मेष राशि और उसके व्यवसाय

मेष राशि का स्वामी मंगल होता है और इस राशि की कार्य वाली रूप रेखाको समझने के लिये इस राशि के कार्य स्वामी को समझना भी जरूरी है। लगनेश मंगल का रूप राशि रूपी देश में जातक की स्थिति के रूप में माना जाता है। जैसे मेष राशि का स्वामी मंगल लगन में विराजमान है,तो लगनेश की स्थिति को समझने के लिये लगन को ही राशि के स्वभाव के अनुसार माना जायेगा। व्यक्ति का मुख्य स्वभाव शरीर बल नाम आदि सभी बातें लगन के अनुसार और राशि के स्वभाव के अनुसार ही मानी जायेंगी। लगनेश से दसवें भाव में राशि और उस राशि के मालिक के अनुसार जातक को कार्य करना पडेगा। जैसे मेष राशि का स्वामी मंगल है और मंगल लगन में है तो लगनेश से दसवें भाव का मालिक शनि होगा,और शनि का स्थान अगर लगनेश से बारहवें भाव में है तो जातक को गुरु की मीन राशि के स्वभाव के अनुसार वाले काम करने होंगे। उसी तरह से शनि की द्रिष्टि का भी ख्याल करना पडेगा,कि वह कहां कहां देख रहा है और कौन सा ग्रह उस शनि को बल दे रहा है। जैसे शनि बारहवें भाव में है और छठे भाव में सूर्य उसे देख रहा है तो कार्य के अन्दर छठे सूर्य और कन्या राशि का प्रभाव भी शामिल होगा,विवेचन करते समय इन बातों का विशेष ख्याल रखा जाना उचित होता है। सूर्य का प्रभाव राजनीति से होता है सरकारी कार्यों से होता है पिता और पुत्र के कार्यों से भी जाना जाता है। लेकिन शनि और सूर्य की प्रकृति अलग अलग होने से जातक के कार्यों के लिये माना जायेगा कि जातक अपने जन्म स्थान से दूर जाकर यात्रा वाले कार्य करेगा और सरकारी अनुबन्ध से जुडे कार्य करेगा,इसके अलावा मी राशि का प्रभाव पूर्ण रूप से होने के कारण कोई बडी संस्था जो सरकार से जुडी होगी उसकी देखरेख का काम करेगा। इसके अलावा भी कन्या राशि का प्रभाव सूर्य के अन्दर विद्यमान होगा,जैसे कि जातक के कार्यों के अन्दर रोजाना के दैनिक कार्य भी करवाने की जिम्मेदारी होगी,कर्जा दुश्मनी बीमारी के लिय जातक को सरकार की शरण लेनी पडेगी या पिता अथवा पुत्र के ऊपर निर्भर रहना पडेगा।

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