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संवत २०६५


श्री मन्नपति वीर विक्रमादित्य राज्यात सम्वत २०६५ शाक: १९३० अन्ग्रेजी सन २००८-९ ई. तत्र सतयुग प्रमाणम १७२८००० त्रेता युग प्रमाणम,१२९६००० द्वापर युग प्रमाणम ८६४००० कलियुग प्रमाणम ४३२००० गत कलियुग प्रमाणम ५१०९,भोग्य कलियुग ४२६८९१ भारतीय गणराज्य सम्वत ५९-६० हिजरी सन १४२८-२९ व १४३०,श्री महावीर निर्वाण जैन सम्वत २५३४-३५,फ़सली १४१५-१६, मेषार्के बंगला सम्वत १४१५,कौल्लम १९८३-८४,श्री राम रावण युद्धतोगताब्दा: ८८०१५०,श्री कृष्णावतार: ५२३४,कुरुपाण्डवयुद्धतोगताब्द: ५१०९,मलयालमसन १९८३-८४,पारसी १९७७-७८ तत्र बाहर्स्पतस्य मानेन विष्णुविंशतिकायां प्लवनाम्सम्वत्सर: प्रवर्त्तते.


प्लव नामक सम्वत्सर का फ़ल

प्लव नामक सम्वत्सर में अधिकाधिक वर्षा होने से सृष्टि जलमयी हो जाती है,जिससे जन धन और फ़सलों के अधिकाधिक नुकसान होने की संभावना रहती है,कितने ही प्रकार के रोग फ़ैलने से संसार में त्राहि त्राहि मच जाती है,पुराने रोग जैसे चेचक,मलेरिया और बर्डफ़्लू जैसे रोगों का आतंक धरा पर फ़ैल जाता है,अकाल और फ़सलों की तबाही से जनता में लूट खसोट की वृत्ति बढती चली जाती है,देश का शासन कुछ नही कर पाता है,केवल घोषणाओं का दौर चलता है,चुनाव में धर्म पार्टियां नही विजयी हो पाती है,मुसलमानी राज्य का प्रभाव भारत के अन्दर दिखाई देने लगता है,विदेशी सहायतायें भरपूर रूप से मुसलमानी शासकों को मिलती है,जिससे जनता में क्रांति के असर दिखाई देने लगते है,हडतालों और जाम लगने से जनता के अन्दर मानसिक परेशानियों के साथ कितने ही प्रकार के भय व्याप्त हो जाते है.हर समय किसी न किसी बात का भय जनता में व्याप्त रहता है.


राजा सूर्य का फ़ल

इस संवत का राजा सूर्य होने से वर्षा के प्रभाव में जुलाई अगस्त में कमी आजाती है,जिससे फ़ूल,हरी सब्जियां अन्नादि की पैदावार कम हो जाती है,रोग व्याधि,बुखारों का प्रकोप बढता है,युद्ध का भय भी रहता है,और दिसम्बर के महिने में युद्ध की प्रबल संभावना हो जाती है,भारत के पूर्व की जमीन का विवाद गहराने लगता है,किसी अन्य देश के प्रमुख नेता का अन्त भयानक हो सकता है,अत्याधिक मंहगायी की मार जनता को त्रस्त करती है.


मंत्री सूर्य का फ़ल

इस सम्वत का मंत्री सूर्य है,इसलिये प्रजा के अन्दर भय का होना जरूरी है,रोग आदि की प्रबलता भी रहेगी,देशों के प्रधान मंत्रियों और विदेश मंत्रियों के बीच वार्ता युद्ध का चलना भी जरूी है,चोरो का भय बढेगा,लेकिन अन्य देशों में धान्य की वृद्धि होने से देश में अनाज का आयात करना पडेगा,जो लोग अभी से संग्रह करने लगेंगे,उनको नुकसान उठाना पडेगा.


सस्येश बुध का फ़ल

पृथ्वी को हरा करने में बुध का योगदान काफ़ी असर कारक होगा,ब्राह्मणों की औकात का वर्चस्व बढेगा,देश में किसी भाषाई विवाद के चलते पश्चिमी निवासियों को परेशानी होगी.


मेघेश शनि का फ़ल

हवा के साथ वर्षा होने से वर्षा के बाद ठंड का होना लाजिमी है,ज्येष्ठ के महिने में भी अगर वर्षा होती है,तो पहले अन्धकार होगा,फ़िर ठंडी हवायें चलेंगी,और बाद में वर्षा होने से जकडन बढेगी,रुई और ज्वलन शील पदार्थों की कीमतों वृद्धि होगी,ओला वृष्टि से कृषि को नुकसान पूर्वी राज्यों में अधिक रहेगा.


धान्येश चन्द्र का फ़ल

जनसंख्या घनत्व में बढोत्तरी होगी,जनता के लिये और आयुर्वेदिक पैदावार के लिये यह समय उत्तम कहा जाता है,अन्ग्रेजी दवाइयों के प्रयोग में कमी आती है,दुधारू पशुओं की खरीद फ़रोख्त में बढोत्तरी होगी,दूध और दूध से बने सामान की कीमतों में कमी से बाजारू और कृत्रिम दूध वाले सामान की अधिकता से कीमते कम होंगी.


रसों के राजा गुरु का फ़ल

सुख समृद्धि में वृद्धि होगी,तालाब और सरोवरों का भराव होने से जनता और धरती की तृप्ति होगी,पानी वाली फ़सलों के लिये उत्तम समय है,तेल पैट्रोल आदि के व्यापारी लाभ उठा जायेगे.इस साल आम की फ़सल में रिकार्ड वृद्धि होगी.जनता की मन्दिरों और धार्मिक स्थानों में प्रबलता से धार्मिक लोगों की चांदी का समय है.


अनाज के राजा मंगल का फ़ल

मंगल की सिफ़्त गरम और खरी है,अनाजों में सरसों और चना की पैदावार बढोत्तरी से तेल और दालों के भाव गिरेंगे,लोहा और खेती के औजार आदि की कीमतों में वृद्धि होगी,अनाज के पैदावार के लिये किसी नई तकनीक का विकास होगा.मिलट्री और रक्षा सेना के लिये सप्लाई करने वाले अनाज व्यापारी लाभ कमा जायेंगे.लाल अनाजों की पैदावार में बढोत्तरी होगी.


दुर्गेश शनि का फ़ल

खेती के अन्दर व्याधियां लगने से कंद वाली फ़सलों को नुकसान होने की संभावना है,देश और धरती के विवाद गहराने से राष्टों के अन्दर असंतोष मिलने की संभावना है,व्यापार और लेबर सप्लाई के कामों में फ़ायदा होने के चांस है,काम करने वालों में राज कारीगरों के भाव बढ जायेंगे.


आषाढ नाम वर्ष का फ़ल

राजा लोग अपनी अपनी राजनीति के चलते आपस में उलझे रहेंगे,यह वर्ष राजनीति कलह के वर्ष के रूप में जाना जायेगा,जनता के अन्दर कभी खुशी और कभी गम का माहौल तब बन जाया करेगा,जब उसे कभी लगेगा कि उसकी पार्टी जीत रही है,और कभी लगेगा कि हार रही है,दुराचारियों को समय मिलने से जनता के अन्दर परेशानियां बढ जायेंगी.


रोहिणी निवास का फ़ल

वर्षा को मध्यम करने में रोहिणी का प्रमुख स्थान माना जाता है,जो व्यापारी चल कर व्यापार करने वाले है,या मेला और सामुदायिक केन्द्रों में अपना व्यवसाय करते है,वे ही फ़ायदे में रहेंगे,गाडी और वाहन वाले व्यापारी अपने प्रगति में बैंक आदि के हस्तक्षेप के कारण परेशान होंगे,महंगाई और भ्रष्टाचार के चलते जनता के अन्दर तनाव रहेगा,और किसी भी अफ़सर के या नेता के भ्रष्टाचार के अन्दर पकडे जाने पर हो सकता है,कि जनता अपने हाथ में कानून लेकर उसका सफ़ाया ही करने लगे.


समय का निवास

समय का निवास अबकी बार बनिया के घर पर है,हर काम के लिये बनिया के ऊपर ही निर्भर रहना पडेगा,किराये के घरो और होटलें कमाई का जरिया बन जायेंगी,लेकिन दिसम्बर के बाद से इनमे गिरावट चालू हो जायेगी.


समय का वाहन घोडा है

इस संवत के समय का वाहन घोडा है,और अपनी गति के कारण आने वाले किसी भी चांस को जल्दी से पकडने पर तो वह फ़लदायी हो जायेगा,और जरा से चूकने पर फ़िर वह चांस नही आ पायेगा.जनता के लिये कितने ही साधन सरकार द्वारा दिये जाने से राशन और अन्य साधन से व्यवसाय करने वाले अपने को निरंकुश समझने लगेंगे.


कालमेघ का फ़ल

कालमेघ अबकी बार फ़ैक्टरियों और मजदूर संगठनो पर भारी बन कर आ रहा है,किसी भी आन्दोलन में जाने पर किसी भी संगठन का जनता बायकाट कर सकती है,और किसी नये संगठन के द्वारा अपना काम निकाल सकती है,मजदूर और ग्रामीण वर्ग अपनी चालाकियों के कारण अपना राज्य विरोधी जामा नही फ़ैला पायेंगे,आरक्षण का झंडा लगातार नीचे की तरफ़ जा रहा है,राजनीतिक पार्टियों में आरक्षण के फ़ैलाने वाले अपनी अपनी सांठ गांठ करने के कारण वे अपनी ही जनता से विश्वासघात कर बैठेंगे.


वर्ष के चार स्तम्भ

  • चैत्र शुक्ला प्रतिपदा- जल सतम्भ में रेवती का अभाव
  • बैशाख शुक्ला प्रतिपदा -तृण स्तम्भ में भरणी का अभाव
  • ज्येष्ठ शुक्ला प्रतिपदा - मृगशिरा में वायु स्तम्भ अच्छा है.
  • आषाढ शुक्ला प्रतिपदा - पुनर्वसु के अन्न स्तम्भ के बिगड जाने से अभाव.

वर्षा आदि के विश्वा

वर्षा के ७,अनाज के ११,ठंड के १५,तृण के १५,तेज के ११,वायु के १३,वृद्धि के १५,क्षय के १५,विग्रह के ११,क्षुधा के १५,तृषा के १३,निद्रा के ९,आलस्य के ५,उद्यम के ५,शान्ति के १५,क्रोध के १३,दम्भ के ५,लोभ के ३,मैथुन के १५,रस के ९,फ़ल के १३,उत्साह के ११,उग्रता के ११,पाप के ९,पुण्य के १३,व्याधि के ११,व्याधिनाश के ७,आचार के ५,अनाचार के ९,म्रुत्यु के ५,जन्म के १३,देशोपद्रव के १,देश स्वास्थ्य के ५,चोर भय के ११,चोर भय नाश के ३,उद्भिज के ११,जरायुज के ३,अण्डज के ९,स्वेदज के १५,सम्वत विश्वा १२.


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