर मे अलार्म लगवाना वाहन की सुरक्षा के लिये बीमा आदि करवाना माना जा सकता है,अस्पताली कारणो से निपटने के लिये मेडिक्योर आदि के लिये जल्दी तैयार हो जाना भी माना जा सकता है। पारिवारिक माहोल मे यह मन्गल अधिक से अधिक क्लेश देने के लिये भी जिम्मेदार माना जा सकता है और अधिकतर उन लोगों के लिये दुखदायी माना जा सकता है जो किराये का व्यवसायिक स्थान लेकर अपना काम कर रहे है,अधिकतर उन लोगों को बहुत परेशानी होगी जो खाने पीने का सामान बनाते है या बेचते है अथवा अपना अस्पताल या इन्जीनियरिंग सन्स्थान चलाते है। रहने वाले स्थान को किराये पर देने वाले कोई नया निर्माण करवाते ही संकट मे पड सकते है,और जो लोग यात्रा आदि का काम करवाते है उनके लिये वाहनों की दुर्घटनायें उन्हे परेशान कर सकती हैं। मंगल से केतु और चन्द्र का बारहवें भाव मे होना छोटी छोटी यात्रा वाला काम करवाने लोग और अधिक परेशान होंगे,या तो उन्हे ड्राइवर समय पर नही मिलेंगे,और मिलेंगे भी तो वे वाहन के साथ कोई ना कोई परेशानी पैदा करने के लिये जिम्मेदार माने जायेंगे। अधिकतर मिथुन राशि वाले ड्राइवर वाहनो को दुर्घटना करने के लिये मुख्य उत्तरदायी माने जा सकते है। अधिकतर मामलों में उन लोगों को अधिक परेशानी होगी जो अपने खास लोगों से जो मिलरहा है उससे अधिक मांगने की कोशिश करेंगे और यह एक क्लेश का मुख्य मुद्दा भी माना जा सकता है। इस राशि के जातकों के अन्दर का क्रोध अचानक तभी फ़ूटेगा जब उनकी मन की मंशा के अनुसार नही मिल पायेगा। भावना मे अधिक उत्तेजना भी इस राशि के जातकों को परेशान कर सकती है,जिस समय इस राशि वालों के लिये मंगल का क्रोध शांत करने की जरूरत पडे उस समय उन्हे अपने क्रोध को साफ़ सफ़ाई या अपने घर के बगीचे के अन्दर जाकर काम करना चाहिये,और जो गुस्सा घर के सदस्यों के लिये है वह गुस्सा उन्हे अपने लान वाले कामो और साफ़ सफ़ाई वाले कामो तथा घर के अन्दर के पडे बेकार के फ़र्नीचर को रिपेयर करने मे लगानी चाहिये।

मेष राशि में सूर्य का फ़ल

सूर्य इस वर्ष की शुरुआत मे नवें भाव मे है और अन्य ग्रहों की चपेट मे भी है,इसलिये फ़िलासफ़ी के मामले मे आप को तभी पूर्णत: विश्वास होगा जब आप किसी भी बात का वैज्ञानिक परिवेश मे निरीक्षण कर लेंगे। इसके अलावा आपका भाव इस साल में काफ़ी समझदारी का माना जा सकता है,क्योंकि तोते की तरह रटने वाले लोग और मनुष्य दिमाग से समझने वाले लोग आपकी मानसिकता को बदलने मे कामयाब नही हो पायेंगे। बाहरी यात्राओं की परख और बाहर के लोगों की मित्रता तभी सम्भव हो सकती है जब आप उस क्षेत्र और उस प्रभाव को अच्छी तरह से समझने वाले होंगे। विदेशी भाषा से आपका पाला पडेगा और विदेशी सभ्यता को देखने परखने का कारण भी समझ में आयेगा। यह सब उन लोगों के लिये भी माना जा सकता है जो सरकारी क्षेत्र से अपना सम्बन्ध रखते है,हो सकता है उनके लिये किसी ट्रेनिंग के लिये भी जाना हो सकता है और किसी प्रकार से कम्पयूटर से सम्बन्धित जानकारी भी हो सकती है। इस वर्ष मेष राशि वाला जातक अपनी मर्यादा के लिये कुछ भी कर सकता है,और दूसरों के लिये अपने सभी सुखों को भी कुर्बान कर सकता है।

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